ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : समीक्षा
Bharat Tiwari
27
देह व्यापार हो या बलात्कार, हम हायतौबा भी अपनी सहूलियत और अपने एजेंडा के हिसाब से मचाते हैं। मेरे शहर में कोई बलात्कार हुआ तो मैं दुःखी हो जाऊंगी आपके शहर में कोई हुआ तो आप। इस सत्य को जानते हुए अनदेखी कर जाते हैं कि भारत में हर रोज़ बलात्कार हो रहे हैं। — अंकि...
Bharat Tiwari
27
नरम घास, चिड़िया और नींद में मछलियां— उमा शंकर चौधरीकहानीकार को 'नरम घास, चिड़िया और नींद में मछलियां' कहानी कह पाने की बधाई से अधिक शुक्रिया देना चाहिए, जिसमें कहानीकार साहित्यकार बन जाता है और साहित्य का धर्म ‘सच बताना और सच बचाना’ निभाता है. हम सब अपनी जड़ को भूल न...
usha kiran
547
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : समीक्षा
वंदना अवस्थी दुबे
361
पिछले एक साल में बहुत सारी पुस्तकें इकट्ठा हो गयीं, पढ़ने के लिये, और फिर लिखने के लिये. न बहुत पढ़ पाई, सो लिख भी नहीं पाई. अब एक-एक करके पढ़-लिख रही हूं. रश्मि का कहानी-संग्रह, ’बन्द दरवाज़ों का शहर’ प्रकाशित होते ही ऑर्डर कर दिया था. कुछ कहानियां पढ़ भी ली थीं, लेकिन...
विजय राजबली माथुर
76
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )http://epaper.navbharattimes.com/details/57321-77518-2.htmlघर जैसा ही लगा लखनऊ : समीक्षाटीवी की ऑडियंस फिल्मों से अलग है : जब मेरे करियर की शुरुआत...