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sanjiv verma salil
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उपन्यास समीक्षा : धूनी : मुक्ति की प्रत्याशा में आत्मा की छटपटाहट संजय यादव [धूनी, उपन्यास, प्रथम संस्करण २००६, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., आवरण बहुरंगी सजिल्द, जैकेट सहित, पृष्ठ १६०/-, मूल्य १६०/-, पाथेय प्रकाशन जबलपुर]*आत्मा की छटपटाहट वस्तुत: मुक्ति की प्रत्याशा...
sanjiv verma salil
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उपन्यास समीक्षा जीवन के झंझावातों से जूझता "अधूरा मन "[अधूरा मन, उपन्यास।, प्रथम संस्करण २००७, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., आवरण बहुरंगी, सजिल्द जैकेट सहित, पृष्ठ १७९, मूल्य १५०/-, तिवारी ग्राफिक्स एन्ड पब्लिकेशंस भोपाल]हिंदी साहित्य की समकालिक सारस्वत कार...
sanjiv verma salil
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उपन्यास समीक्षा : दूसरा कैनवास जीवन में भूमिकाएं बदलने से बदलता है कैनवाससुरेंद्र सिंह पवार[दूसरा केनवास, उपन्यास, प्रथम संस्करण २०१०, पृष्ठ ९६, सजिल्द, बहुरंगी जैकेट सहित, मूल्य-२००रु।, पाथेय प्रकाशन, जबलपुर]*‘दूसरा केनवास’ कवियित्री एवं कथा लेखिका डॉ राजलक्ष्मी श...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा आलेख
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
usha kiran
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लेखनी और तूलिका का मिलन...उषा किरण============================"कहते हैं एक चित्र हजार शब्दों की ताक़त रखता है। ऐसे में अगर चित्रों को दमदार शब्दों का भी साथ मिल जाए, तो फिर इस रचनात्मक संगम से निकली कृति सोने पर सुहागा ही है।" ये शब्द हैं प्रख्यात गायक कुमार विश्वा...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
Bharat Tiwari
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मार्क्सवाद का अर्धसत्य के बहाने एकालाप— पंकज शर्माअनंत ने पूरी दुनियाभर के जनसंघर्षों को एक नया आयाम प्रदान करने वाले महानायक के निजी जीवन संदर्भों के हवाले से उन्हें खलनायक घोषित कर दिया और भारतीय सामाजिक परंपरा के परिप्रेक्ष्य में उनका मूल्यांकन करने के फिराक में...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
Bharat Tiwari
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दुःख या सुख कई जगहों से आता रहता है और जाता भी रहता है - शर्मिला बोहरा जालानसमीक्षा: जयशंकर की प्रतिनिधि कहानियांदुःख या सुख कई जगहों से आता रहता है और जाता भी रहता है। यह सब कुछ बहुस्तरीय चेतना से होता है जिन्हें मैं इन कहानियों में हर बार नए ढंग से पढ़ और समझ पाती...