ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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कैसा मिला है साथशीतल उष्ण मिल गएजैसे तुम और हमचक्र घूम कर बता रहाकभी खुशी या गमजो पिघला वह ठोस हुआजीवन अनबुझ राजपतझर की लीला बड़ीबजा बसन्त का साजसूर्य बिना वह कुछ नहींचँदा का मन जान रहाकहाँ तपन घट जाएगीसूरज को भी भान रहाएक दूजे बिन हैं अधूरेपर मिलन की राह नहींअवनी अ...
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ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...
ऋता शेखर 'मधु'
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गीत जाना जीवन पथ पर चलकरलगता नया नया हर पल हैधरती पर आँखें जब खोलींनया लगा माँ का आलिंगननयी हवा में नयी धूप मेंनये नये रिश्तों का बंधनशुभ्र गगन में श्वेत चन्द्रमालगता बालक सा निश्छल हैनया लगा फूलों का खिलनालगा नया उनका झर जानामौसम की आवाजाही मेंफिर से बगिया का भर ज...
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ऋता शेखर 'मधु'
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सबको राह दिखाने वालेहे सूर्य! तुझको नमननित्य भोर नारंगी धारआसमान पर छा जातेखग मृग दृग को सोहेऐसा रूप दिखा जातेआरती मन्त्र ध्वनि गूँजेतम का हो जाता शमनहर मौसम की बात अलगशरद शीतल और जेठ प्रचंडभिन्न भिन्न हैं ताप तुम्हारेपर सृष्टि में रहे अखंडउज्ज्वलता के घेरे मेंनिरा...
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ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठाहर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन।।1प्रातःकाल की वायु , ऊर्जा भर देती नई।बढ़ जाती है आयु, मिट जाती है व्याधियाँ।।2छाता जब जब मेह, श्यामवर्ण होता गगन।भरकर अनगिन नेह, पवन उसे लेकर चला।।3शीतल मंद समीर, तन को लगता है भला।बढ़ी कौन सी प...
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ऋता शेखर 'मधु'
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सबकी अपनी राम कहानी=================जितने जन उतनी ही बानीसबकी अपनी राम कहानीऊपर ऊपर हँसी खिली हैअंदर में मायूस गली हैकिसको बोले कैसे बोले अँखियों में अपनापन तोलेपाकर के बोली प्रेम भरीआँखों में भर जाता पानीमन का मौसम बड़ा निरालापतझर में रहता मतवालादिखे चाँदनी कड़ी धूप...
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ऋता शेखर 'मधु'
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फेसबुक पर एक समूह में पत्र लेखन प्रतियोगिता थी|62 प्रविष्टियों में...अच्छे पत्रों में हमारे पत्र को भी रखा गया इसके लिए खुश हूँ
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ऋता शेखर 'मधु'
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कल माँ पर लिखा...आज एक माँ लिखेगी ।हम उनके दिलों में रहते हैंइसको वे कहते नहींउनके काम बताते हैंलेखनी थामी जब हाथों मेंवे ब्लॉग बनाकर खड़े रहेममा को तुक की कमी न होशब्दों के व्यूह में पड़े रहेshabdvyuh.comहम उनके दिलों में रहते हैंइसको वे कहते नहींउनके काम बताते हैंज...
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ऋता शेखर 'मधु'
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अभिनंदन राम काभारत की माटी ढूँढ रहीअपना प्यारा रघुनंदनभारी भरकम बस्तों मेंदुधिया किलकारी खोई होड़ बढ़ी आगे बढ़ने कीलोरी भी थक कर सोईमहक उठे मन का आँगनबिखरा दो केसर चंदनवर्जनाओं की झूठी बेड़ीललनाएँ अब तोड़ रहींअहिल्या होना मंजूर नहींरेख नियति की मोड़ रहींविकल हुई मधुबन की...
ऋता शेखर 'मधु'
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धरती को ब्याह रचाने दो------------------------------धरती ब्याह रचाती हैपीले पीले अमलतास सेहल्दी रस्म निभाती हैधानी चुनरी में टांक सितारेगुलमोहर बन जाती हैदेखो, धरती ब्याह रचाती है।आसमान के चाँद सितारेउसके भाई बन्धु हैंलहराते आँचल पर निर्मलबहता जाता सिंधु हैओढ़ चुनरि...