ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
अविनाश वाचस्पति
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बहुत कोशिश कीबहुत खाई डांटपर नहीं सुधरी लिखावटसोलह दूनी आठ।पर अब होंगे ठाठनीचे इमेज को बांचलिखना हो हिंदी में या लिखें अंग्रेजी में शब्‍दों के मोती बनायें । जो लिखते हैं कंप्‍यूटर पर  निरंतर उनको नहीं पड़ता अंतर पर अच्‍छा है यह जंतर लिखावट की जिंदगी आह से...