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sanjiv verma salil
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समीक्षायह ‘काल है संक्रांति का’- राजेंद्र वर्मागद्य-पद्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर सृजनरत और हिंदी भाषा के व्याकरण तथा पिंगल के अधिकारी विद्वान आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ने खड़ी हिंदी के समांतर बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, अवधी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, निमाड़ी, राजस्थानी, हर...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा:मुक्त उड़ान: कुमार गौरव अजितेंदु के हाइकु और सम्भावनाओं की आहटआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[पुस्तक विवरण: मुक्त उड़ान, हाइकु संग्रह, कुमार गौरव अजितेंदु, आईएसबीएन ९७८-८१-९२५९४६-८-२ प्रथम संस्करण २०१४, पृष्ठ १०८, मूल्य १००रु., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक, शुक्तिका प...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
usha kiran
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दुखां दी कटोरी: सुखां दा छल्ला’~~~~~~~~~~~~~~~~~~~कभी-किसी की एक रचना ऐसी आती है कि मन करता है उसका लिखा अगला-पिछला सब कुछ एक साँस में पढ़ जाएं।रूपा पहली बात तो ये कि आपको ख़ूब लिखना चाहिए हम और पढ़ना चाहते ऐसी सुंदर जादू रचने वाली ,सम्मोहित करने वाली कहानियाँ ।रुप...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
उन्मुक्त हिन्दी
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इस चिट्ठी में, गिलियन थॉमस (Gillian Thomas) की लिखी पुस्तक 'बिकॉस ऑफ सेक्स' (Because of Sex) की समीक्षा है। अमेरिका में, अफ्रीकन अमेरिकन (अश्वेत) लोगों के साथ हमेशा भेदभाव रहा। इसी पर प्रसिद्ध उपन्यास ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ लिखा गया। यह पुस्तक एक वास्तविक घटना तथा...
usha kiran
490
REPLY                       पूरी किताब लिखकर छपवाने के बाद पुस्तक की लेखिका शिखा वार्ष्णेय जब बेहद, मासूमियत से हमसे पूछतीं हैं कि मेरी किताब ‘देशी चश्मे से लंदन डायरी’ किस विधा के अन्तर्गत आएगी तो उनकी सा...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
मुकेश कुमार
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"लाल फ्राक वाली लड़की" ( पुस्तक)लेखक- मुकेश कुमार सिन्हाहां ! यही नाम है प्रेम के हर उस एहसास का जिसे कहीं न कहीं अपने उम्र के दौर में कुछ पल के लिए ही सही पर जीते हम सभी हैंजी हाँ ! कुछ ऐसी ही है लाल "फ्राक वाली लड़की" नादान मन की भोली ख्वाइश कच्चे पक्के जज्बातों की...
 पोस्ट लेवल : समीक्षा lfwl बबली लप्रेक