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ऋता शेखर 'मधु'
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मन पाखी पिंजर छोड़ चलामन पाखी पिंजर छोड़ चला।तन से भी रिश्ता तोड़ चला ।।जीवन की पटरी टूट गयी ।माया की गठरी छूट गयी ।अब रहा न कोई साथी है,मंजिल पर मटकी फूट गयी।।निष्ठुरता से मुँह मोड़ चला ।मन पाखी पिंजर छोड़ चला ।।जीवन घट डूबा उतराया ।माँझी कोई पार न पाया ।शक्ति थी पँखों...
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ऋता शेखर 'मधु'
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क्या तेरा है क्या मेरा हैदुनिया तो रैन बसेरा हैक्या तेरा है क्या मेरा है|यह घर कुछ दिन का डेरा है|साथ चलेंगे कर्म हमारे,यह पाप-पुण्य का फेरा है||मानवता का साथी बनकर,मिल जाता नया सवेरा है |दुनिया तो रैन बसेरा है ||१दुनिया में हर दीन-दुखी को,गले लगाकर के चलना है|बिन...
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ऋता शेखर 'मधु'
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 छंद- शक्ति /वाचिक भुजंगी 122 122 122 12****************************जिसे चाहिये जो दिया है सदामिला है हमें जो लिया है सदान रखते शिकायत न शिकवा कभीसुधा संग विष भी पिया है सदालुभाते नहीं रूप दौलत कभीहृदय से गुणों को जिया है सदासमेकित हुआ नाद ओंकार मेंभ्रमर योग ह...
ऋता शेखर 'मधु'
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*अँधियारी रातों का साथी,बनकर साथ निभाना प्रियवर।रोज नए दीपों की माला, राहों पर धर जाना प्रियवर।अँधियारी रातों का साथी, बनकर साथ निभाना प्रियवर।।जिनके दृग की ज्योति छिन गईमन उनका रौशन कर देना।रंगोली जिस द्वार मिटी हैरंगों की छिटकन भर देना।।ख्वाबों के मोती चुन चुन कर...
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ऋता शेखर 'मधु'
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ऋतुराज की आहट हुई है, माघ का विस्तार है| माँ शारदे ! घर में पधारो, पंचमी त्योहार है||१|| * है राह भीषण ज़िन्दगी की, पग कहाँ पर हम धरें| मझधार में नौका फँसी है, पार कैसे हम करें || तूफ़ान में पर्वत बनें हम, शक्ति इतनी दो हमें | बन कर चरण-सेवी रहें हम, भक्ति भी दे दो...
ऋता शेखर 'मधु'
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हे विनायक एकदंता ! इस जगत को सार दे दो || क्यों भरा हिय में हलाहल, क्यों दिखे बिखरे कपट छल| सोच में संस्कार दे दो, सतयुगी अवतार दे दो || हे गजानन बुद्धिदाता ! ज्ञान का विस्तार दे दो || इस जगत को सार दे दो ||१ खो रहीं संवेदनाएँ, भूलती मधुरिम ऋचाएँ | साज को झंकार दे...
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ऋता शेखर 'मधु'
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गीतिकाआधार छन्द - रजनी (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - गालगागा गालगागा गालगागा गा 2122   2122   2122 2 समान्त - आर, पदान्त - को देखो लिख रहे जो गीतिका उस सार को देखो लेखनी से उठ रहे उद्गार को देखो हो रहे हैं शब्द हर्षित भाव बहने लगे हर्ष में छुपते...
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ऋता शेखर 'मधु'
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विधा:-गीतिका आधार छंद-रजनी मापनी- २१२२ २१२२ २१२२ २ ======================= फूल है अपनी जगह खुशबू रुहानी है | झूमती गाती हवा लाती रवानी है |१| मौत के डर से न जीना छोड़ना साथी प्राण का तन से मिलन जीवन कहानी है|२| बोलते हैं जब पपीहे प्रीत के सुर में वह मिलन की रागिनी...
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ऋता शेखर 'मधु'
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ताटंक छंद में दिनकर पूर्व दिशा से लाल चुनरिया, ओढ़ धरा पर आते हैं | ज्योति-पुँज हाथों में लेकर, शनै-शनै बिखराते हैं || सफर हमारा चले निरंतर, घूम-घूम बतलाते हैं | अग्नि-कलश माथे पर धरकर, हम दिनकर कहलाते हैं || स्वर्ण रश्मियों की आहट से, खेतों ने अँगड़ाई ली | हाथ उठ...
ऋता शेखर 'मधु'
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घरों में रहें, ये बताना हैहमें वायरस को हराना हैकहें लोग, है जीव बाहर कानहीं यान से घर बुलाना हैविषाणु खतरनाक हैं देखोउसे तो सभी को मिटाना हैबिना हाथ धोए न छूना तनवहीं पर उसका ठिकाना हैघुसे कंठ में आँख कानों सेइसी रास्ते को छुपाना हैकरे जो ख़ुराफ़ात कोरोनागरम नीर पीक...