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sanjiv verma salil
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बुंदेली कहानीसमझदारी*आज-काल की नईं, बात भौर दिनन की है।अपने जा बुंदेलखंड में चन्देलन की तूती बोलत हती।सकल परजा भाई-चारे कें संगै सुख-चैन सें रैत ती।सेर और बुकरियाँ एकई घाट पै पानी पियत ते।राजा की मरजी के बगैर नें तो पत्ता फरकत तो, नें चिरइया पर फड़फड़ाउत ती।सो ऊ राजा...
sanjiv verma salil
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नवगीत:समझदारी*साक्षरता हीसमझदारी नहीं है*बीज, पानी, खाद कीमात्रा प्रचुर हैभूमि है पर्याप्तउर्वरता मुखर हैसुरक्षा कर नहीं पातानिबल मालीउपकरण थामेमगर क्यारी नहीं हैसाक्षरता हीसमझदारी नहीं है*औपचारिकताहुए कानून सारेस्वार्थ-सुविधा हीहुए हैं हमें प्यारेनगद सौदे कीनहीं ह...
सुशील बाकलीवाल
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        हीरानगर का सेठ मोतीराम बहुत परोपकारी होने के साथ ही अपने गुरु रामदीन की हर आज्ञा का पालन करता था और परेशानी की स्थिति में सलाह भी उन्हीं से लिया करता था ।         एक दिन सेठ मोतीराम अपन...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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खुद को समझदारी का पैमाना मान कर लोग बहुत आसानी से कह देते हैं बहुत नादान है वो कितना भी समझाओ समझता ही नहीं है खुद कभी नहीं सोचते क्या समझाने का तरीका ठीक था सीधे सरल शब्दों में था या घुमावदार क्लिष्ट भाषा में अस्पष्ट था © डा.राजेंद्र तेला,निरंतर462-02-02--...