ब्लॉगसेतु

डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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 भारत में भी है ‘सिल्क रूट टूरिज़्म’ का मजामध्यकालीन व्यापारिक गतिविधियों की रोचक और साहसिक कथाएँ सिल्क रूट या रेशम मार्ग में बिखरी पड़ी हैं। सिल्क रूट का सबसे चर्चित हिस्सा, यानि उत्तरी रेशम मार्ग 6500 किलोमीटर लंबा है। दुनिया-भर में बदलती स्थितियों के कारण स...
kumarendra singh sengar
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सामाजिकता का ताना-बाना वर्तमान में किस कदर उलझ गया है, इस बात की कल्पना कर पाना भी कई बार सम्भव सा नहीं लगता है. जीवन की आपाधापी में, मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की जद्दोजहद में इंसान रिश्तों की कदर करना भूलता सा जा रहा है. रिश्तों का आपसी साहचर्य भी उसके लिए वि...
जेन्नी  शबनम
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मुट्ठी से फिसल गया ******* निःसंदेह, बीता कल नहीं लौटेगा   जो बिछड़ गया, अब नहीं मिलेगा   फिर भी रोज़-रोज़ बढ़ती है आस   कि शायद मिल जाए वापस   जो जाने अनजाने, बंद मुट्ठी से फिसल गया।   खुशियों की ख़्वाहिश. गो...
 पोस्ट लेवल : व्यथा समाज रिश्ते
kumarendra singh sengar
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आए दिन रिश्तों की बदलती परिभाषा देखने को मिलती है। अचानक से सम्बन्धों की प्रगाढ़ता में नकारात्मक परिवर्तन उत्पन्न हो जाते हैं। रिश्तों, सम्बन्धों की ऐसी प्रगाढ़ता के अचानक से समाप्त होने के पीछे की स्थिति का आकलन लोग करने के बजाय सम्बन्धों, रिश्तों को तोड़ने में ज्या...
kumarendra singh sengar
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अकसर कहने-सुनने में आता है कि अँधेरे में परछाई भी साथ छोड़ देती है। इसका सीधा सा अर्थ इस बात से लगाया जाता है कि लोग मुश्किल समय में, किसी कठिनाई में साथ छोड़ देते हैं।  ऐसा सत्य भी है मगर यही अंतिम सत्य नहीं है। कठिनाई में भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो लोगों की ताक...
kumarendra singh sengar
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 किसी से प्रेम हो जाना, किसी के प्रति आकर्षण होना, किसी का पसंद आने लगना, कोई दिल को अच्छा लगने लगता है आदि-आदि बातें लगभग सभी के साथ होती हैं. ये और बात होती है कि बहुतायत लोग अपनी पसंद, अपने आकर्षण को प्रदर्शित नहीं करते हैं, यहाँ तक कि जिसे पसंद करते ह...
kumarendra singh sengar
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सुबह लगभग दस बजे का समय है. बाजार में हलचल अभी शुरू होती जा रही है. दुकानें भी आराम-आराम से खुलती दिख रही हैं. ऐसी ही सामान्य सी सुस्त सुबह में सड़क के किनारे एक महिला बेहोशी की हालत में सड़क किनारे गिरी हुई है. वह अकेली नहीं है बल्कि उसके आसपास कई लोगों की भीड़ भी है...
kumarendra singh sengar
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ओशो, ये नाम चर्चा में आते ही लोगों के मन-मष्तिष्क में दर्शन, प्रेम न उभरता है बल्कि उभरता है उन्मुक्तता का वातावरण, स्वतंत्र यौन सम्बन्धों पर ओशो की बेबाक राय. बिना ओशो को पढ़े, बिना उनके विचारों की जाने आज भी लाखों लोग ऐसे हैं जो उनके विरुद्ध अनर्गल बयानबाजी करने म...
kumarendra singh sengar
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आज, 03 दिसम्बर को सभी देश दिव्यांगजनों के लिए मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस मना रहे हैं. वर्ष 1976 में संयुक्त राष्ट्र आम सभा द्वारा विकलांगजनों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रुप में वर्ष 1981 को घोषित किया गया था. इस दिवस के मनाये जाने का उद्देश्य अंतरराष्...
kumarendra singh sengar
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आज विश्व एड्स दिवस पर बस इतनी सी बात कि यदि हम अपनी जीवन-शैली संयमित रखेंगे तो इस बीमारी से बचे रहेंगे. एक बात याद रखिए कि निरोध (कंडोम) का सबसे पहला उपयोग परिवार नियोजन के लिए किया गया था न कि एड्स की रोकथाम के लिए. इसे तो बाद में लोगों की यौन सम्बन्ध बनाने की&nbs...