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ऋता शेखर 'मधु'
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उसेफूलों सेबहुत प्यार थापत्ता-पत्ता बूटा बूटाउसके स्पर्श सेखिले रहतेनित भोरवह औरउसकी फुलवारीकर में खुरपीसजाती रहती क्यारीगुनगुनाती रहतीभूल के दुनिया सारीगेंदा,गुलाब, जूहीचम्पा चमेलीबाग में तोवही थीं सहेलीऔर एक थाउड़हुल का पेड़उसकी डालियाँलचक जाती थींपाँच पँखुड़ी वा...
ऋता शेखर 'मधु'
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पिता....पिता को याद करने के लिए फ़ादर्स डे की जरूरत नहीं...स्थिर कदम अडिग विचारमन  निडर मधुर व्यवहारआज अक्स बन गए पिता केहृदय में भर लिया धैर्य अपार|कहा पिता ने 'सच अपनाओझूठ को  कदमों में झुकाओ'शान से गर्दन तनी रहेगीबेधड़क तुम जीते जाओ|कभी सख्त और कभी नरम...
 पोस्ट लेवल : सभी रचनाएँ 180.पिता...
ऋता शेखर 'मधु'
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हिन्दी दिवस पर समर्पित कुछ हाइकु-पुष्प...१.हिंद-संविधाचौदह सितम्बरहिन्दी दिवस|२.संविधा धारातीन सौ तेतालिसवर्णित हिन्दी|३.राष्ट्र की भाषालिपि देवनागरीबोलें तो हिन्दी|४.गरिमामयीलेखन में सरलसौम्य है हिन्दी|५.हिन्दी दीपकरौशन हिन्दुस्तानफैला उजास|६.सुख का मूलभारतेन्दु क...
ऋता शेखर 'मधु'
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जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...प्रस्तुत है लोकगीत विधा पर आधारित मुरली मनोहर से शिकायत करता एक गीत...काहे सताया बोलो काहे सताया राधे को कान्हा तूने काहे सतायामार कंकरी उसकी फोड़ी गगरिया पनघट की डगर पर उसको रुलाया काहे रुलाया बोलो काहे रुलाया राधे को कान्हा तूने...
ऋता शेखर 'मधु'
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मेरी माँ...अभी तो उसके ही तन का हिस्सा हूँ मैंख्वाबों में मुझसे मिल रही है मेरी माँपा न जाऊँ कहीं अमावस का अंधकारजतन से रुपहली चादर सिल रही है मेरी माँजहाँ भी लूँ श्वास, सुवास ही मिले सदापिटारे में गुलाबौं को गिन रही है मेरी माँशीतल समीर संग हिंडोले पर झुला सकेमधुर...
ऋता शेखर 'मधु'
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बारिश का मौसम सुहाना हैपावस ने छेड़ा तराना हैकाँधे सजते झूलते काँवरभजनों में शिव-गुण को गाना हैसुंदर पत्ते बेल के लाओशिवशंकर जी पर चढ़ाना हैसावन में चुनरी हरी लहरीहाथों में लाली रचाना हैबच्चे पन्ने फाड़ते झटपटधारा में किश्ती चलाना हैचूड़ी धानी सी खरीदे वेपरिणीता को...
ऋता शेखर 'मधु'
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पूनो की रात आती जबसमंदर क्युँ मचल जाता हैराज़े-दिल बयाँ करने कोवह भी तो उछल जाता हैखामोश चाँद ने कुछ कहाफिर से वह बहल जाता हैकभी बहाने से सैर केलहरों पे निकल जाता हैसुनने प्रेमी दिल की व्यथाकूलों पर टहल आता हैकरुण कहानी मुहब्बत कीसुनकर वह पिघल जाता हैसमेट अश्कों की...
ऋता शेखर 'मधु'
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ताँका........विश्व बाल श्रम दिवस पर-१२ जूनबालक रोयाबस्ता चाहिए उसेहै मजबूरदिल किया पत्थरबनाया मजदूर|१|कोमल हाथचुभ गए थे काँचबहना रोईभइया आँसू पोंछेदोनो कचरे बिनें|२|दिल के धनीराजा औ' रंक बच्चेदेख लो फ़र्कएक खरीदे जूतापोलिश करे दूजा|३|गार्गी की बार्बीकमली ललचाई...
ऋता शेखर 'मधु'
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यह हरिगीतिका समर्पित है उन वीर जवानों और उनकी परिणीताओं को जो देश की रक्षा के लिए विरह वेदना में तपते हैं...दिल में बसा के प्रेम तेरा, हर घड़ी वह रह तके|लाली अरुण या अस्त की हो, नैन उसके नहिं थके||जब देश की सीमा पुकारे, दूर हो सरहद कहीं|इतना समझ लो प्यार उसका, राह...
ऋता शेखर 'मधु'
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५ जून विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है...मत संहार करो वृक्षों काश्मशानी निस्तब्धता छाई हैउभरी दर्द भरी चहचहाहटनन्हें-नन्हें परिंदों की,शायद उजड़ गया था उनका बसेरामनुष्य ने पेड़ जो काट दिए थे|गुजर रही थी लम्बे रास्ते सेगूँजी एक सिसकीनज़रें दौड़ाईं इधर उध...