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rahul dev
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संदर्भ : जाबिर हुसेन की किताब ‘आईना किस काम का’- शहंशाह आलमयह अभिसंधि का समय है।यह अभिसंधि यानी यह कुचक्र, षड्यंत्र, धोखा, मिलीभगत किससे? यह प्रश्न अनुसंधान चाहता है। यह अनुसंधान एक कवि ही कर सकता है। कवि का काम यही तो है, पहले अपने आसपास के समय की छानबीन करन...
 पोस्ट लेवल : समीक्षा शहंशाह आलम
दयानन्द पाण्डेय
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
shashi purwar
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-- मुहावरों का मुक्तांगन एक अरण्य काल(एक अध्ययन)मुहावरे और नवगीत का उदगम स्थल  एक ही है - वह है जन चेतना।  नवगीत में जनचेतना का जो पैनापन है उसे मुहावरों के द्वारा ही सघनता से व्यक्त किया जा सकता है।आदरणीय निर्मल शुक्ल जी का संग्रह एक और अरण्य काल, लगभग स...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक समीक्षा
उन्मुक्त हिन्दी
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इस चिट्ठी में, 'स्टीव जॉब्स द लाइफ लेसनस् एंड रूल्स फॉर सक्सेस' नामक पुस्तक की समीक्षा है।'स्टीव जॉब्स द लाइफ लेसनस एंड रूल्स फॉर लेसन्स्'  रोचक पुस्तक है। इस पुस्तक से, यह नहीं पता कि इसे किसने लिखा है या किसके द्वारा इसे प्रकाशित की गयी है पर सका कॉपीराइट 'I...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
shashi purwar
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हिंदी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार राजकुमार जैन राजन से मेरा व्यक्तिगत परिचय नही हैं.   उनकी किताब पेड लगाअो से उन्हें जानने का मौका मिला. उनकी बाल रचनाअों व उनके काव्य की अभिव्यक्ति ने एक ही बार मे किताब पढने के लिए आग्रहित किया. अपनी बात कहने में कवि सक्षम ह...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक समीक्षा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा
वंदना अवस्थी दुबे
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”उत्सवी रंग में रंगा लंदन, इन दिनों पूरी तरह से एशियाई त्यौहारमयी हो जाता है. अपनी-अपनी पहचान और संस्कृति को बचाए रखने के पक्षधर लंदनवासी भारतीयों की श्रद्धा चरम पर नज़र आती है. रस्मो-रिवाज़ को पर्म्परागत तरीक़े से निभाने की इच्छा सर्वोपरि दिखाई देती है. परन्तु, इस सब...
sanjiv verma salil
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समीक्षा- आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ के गीत- नवगीत संग्रह ‘काल है संक्रांति का’तथा‘सड़क पर’ -ं डाॅ. रमेश चंद्र खरे, दमोह*व्यक्ति की दबी प्रकृति और रुचि प्राप्त आजीविका में भी अंततःअपना मार्ग खोज ही लेती है। सिविल इंजीनियर संजीव वर्मा भी ‘लोकनिर्माण’ के व्यस्त जीवन मे...