ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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‘रेड हाट’ से सौरभ शुक्ला रंगमंच पर वापस लौटे हैं और क्या खुब लौटे हैं. इस मंचन में जहां उनका सहज अभिनय आह्लादित करता है वहीं उनके  निर्देशन की बारीकी प्रभावित करती है. नील साईमन के इस नाटक का रूपांतरण उन्होंने स्वयं किया है और वह भी दिल्ली की पृष्ठभूमि में. इस...
sangeeta swarup
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शिखा वार्ष्णेय ब्लॉग जगत का जाना माना नाम है पत्रकारिता में उन्होंने तालीम हासिल की है  और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में वो लेखन कार्य से जुडी हुई हैं .. आज उनकी पुस्तक “ स्मृतियों में रूस “ पढ़ने का सुअवसर मिला .. यह पुस्तक उनके अपने उन अनुभ...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक समीक्षा
अमितेश कुमार
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यथार्थ को आप कैसे पकडेंगे. आप कह सकते हैं कि यथार्थ को पकड़ना क्या है  जो हमारे सामने है यथार्थ है. लेकिन क्या यथार्थ इतना ही है. दर्शनशास्त्र तो हमेशा से ही कहता है कि नहीं यह बस उसका आभास है. तालाब के जल की तरह है जिसकी तलहटी में क्या है ये देखना मुश्किल है....
anup sethi
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कुछ समय पहले अमृतसर में पंजाब नाटशाला देखने का मौका मिला.  उत्‍तर भारत में शिमला में गेयटी थियेटर और चंडीगढ़ में टेगोर थियेटर के अलावा और कोई नाम ध्‍यान में नहीं आता है. अमृतसर की पंजाब नाटशाला  अपनी तरह का नवीन नाट्यगृह है. खासियत यह है कि यह ए...
ललित शर्मा
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अमितेश कुमार
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एक शहर है जिसे एक नदी, जो नाले में तब्दील हो चुकी है, दो हिस्सों में बांटती है. शहर के एक तरफ़ मठ और युनिवर्सिटी है दूसरी तरफ़ ‘गंदी बस्ती’. मठ भी इस शहर मे पुराना नहीं है, एक दिन वह अचानक उग आता है, इतिहास की झाड़ियों को काटते हुए और फिर यह मठ शहर के आम जीवन में त...
अमितेश कुमार
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पुरुष प्रधान समाजों में सदियों से स्त्रियों का दमन और शोषण होता रहा है। समाज में उनकी भूमिका और उनकी सामाजिक हैसियत का निर्धारण पुरुष के द्वारा हुआ है। समाज के हाथों जो दर्जा स्त्री को दिया जाता है वह किसी हद तक उसकी मानसिक बनावट का नियामक होता है। औपनिवेशिक मानसिक...
उन्मुक्त हिन्दी
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वामन, राजा बलि से याचना करते हुऐ चित्र विकिपीडिया से। इस चिट्ठी में चर्चा है कि हमें क्यों मुक्त सॉफ्टवेयर और मुक्त मानक का प्रयोग करना चाहिये। आज सितंबर माह का तीसरा शनिवार है। यह दिन मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस (Freedom software Day) के रूप में मनाया जाता है। इसलिये यह...
Abhishek Kumar
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इस फिल्म को रिलीज हुए लगभग २० दिन से ज्यादा हो गए हैं और अब तक ये भी साफ़ हो चूका है की रेडी के बाद इस साल की ये दूसरी सबसे बड़ी सफल फिल्म है..लेकिन मैंने अभी तीन दिन पहले ही ये फिल्म देखा..और फिल्म देखने के बाद बिना इसके बारे में लिखे रह नहीं सका, लिखा था दो दिन प...
अमितेश कुमार
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मुन्ना कुमार पांडे'बहादुर कलारिन' मूलतः छत्तीसगढ़ी लोक कथा का हबीब तनवीर द्वारा नाट्य रूपांतरण है |  नया थियेटर की मशहूर और भारतीय रंगजगत की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार 'फ़िदा बाई' के गुजर जाने के बाद हबीब तनवीर ने इस नाटक को करना बंद&nb...