ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल...
PRAVEEN GUPTA
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इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज में अनाचार, अत्याचार, दुराचार भ्रष्टाचार, हद से गुजरता है तो कोई अवतारी पुरूष जन्म लेता है और अव्यवस्थाओं व पापों के केन्द्र को नष्ट करता है। भगवान राम ने रावण का अन्त किया। भगवान कृष्ण ने कंस का अंत किया और अग्रसेन जी ने कुंदसेन का अ...
शिवम् मिश्रा
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राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल...
शिवम् मिश्रा
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राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल म...
शिवम् मिश्रा
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राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल म...
Vikram Pratap Singh Sachan
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हिन्दू धर्म की एक खासियत रही है कि स्थापित धार्मिक व्यवस्थाओं को समय-समय पर विभिन्न वर्गों से चिंतको से चुनौतियाँ मिलती रही है और उत्तरोत्तर सुधार भी हुये है। सती प्रथा हो, बालविवाह हो, छुआछूत हो, बहुविवाह रहा हो या कुछ और जागरूक लोगों ने सवाल उठाये और काम भ...
 पोस्ट लेवल : समाज सुधारक नायक
शिवम् मिश्रा
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राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में न...
केवल राम
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वैसे तो परम्पराओं के प्रति आकृष्ट होना कोई बुरी बात नहीं है, वह हमारे जीवन और आधार का हिस्सा हैं, हमें उनका निर्वाह करना चाहिए, लेकिन वक़्त और हालात को देखते हुए, उनकी प्रासंगिकता और व्यावहारिकता को देखते हुए. वर्ना हममें इतना भी साहस होना चाहिए कि हम उन पुरानी, अव्...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (2) प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें.उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के...