ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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क्या आने वाले दिनों में ऑनलाइन समारोह समाज की पहचान बनेंगे? क्या आने वाले दिनों में लोगों का विचार-विनिमय का माध्यम ऑनलाइन ही होगा? क्या आने वाले दिनों में हम सभी को अपनी बात कहने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों का ही उपयोग करना होगा? समाज जिस तरह से एकाकी र...
PRAVEEN GUPTA
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kumarendra singh sengar
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फिल्म इंडस्ट्री में एक कलाकार ने आत्महत्या क्या की, ऐसा लगने लगा जैसे देश की पहली आत्महत्या है. कुछ लोग इसे हत्या भी बता रहे. एक पल को इस पर विचार कर लिया जाये, तब भी जिस तरह से समाज की युवा पीढ़ी इस पर अपना दिमाग केन्द्रित किये है, लग रहा है जैसे देश में पहला केस ह...
जेन्नी  शबनम
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इतनी-सी बात इतनी-सी फ़िक्र******* दो चार फ़िक्र हैं जीवन के   मिले गर कोई राह, चले जाओ   बेफ़िक्री लौटा लाओ   कह तो दिया कि दूर जाओ   निदान के लिए सपने न देखो   राह पर बढ़ो, बढ़ते चले जाओ   वहाँ तक जहा...
 पोस्ट लेवल : मजदूर समाज
kumarendra singh sengar
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चीनी वायरस कोरोना के कारण जन-जीवन अस्तव्यस्त होता नजर आ रहा है. लॉकडाउन के चार चरणों के बाद जब देश में अनलॉक की प्रक्रिया आरम्भ हुई तो भी लोगों में एक तरह का डर बैठा हुआ है. ये और बात है कि बहुत से लोग इस डर का प्रदर्शन कर दे रहे हैं और बहुत से इसे छिपाने में सफल ह...
kumarendra singh sengar
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प्रेम, प्यार, मुहब्बत, इश्क ये शब्द आज के समय में गंभीरता से नहीं लिए जाते हैं. इनके पीछे कहीं व्यंग्य का भाव, कहीं उपेक्षा का भाव, कहीं अन्योक्ति का भाव छिपा दिखता है. इश्क की चर्चा होने से पहले ही सामने वाला अपने दिमाग में एक छवि उभर कर स्थायी भाव ग्रहण कर लेती ह...
kumarendra singh sengar
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सुनते हैं कि आज संयोग बना है नौ सौ साल बाद कि पाँच ग्रह एक समान रेखा में हैं. यह संयोग सूर्य ग्रहण के समय बन रहा है. यह भी अपने आपमें एक अचरज कहा जायेगा कि इस वर्ष सबसे अधिक समय तक रहने वाला सूर्य ग्रहण होने जा रहा है. लगभग छह घंटे तक रहने वाले इस सूर्य ग्रहण ने सब...
kumarendra singh sengar
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किसी घटना के सामने आने के बाद वैचारिकी उसी तरफ मुड़ जाती है या कहें कि तमाम विचार उसी घटना के इर्द-गिर्द भटकने लगते हैं. इन विचारों में पक्ष, विपक्ष जैसी स्थिति देखने को मिलने लगती है. विचार-विमर्श की दृष्टि से ऐसा होना गलत नहीं है मगर इसे लेकर विचार रखने वाले का आक...
जेन्नी  शबनम
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महात्मा गाँधी ने कहा था कि व्यक्ति अगर हिंसक है तो वह पशु के समान है। मुझे यह महसूस होने लगा है कि मानव पशु बन चुका है और पशु मानव से ज्यादा सभ्य हैं। अगर पशुओं को नुकसान न पहुँचाया जाए, तो वे कुछ नहीं करते हैं। पशुओं में न लोभ है, न द्वेष, न ईर...
 पोस्ट लेवल : जानवर हिंसा समाज
kumarendra singh sengar
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लॉकडाउन के बाद अब नई शब्दावली चलन में आ गई है, अनलॉक. वैसे इन दोनों शब्दों से लोग पहले से परिचित रहे हैं मगर इस सन्दर्भ में पहली बार प्रयोग कर रहे हैं. इस लॉकडाउन लगने, खुलने को लेकर लोगों में अजब सी उथल-पुथल है. जब इसे लगाया गया था तो इनके पेट में मरोड़ उठी थी. उसक...