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sanjiv verma salil
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पुस्तक समीक्षा-संक्रांति-काल की सार्थक रचनाशीलता कवि चंद्रसेन विराट* आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' वह चमकदार हस्ताक्षर हैं जो साहित्य की कविता विधा में तो चर्चित हैं ही किन्तु उससे कहीं अधिक वह सोशल मीडिया के फेसबुक आदि माध्यमों पर बहुचर्चित, बहुपठित और बहुप्...
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 समीक्षायह ‘काल है संक्रांति का’- राजेंद्र वर्मा गद्य-पद्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर सृजनरत और हिंदी भाषा के व्याकरण तथा पिंगल के अधिकारी विद्वान आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ने खड़ी हिंदी के समांतर बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, अवधी, छत्तीसगढ़ी,...
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पुस्तक चर्चा-संक्रांतिकाल की साक्षी कवितायेंआचार्य भगवत दुबे *[पुस्तक विवरण- काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण २०१६, आकार २२ से.मी. x १३.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक जैकेट सहित, पृष्ठ १२८, मूल्य जन संस्करण २००/-, पुस...
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पुस्तक समीक्षा- काल है संक्राति का- सुरेन्द्र सिंह पॅवार[कृति- काल है संक्राति का, ISBN 817761000-7, गीत-नवगीत संग्रह, कृतिकार- आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल, प्रकाशक- समन्वय प्रकाशन, 204 अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर 482001, मूल्य - 200/-]*‘काल है संक्रांति का’...
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 समीक्षाकृति विवेचन- संजीव वर्मा ‘सलिल’ की काव्य रचना और सामाजिक विमर्श - डॉ. सुरेश कुमार वर्मा * हिंदी जगत् मे साहित्यकार के रूप में संजीव 'सलिल' की पहचान बन चुकी है। यह उनके बहुआयामी स्तरीय लेखन के कारण संभव...
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समीक्षापुस्तक चर्चा-स्तुत्य, सम्यक, सरस,सुगन्धित पुष्प वल्लरी है ‘काल है संक्रांति का’राजेश कुमारी ‘राज‘*हमारे वेद शास्त्रों में कहा गया है “छन्दः पादौ वेदस्य” अर्थात छंद वेद के पाँव हैं | यदि गद्य की कसौटी व्याकरण है तो कविताओं की कसौटी छंद है| कवि के मन के भाव यद...
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समालोचना-काल है संक्रांति का पठनीय नवगीत-गीत संग्रह अमर नाथ[पुस्तक विवरण- काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण २०१६, आकार २२ से.मी. x १३.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक जैकेट सहित, पृष्ठ १२८, मूल्य जन संस्करण २००/-, प...
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पुस्तक सलिला "रिश्ते बने रहें" पाठक से नवगीत के आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[पुस्तक विवरण- रिश्ते बने रहें, गीत-नवगीत, योगेंद्र वर्मा 'व्योम', वर्ष २०१६ ISBN ९७८-९३-८०७५३-३१-७, आवरण सजिल्द बहुरंगी जैकेट सहित, आकार डिमाई, पृष्ठ १०४, मूल्य २००/-, गुंजन प्रकाश...
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पुस्तक सलिला –‘मैं सागर में एक बूँद सही’ प्रकृति से जुड़ी कविताएँ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’*[पुस्तक विवरण – मैं सागर में एक बूँद सही, बीनू भटनागर, काव्य संग्रह, प्रथम संस्करण २०१६, ISBN९७८-८१-७४०८-९२५-०, आकार २२ से.मी. x १४.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, सजिल्द, पृष्ठ...
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साहित्य समीक्षा_दोहा-दोहा नर्मदासुरेन्द्र सिंह पंवारसम्पादक- “साहित्य-संस्कार”[कृति- दोहा-दोहा नर्मदा/ संपादक-आचार्य संजीव ‘सलिल’- प्रो.(डा) साधना वर्मा/ प्रकाशक- विश्व वाणी हिंदी संस्थान,समन्वय प्रकाशन अभियान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन,जबलपुर ४८२००१, पृष्ठ...