ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आज की पोस्ट रिश्तों पर लिखने की सोच रहे थे मगर लगा कि रिश्तों की परिभाषा है क्या? जो हम आपसी संबंधों के द्वारा निश्चित कर देते हैं, क्या वही रिश्ते कहलाते हैं? क्या रिश्तों के लिए आपस में किसी तरह का सम्बन्ध होना आवश्यक है? दो व्यक्तियों के बीच की दोस्ती को क्या कह...
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गीत "साल पुराना बीत रहा है" साल पुराना बीत रहा है, कल की बातें छोड़ो।फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।--आओ दृढ़ संकल्प करें, गंगा को पावन करना है, हिन्दी की बिन्दी को, माता के माथे पर धरना है, जिनसे होता अहित देश का, उन अनुबन्धों को तोड़...
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--सम्बन्धों को जी नहीं, पाते हैं जो लोग।अपनेपन का वो यहाँ, झेलें सदा वियोग।।--सम्बन्धों की नाव की, नाजुक है पतवार।इसे प्यार से थामकर, करना सागर पार।।--सम्बन्धों की डोर को, अधिक न देना ढील।मत देना परिवार में, झूठी कभी दलील।।--कर्म असीमित है यहाँ,...
PRAVEEN GUPTA
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साभार: Agrawal Samaj Shivpur Seonimalwa फेसबुक वाल से 
kumarendra singh sengar
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वर्षों पुराने दो परिचित. सामाजिक ताने-बाने के चक्कर में, शिक्षा-कैरियर के कारण चकरघिन्नी बन दोनों कई वर्षों तक परिचित होने के बाद भी अपरिचित से रहे. समय, स्थान की अपनी सीमाओं के चलते अनजान बने रहे. तकनीकी विकास ने सभी दूरियों को पाट दिया तो उन दोनों के बीच की दूरिय...
kumarendra singh sengar
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आज कुछ लिखने का मन नहीं हो रहा था किन्तु कल से ही दिमाग में, दिल में ऐसी उथल-पुथल मची हुई थी, जिसका निदान सिर्फ लिखने से ही हो सकता है. असल में अब डायरी लिखना बहुत लम्बे समय से बंद कर दिया है. बचपन में बाबा जी द्वारा ये आदत डाली गई थी, जो समय के साथ परिपक्व होती रह...
kumarendra singh sengar
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अक्सर मन में सवाल उठा करते हैं कि व्यक्ति आपस में सम्बन्ध क्यों बनाता है? आपस में दोस्ती जैसी स्थितियों की सम्भावना वह क्यों तलाशता है? क्यों दो विपरीतलिंगी आपस में प्रेम करने लग जाते हैं? क्या ऐसा होना प्राकृतिक है? क्या ऐसा मानवीय स्वभाव की आवश्यकता के चलते किया...
kumarendra singh sengar
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कुछ पुराने मित्रों को याद किया और कुछ नए मित्रों की सुध ली. इस बार का दशहरा, दीपावली कुछ खाली-खाली सी नजर आई. इसके पार्श्व में कतिपय घटनाक्रमों का भी होना रहा मगर उससे ज्यादा लोगों का अब सोशल मीडिया के द्वारा त्योहारों को मना लेना भी रहा. हमारे परिवार सहित कुछ मित्...
kumarendra singh sengar
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तकनीकी रूप से कई बार आभास होता है कि हम बहुतों से बहुत पीछे हैं, बहुत पिछड़े हैं. हमारे साथ के ही बहुत से लोग हमसे कई सालों पहले से कंप्यूटर का उपयोग करने लगे थे. हमने पहली बार कंप्यूटर का आंशिक उपयोग शायद 1999 में करना शुरू किया था. हालाँकि देखने और छूने को तो सन 1...
kumarendra singh sengar
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जीवन में समस्याएँ बचपन से ही देखी हैं, सही हैं. उनका समाधान भी किया है. आज तक समस्यायों से, परेशानियों से, कष्टों से किसी न किसी रूप में घिरे रहते हैं. कभी हमारे खुद के, कभी परिजनों के, कभी दूसरों के. पता नहीं किस तरह का नैसर्गिक स्वभाव मिला हुआ है कि किसी की समस्य...