ब्लॉगसेतु

Bhavana Lalwani
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 "क्योंकि, मैं तुम्हारा  लौह आवरण उतरते देख रहा हूँ। "'और तुम खुश हो रहे हो ?"" नहीं, लेकिन इतना अंदाज़ा नहीं लगाया था मैंने।""किस बात  का अंदाज़ा ?""तो क्या अंदाज़ा था तुम्हारा ?""जो भी था, जाने दो। ""मेरे ख्याल से एक एक कंकर  फेंकने के बजाय...
sanjiv verma salil
7
एक रचना-अपने सपने कहाँ खो गये?*तुमने देखे,मैंने देखे, हमने देखे। मिल प्रयास करकभी रुदन करकभी हास कर।जाने-अनजाने, मन ही मन, चुप रह लेखे।परती धरती में भीआशा बीज बो गये।*तुमने खोया,मैंने खोया ,हमने खोया।कभी मिलन का,कभी विरह का,कभी सुलह का।धूप-छाँव में, नगर-ग...
 पोस्ट लेवल : geet tum sapne गीत तुम सपने
Kailash Sharma
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कुछ दर्द अभी तो सहने हैं,कुछ अश्क़ अभी तो बहने हैं।मत हार अभी मांगो खुद से,मरुधर में बोने सपने हैं।बहने दो नयनों से यमुना,यादों को ताज़ा रखने हैं।नींद दूर है इन आंखों से,कैसे सपने अब सजने हैं।बहुत बचा कहने को तुम से,गर सुन पाओ, वह कहने हैं।कुछ नहीं शिकायत तुमने की,यह...
PRABHAT KUMAR
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कुछ ऐसे सपने भी होते हैं जिन्हें हम नींद में देखते हैं अनुभव करते हैं, एहसास करते हैं और इन्हीं में ऐसे ही बहुत सारे चेहरों को बदलते किरदारों के रूप में भी देखते हैं। इन सबके बावजूद किसी वजह से हम ऐसे किरदारों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाते।चाहकर भी न बता पाने की वजह...
Abhishek Kumar
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लड़की की कल्पना भी उसके जैसी ही क्यूट और यूनिक से थे. उसके सपनों और ख्वाहिशों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ सभी कुछ मुमकिन था. वो दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग और बेहद खूबसूरत थी. लड़की अपनी इस इमैजनेटिव दुनिया को लेकर हमेशा बड़ी सीरियस रहती थी. उसे अपने अजीबोगरी...
sanjiv verma salil
7
गीत geet .कह रहे सपने कथाएँ.सुन सको तो सुनो इनकोगुन सको तो गुनो इनकोपुराने हों तो न फेंकोबुन सको तो बुनो इनकोछोड़ दोगे तो लगेंगीहाथ कुछ घायल व्यथाएँकह रहे सपने कथाएँ.कर परिश्रम वरो फिर फिरडूबना मत, लौट तिर तिरसाफ होगा आसमां फिरमेघ छाएँ भले घिर घिरबिजलियाँ लाखों...
 पोस्ट लेवल : sapne geet गीत सपने
राकेश  श्रीवास्तव
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           यर्थाथ बच्चे पूँछते हैं सवाल ,माँग&#...
 पोस्ट लेवल : नयी कविता सपने बच्चे
sanjiv verma salil
7
एक रचना *आकर भी तुम आ न सके हो पाकर भी हम पा न सके हैं जाकर भी तुम जा न सके हो करें न शिकवा, हो न शिकायत*यही समय की बलिहारी हैघटनाओं की अय्यारी हैहिल-मिलकर हिल-मिल न सके तोकिसे दोष दे, करें बगावत*अपने-सपने आते-जातेनपने खपने साथ निभातेतपने की बार...
 पोस्ट लेवल : मन सपने sapne tum man तुम
विजय राजबली माथुर
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Kailash Sharma
175
हरे थे जब पातअपनों का था साथगूँजते थे स्वर टहनियों पर बने घोंसलों से।रह गया जब ठूंठअपने गये छूटसपने गये रूठ,कितना अपना सा लगताएक पल का साथी भीजीवन के सूनेपन में।...©कैलाश शर्मा