ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
0
 समय कठिन हैक्या कुंठा या क्या गिलाजो मिलना था वही मिलामन को खुशियों से भर लोसमय कठिन हैकिसने किसको क्या- क्या बोलाशब्द शब्द किसने है तोलामन को अब तो पावन कर लोसमय कठिन हैजिन बन्धु की याद हो आतीउनको झट से लिख दो पातीया फिर डायल नम्बर कर दोसमय कठिन हैयदि बाकी ह...
 पोस्ट लेवल : कविता सभी रचनाएँ
ऋता शेखर 'मधु'
0
क्षणिकाएँ------------- १.आँधियाँ चलींदो पँखुरी गुलाब कीबिखर गईं टूटकरमन पूरे गुलाब की जगहउन पँखुरियों पर अटका रहा|2रेगिस्तान मेंआँधियों ने मस्ती कीरेत से भर गई थीं आँखेंआँखों पर होने चाहिये थेचश्मे3हवा स्थिर थीजब रौशन किया था एक दीयामचल गई ईर्ष्...
ऋता शेखर 'मधु'
0
सभी मित्रों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ| मेरे इस गीत को फेसबुक के एक बड़े उत्कृष्ट समूह में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है|एकल काव्य पाठ मंच का दशकोत्सव समारोह सम्पन्न -*****^*****^****^****^****^****^****^****^****एकल काव्य-पाठ -एक साहित्यिक मंच द्वारा दस द...
ऋता शेखर 'मधु'
0
कुछ अच्छा भी=========नीरज को दोस्ती करना अच्छा लगता था। सिर्फ दोस्ती ही नहीं करता , यदा कदा घर में दोस्तों को बुलाकर पार्टियाँ भी दिया करता।उसकी पत्नी जूही सहर्ष पार्टियों का इंतेज़ाम करती। नीरज का दस वर्षीय बेटा रोहन भी अपने पिता के मित्रों के बच्चों का दोस्त बन गय...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा सभी रचनाएँ
ऋता शेखर 'मधु'
0
तांका1भोर का रूपनिखरी हुई धूपमाँ सी छुअनचिड़ियों की चहकगुलाबों की महक।2दीये की जिदआँधियों से सामनामद्धिम ज्योतिप्रकाश की कामनालौ को सहेज रही3हरसिंगारसमर्पण की चाहझरी पँखुरीभर कर अँजुरीशिव पूजन चली।4चली लेखनीतलवार से तेजशब्दों की धारमोहक अनुस्वार अनुनासिक चाँद|५कृष्ण...
 पोस्ट लेवल : ताँका सभी रचनाएँ
ऋता शेखर 'मधु'
0
बहुत दिनों बाद हाइकु1पचपन मेंबचपन की लोरीपोते- पोतियाँ।2लम्बी हैं राहेंदामन में सुमनपग में छाले।3तरुणावस्थासपनीले नयननभ का चाँद।4जेठ की धूपसुर्ख गुलमोहर नव उल्लास।5आयी बारिशनभ और नयनअंतर कहाँ।6हरी पत्तियाँगुलाबों की महकघर अँगना।7विशाल वटमूल मूल है कहाँजाँच एजेंसी।8...
 पोस्ट लेवल : हाइकु सभी रचनाएँ
ऋता शेखर 'मधु'
0
हिन्दी पखवारा की रचना -1दो का महत्व-------------------दोनों तट गर मिल जायेंनदिया बहेगी कैसेअगर नहीं हों सुख दुःखजीवन चलेगा कैसेओर छोर के बीच मेंधागे का अस्तित्व हैपति पत्नी के मध्य मनुअटका स्वामित्व हैदिन रात जो चलें न साथतिथि नहीं बदलेगी तर्क वितर्क के बिना कहाँनव...
 पोस्ट लेवल : कविता सभी रचनाएँ
ऋता शेखर 'मधु'
0
आज बधइयाँ बजाओ सखी,कान्हा जी घर आये हैं।।हर्षित हैं वसुदेव देवकी,मधुसूदन मुस्काये हैं।।मुदित हुईं यमुना पग छू कर,गोकुल जाते गोपाला।।वहाँ मिलेंगी मात यशोदाप्रभु बनेंगे नन्दलाला।।तोरण द्वारे लगाओ सखी,कान्हा जी घर आये हैं।।दूध बिलोतीं मात जसोदा,मटकी में दधि भरती हैं||...
ऋता शेखर 'मधु'
0
शंकर जी की नगरी आकर, बम लहरी से दिल डोला है | शिव करते उपकार सभी पर, मन उनका बिल्कुल भोला है || निकल जटा से शिव की गंगा, करने आतीं सबको पावन | हर हर गंगे के नारों से , गूँज उठा है फिर से सावन || जटाजूटधारी के तन पर, व्याघ्र चर्म का इक...
ऋता शेखर 'मधु'
0
मन पाखी पिंजर छोड़ चलामन पाखी पिंजर छोड़ चला।तन से भी रिश्ता तोड़ चला ।।जीवन की पटरी टूट गयी ।माया की गठरी छूट गयी ।अब रहा न कोई साथी है,मंजिल पर मटकी फूट गयी।।निष्ठुरता से मुँह मोड़ चला ।मन पाखी पिंजर छोड़ चला ।।जीवन घट डूबा उतराया ।माँझी कोई पार न पाया ।शक्ति थी पँखों...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ