ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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       प्राय: पारिवारिक पिकनिक पार्टियों में, मंदिर, बगीचे या ऐसे ही सार्वजनिक स्थानों पर समूह में बैठकर या फिर अपने दैनिक जीवन में कचोरी-समौसे, पोहे, जलेबी, इमरती जैसी खाद्य सामग्री बाजार में उपलब्ध न्यूज पेपर के टुकडों पर रखकर बेची हुई हम आसान...
kumarendra singh sengar
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पिछले दिनों अमेरिका द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने वाले कतिपय देशों के खिलाफ बमबारी की गई. समूचे विश्व में इस तानाशाहात्मक रवैये का विरोध किया गया. भारत ने बड़े ऊँचे सुर में इस कार्यवाही का समर्थन किया कि वह आतंकवाद के विरुद्ध की गई कार्यवाहियों का समर्थन करता है. इस...
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जिस तरह की स्थितियाँ देश में, प्रदेश में बन रही हैं वे सारी की सारी किसी न किसी रूप में गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर रही हैं. विदेशों में हुई क्रांतियाँ इस तरह के सामाजिक वातावरण के बाद ही उत्पन्न हुई थी, जैसी कि स्थितियाँ भारतीय समाज में बन-बिगड़ रही हैं. यह बात...
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भारतीय संस्कृति और सभ्यता की रक्षक के रूप में उदीयमान हुए दल भाजपा की वर्तमान शैली अब मात्र सत्ता सुख की परिचायक नजर आ रही है. किसी ज़माने में दो की एकल संख्या से आज सैकड़े में पहुँचने वाली इस पार्टी का जो अभियान, जोश बुलंदी पर था, वह अब निश्चय ही निम्न से निम्नतर की...
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पिछले दिनों उ०प्र० की राजनीति में अच्छाई व बुराई दोनों रूपों को देखने का मौका मिला. बुराई के रूप में यदि विधानसभा में जूते, माइक बगैरह चले तो अच्छाई के तहत राज्यपाल ने कल्याण सिंह सरकार को बहुमत सिद्ध करने का मौका दिया. बुराई का एक क्षण देश की मोर्चा सरकार द्वारा र...
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ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ की भारत यात्रा का क्या मकसद है, यह किसी ने ज़ाहिर नहीं किया परन्तु जलियांवाला बाग़ की यात्रा करना अवश्य उनकी मानसिकता को उजागर करता है. आख़िरकार जिस देश ने कभी हम पर शासन किया हो और शासन ख़तम हुए भी महज 50 वर्ष बीते हैं, तो कहीं न कहीं महारा...
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यदि आज यह सवाल किया जाये तो संभव है कि वह सवाल करने वाले को मूर्ख ही समझे. यह एक कटु सत्य है कि आज से पचास वर्ष पूर्व स्वतंत्र होने के बाद भी हम स्वतंत्र नहीं हैं. यदि ऐसा हो तो सोचने की बात है कि हम परतंत्र किस दृष्टि से हैं. यदि हम अपने जमीर की आवाज़ को सुनकर अपने...
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फिर भाजपा और सत्ता की भूखी पार्टियों में कोई फर्क नहीं रहेगा +++++++++++++++++++++++++++++++++++++++ तमाम ऊहापोह की स्थिति आत्मविश्वास की कमी के बाद भी गठबंधन प्रत्याशी कृष्णकांत उपराष्ट्रपति के पद पर काबिज हो गए। मोर्चा व कांग्रेस के कुछ सांसद तो निकल भागे पर अंतत...
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राष्ट्रपति का चुनाव आम सहमति से नहीं चुनाव द्वारा हो +++++++++++++++++++++++++++++++++++++ देश की मौजूदा स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि सभी दल एक अज्ञात भय से सशंकित हैं। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, जद हो या सपा, सभी को भय चुनाव का है। इस समय देश में भले ही केन्द्र...
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देश में लोकतंत्र के प्रति सभी राजनीतिक दल उदासीन +++++++++++++++++++++++++++++++++अंततः सीताराम केसरी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आसीन हो ही गए। पार्टी में उनकी स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि क्या वे इस कुर्सी को प्राप्त कर सकेंगे। बहरहाल अध्यक्ष प...