ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आज के दौर में जबकि एक तरफ संवैधानिक रूप से चलने की बात की जाती है उस समय में संवैधानिक क्या है, इसे लेकर भी संशय बना हुआ है. हैदराबाद की जघन्य घटना के बाद आम जनमानस में आक्रोश बना हुआ था और आरोपियों को जनता के हवाले करके, जनता के द्वारा हिसाब बराबर किये जाने की आवा...
kumarendra singh sengar
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हैदराबाद में चिकित्सक महिला के साथ हुई वीभत्स वारदात के बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. इस बहस के केन्द्र में जहाँ महिलाओं की सुरक्षा है, शासन-प्रशासन की कानून व्यवस्था है वहीं इसके साथ-साथ मजहब विशेष के पुरुषों द्वारा ऐसे जघन्...
अनीता सैनी
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 घटनाएँ लम्बी कतार में बुर्क़ा पहने  सांत्वना की  प्रतीक्षा में लाचार बन  खड़ी थीं | देखते ही देखते दूब के नाल-सी बेबस कतार  और बढ़ रही थी |समय का हाल बहुत बुरा था 1920 का था अंतिम पड़ाव&nb...
kumarendra singh sengar
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बेटियों के साथ होने वाली किसी भी घटना के बाद एक आम पोस्ट आती है कि बेटियों के बजाय बेटों को शिक्षा दें कि वे स्त्री को एक इन्सान समझें. हम बराबर और बार-बार कहते हैं कि समाज में स्त्री-पुरुष का, लड़के-लड़की का, बेटे-बेटी का भेद करने से कभी कोई सुधार नहीं आने वाला. बे...
अनीता सैनी
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तल्ख़ियाँ तौल रहा तराज़ू से ज़माने नैतिकता को क्षणभँगुर किया,    दौर फिर वही वक़्त दोहराने लगा,  हटा आँखों से अहम-वहम की पट्टीवक़्त ने फ़रेब का शृंगार किया | संस्कारों में है सुरक्षित आज की नारी,   एहसास यही लगा...
kumarendra singh sengar
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अक्सर मन में सवाल उठा करते हैं कि व्यक्ति आपस में सम्बन्ध क्यों बनाता है? आपस में दोस्ती जैसी स्थितियों की सम्भावना वह क्यों तलाशता है? क्यों दो विपरीतलिंगी आपस में प्रेम करने लग जाते हैं? क्या ऐसा होना प्राकृतिक है? क्या ऐसा मानवीय स्वभाव की आवश्यकता के चलते किया...
सचिन श्रीवास्तव
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सचिन श्रीवास्तवआप इस पोस्ट को पढ़ें इसके पहले ही मैं यह साफ कर दूं कि यह व्यंग्य नहीं है। शराबियों पर चुटकुले बाजी और उन्हें कोसने के अलावा सचमुच कभी कोई गंभीर बात नहीं की गई। डॉक्टर, इंजीनियर से खिलाड़ी, अभिनेता और अब तो बिरियानी खाने वालों से लेकर बेवजह दौड़ने वालों...
 पोस्ट लेवल : समाज
जेन्नी  शबनम
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महज़ नाम  *******   कभी लगता था कि किसी के आँचल में   हर वेदना मिट जाती है   मगर भाव बदल जाते हैं   जब संवेदना मिट जाती है   न किसी प्यार का ना अधिकार का नाम है   माँ संबंध नहीं   महज पुकार क...
 पोस्ट लेवल : रिश्ता माँ संतान समाज
PRAVEEN GUPTA
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साभार: चेतना सन्देश 
kumarendra singh sengar
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ये विचार करना और लाना अपने आपमें ही बहुत मुश्किल होता है कि कोई व्यक्ति कैसे सैकड़ों व्यक्तियों के भोजन की व्यवस्था अपनी आय से करता होगा. ये अपने आपमें सोच पाना भी दुष्कर है कि कोई व्यक्ति अपनी पूरी मासिक आय को बच्चों के पालन-पोषण में व्यय कर देता है. ये शायद आपकी क...