ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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प्रेम की सर्वश्रेष्ठ निशानी        क्लास में जब टीचर ने पूछा कि  दुनिया में प्रेम की निशानी किस जगह को कहा जाता है ?  तब पूरी क्लास एक आवाज़ में बोली- "ताजमहल" !        लेकिन उन्हीं में से एक छात्र ने जवाब दिया...
मुकेश कुमार
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मान लो 'आग'टाटा नमक केआयोडाइज्ड पैक्ड थैली की तरहखुले आम बिकती बाजार मेंमान लो 'दर्द'वैक्सड माचिस के डिब्बी की तरहपनवाड़ी के दूकान पर मिलतीअठन्नी में एक !मान लो 'खुशियाँ' मिलतीसमुद्री लहरों के साथ मुफ्त मेंकंडीशन एप्लाय के साथ किहर उछलते ज्वार के साथ आतीतो लौट भी जा...
निरंजन  वेलणकर
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भाग ७: कोस्टल रोड़ से कुणकेश्वर भ्रमण इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|१२ सितम्बर का दिन साईकिल चलाए बिना समाप्त हो गया| मेरी पत्नि और बेटी को लाने के लिए मुझे जाना पड़ा| इससे साईकिल यात्रा का और एक दिन कम हुआ| अब शायद सिर्फ एक ही दिन साईकिल चला...
Pratibha Kushwaha
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‘समुद्र से यदि टकराना है, तो तुमयह भूल जाओं कि तुम कौन हो। समुद्र यह नहीं देखता कि तुम महिला हो या पुरुष।’ अपने प्रशिक्षक दिलीप डोंडे की इसबात को मूलमंत्र बनाकर समुद्र की अथाह गहराइयों में जब महिला नेवी की जांबाज अधिकारी उतरी होंगी, तो उनकेमन में इस महत्वपूर्ण यात्...
मुकेश कुमार
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प्यार के अद्भुत बहते आकाश तलेजहाँ कहीं काले मेघ तो कहींविस्मृत करते झक्क दूधिया बादल तैर रहे,मिलते हैं स्त्री-पुरुषप्रेम का परचम फहरानेसलवटों की फसल काटने !नहीं बहती हवाएं, उनके मध्यशायद इस निर्वात की स्थापना ही,कहलाता है प्रेम !याद रखने वाला तथ्य है किअधरों के सम्...
kumarendra singh sengar
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पोर्ट ब्लेयर में दो दिन की घूमा-फिरी के बाद समुद्र किनारे सजे-सजाये खड़े तीन जहाजों के अद्भुत दृश्य को आत्मसात करते हुए देर रात तक बिटिया रानी के जन्मदिन की पार्टी और फिर सुबह-सुबह हैवलॉक द्वीप को चल देना. अंडमान-निकोबार में जल्दी सूर्योदय होने के कारण सुबह छह बजने...
sangeeta swarup
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सागर के किनारेगीली रेत पर बैठअक्सर मैंने सोचा हैकि-शांत समुद्र की लहरेंउच्छ्वास लेती हुईआती हैं और जाती हैं ।कभी - कभी उन्माद मेंमेरा तन - मन भिगो जाती हैं|पर जब उठता है उद्वेगतब ज्वार - भाटे का रूप लेचक्रव्यूह सा रचा जाती हैंफिर लहरों का चक्रव्यूहतूफ़ान लिए आता हैश...
ललित शर्मा
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ललित शर्मा
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Neeraj Jaat
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इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें।शाम साढे पांच बजे हम तीनों माण्डवी पहुंच गये। सुमित और गिरधर पहले ही काफी लेट हो चुके हैं, इसलिये उन्हें इन्दौर के लिये आज ही निकलना पडेगा जबकि मेरा इरादा आज यहीं माण्डवी में रुकने का है। कुछ देर बाद सूर्...