ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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सोशल मीडिया पर इन दिनों न्यूजीलैंड के संसद की एक फोटो वायरल हो रहीं हैं। जिसमें स्पीकर ट्रेवर मलार्ड काम के साथ-साथ बच्चे को गोद में थामे उसे बोतल से दूध पिला रहे हैं। सांसद Tamari Coffey पितृत्व अवकाश के बाद पहली बार अपने एक महीने के बेटे के साथ संसद पहुंचे थे। Ta...
विजय राजबली माथुर
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Ram Harsh Patel9 mins ·12-04-2019 *मोदी का पूरा रिपोर्ट कार्ड *  :आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि पिछले 5 वर्षों में भारत कैसे बदल गया है, इसमे अगर कुछ भी गलत लगे तो बताएं...अन्यथा इस सच को स्वीकार करें..*1* भारत अब उच्चतम बेरोजगारी दर से पीड़ित है *(NSSO...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
निरंजन  वेलणकर
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१५. यात्रा के अनुभवों पर सिंहावलोकनइस लेख माला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| एचआयवी और स्वास्थ्य इस विषय पर की हुई‌ साईकिल यात्रा मेरे लिए बहुत अनुठी रही| मुझे बहुत कुछ देखने का और सीखने का मौका मिला| यह सिर्फ एक साईकिल टूअर नही रहा, बल्की एक स्टडी...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Jaya Singh10-05-2018संघ-भाजपा द्वारा जारी ‘देशभक्ति’ के शोर के बीच हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि देश क्या है? और देशभक्ति किसे कहते हैं? देश क...
Aparna  Bajpai
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पार्क की बेंच पर बैठकर बातें करते हो मुझसे,अपने स्कूल की कहानियाँ सुनाते हो,मै मुस्कुराता हूँ तुम्हारी खुशी पर,ललचाता हूँतुम्हारे स्कूल की कहानियों में शामिल होने के लिए,तुम्हारी चमकती पोशाक मेरी नीदें चुरा लेती है तुम्हारी भाषा मुझे क...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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गाँव की चौपाल पर अलाव सामयिक चर्चा का फैलाव बिषयों का तीव्र बहाव मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद -दद्दू : *****मुहल्ले से        रमुआ ***** को बुला  लइओ ,        ...
विजय राजबली माथुर
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विजय राजबली माथुर
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आजकल विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं, फेसबुक, ब्लाग वगैरह पर कुछ महिला और कुछ पुरुष लेखकों द्वारा भी समाज के पितृ  सत्तात्मक होने व महिलाओं के दोयम दर्जे की बातें बहुतायत से देखने - पढ़ने को मिल जाती हैं। लेकिन ऐसा हुआ क्यों ? और कैसे ? इस पर कोई चर्चा नहीं मिलती है। अ...