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ऋता शेखर 'मधु'
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बारिश का मौसम सुहाना हैपावस ने छेड़ा तराना हैकाँधे सजते झूलते काँवरभजनों में शिव-गुण को गाना हैसुंदर पत्ते बेल के लाओशिवशंकर जी पर चढ़ाना हैसावन में चुनरी हरी लहरीहाथों में लाली रचाना हैबच्चे पन्ने फाड़ते झटपटधारा में किश्ती चलाना हैचूड़ी धानी सी खरीदे वेपरिणीता को...
ऋता शेखर 'मधु'
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पूनो की रात आती जबसमंदर क्युँ मचल जाता हैराज़े-दिल बयाँ करने कोवह भी तो उछल जाता हैखामोश चाँद ने कुछ कहाफिर से वह बहल जाता हैकभी बहाने से सैर केलहरों पे निकल जाता हैसुनने प्रेमी दिल की व्यथाकूलों पर टहल आता हैकरुण कहानी मुहब्बत कीसुनकर वह पिघल जाता हैसमेट अश्कों की...
ऋता शेखर 'मधु'
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ताँका........विश्व बाल श्रम दिवस पर-१२ जूनबालक रोयाबस्ता चाहिए उसेहै मजबूरदिल किया पत्थरबनाया मजदूर|१|कोमल हाथचुभ गए थे काँचबहना रोईभइया आँसू पोंछेदोनो कचरे बिनें|२|दिल के धनीराजा औ' रंक बच्चेदेख लो फ़र्कएक खरीदे जूतापोलिश करे दूजा|३|गार्गी की बार्बीकमली ललचाई...
ऋता शेखर 'मधु'
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यह हरिगीतिका समर्पित है उन वीर जवानों और उनकी परिणीताओं को जो देश की रक्षा के लिए विरह वेदना में तपते हैं...दिल में बसा के प्रेम तेरा, हर घड़ी वह रह तके|लाली अरुण या अस्त की हो, नैन उसके नहिं थके||जब देश की सीमा पुकारे, दूर हो सरहद कहीं|इतना समझ लो प्यार उसका, राह...
ऋता शेखर 'मधु'
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५ जून विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है...मत संहार करो वृक्षों काश्मशानी निस्तब्धता छाई हैउभरी दर्द भरी चहचहाहटनन्हें-नन्हें परिंदों की,शायद उजड़ गया था उनका बसेरामनुष्य ने पेड़ जो काट दिए थे|गुजर रही थी लम्बे रास्ते सेगूँजी एक सिसकीनज़रें दौड़ाईं इधर उध...
ऋता शेखर 'मधु'
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चैत के महीने में नीम की पत्तियाँ, फूल, फल, छाल आदि का प्रयोग खाने या लगाने के लिए किया जाता है|इससे काफी रोग दूर भाग जाते हैं| यह सबसे अधिक आक्सीजन देने वाला भी पेड़ है अतः इसके नीचे समय बिताने से शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है| इसी आधार पर प्रस्तुत है एक गीत...निमिया...
ऋता शेखर 'मधु'
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शिव विवाहविवाह की रस्मबदन पर भस्मसिर पर जटाअलबेली छटादहकते भालकमर में छालसर्प का हारबैल पर सवारऐसो सिंगार कियो शिव नेपरछावन को आह्लादित माताजहरीली फुफकार परविस्फरित नयनों से मूर्छित हुई जाती है|बराती बन चलेभूत-बिच्छु-प्रेतकरें गज़ब का शोरअज़ब बोल समेतखड़काते करतालड...