ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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सलिल की लघुकथाएंलघुकथाटुकड़े स्पात के*धाँय धाँय धाँयभारी गोलाबारी ने काली रात को और अधिक भयावह बना दिया था किन्तु वे रेगिस्तान की रेत के बगुलों से भरी अंधी में भी अविचलित दुश्मन की गोलियों का जवाब दे रहे थे। अन्तिम पहर में दहशत फैलाती भरी आवाज़ सुनकर एक ने झरोखे से झ...
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sanjiv verma salil
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सलिल की लघुकथाएँकाँच का प्याला*हमेशा सुरापान से रोकने के लिए तत्पर पत्नी को बोतल और प्याले के साथ बैठा देखकर वह चौंका। पत्नी ने दूसरा प्याला दिखाते हुए कहा 'आओ, तुम भी एक पैग ले लो।'वह कुछ कहने को हुआ कि कमरे से बेटी की आवाज़ आयी 'माँ! मेरे और भाभी के लिए भी बन...
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अनीता सैनी
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 रेत के मरुस्थल-सा,  हृदय पर होता विस्तार, खो जाती है  जिसमें, स्नेह की कृश-धार, दरक जाती है,  इंसानियत, बंजर होते हैं,  चित्त के भाव, जज़्बात  में नमी, एहसास में होती, अपनेपन की कमी,&nb...
शिवम् मिश्रा
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सायद एही साल का बात है या लास्ट ईयर का. समय पुस्तक मेला का था, इसलिये साल चाहे जो भी हो, हम तब तक दिल्ली से निकाले नहीं गये थे. पुस्तक मेला का तमाम गहमा-गहमी के बीच मेला घूमना अऊर बहुत सा किताब खरीदना त होबे किया, एगो अलग अनुभब ई हुआ कि ब्लॉग के पुराना समय के दोस्त...
sanjiv verma salil
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समीक्षा-"काल है संक्रांति का" आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' की अनुपम नवगीत कृति - इंजी. संतोष कुमार माथुर, लखनऊ *एक कुशल अभियंता, मूर्धन्य साहित्यकार, निष्णात संपादक, प्रसिद्ध समीक्षक, कुशल छंदशास्त्री, समर्पित समाजसेवी पर्यावरणप्रेमी, वास्तुविद अर्थात बहुमुख...
sanjiv verma salil
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हाइकु सलिला *ध्यान में ध्यान ध्यान पर न ध्यान तभी हो ध्यान। *मुक्ति की चाहरोकती है हमेशामुक्ति की राह।*खुद से ऊबकैसे पायेगा राह?खुद में डूब।*१३-७-२०१७salil.sanjiv@gmail.com#हिंदी_ब्लॉगिंगhttp://divyanarmada.blogspot.in/
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sanjiv verma salil
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हाइकु सलिला *कल आएगा? सोचना गलत हैजो करो आज। *लिखो हाइकुकागज़-कलम लेहर पल ही।*जिया में जियाहर पल हाइकुजिया ने रचा।*चाह कलममन का कागज़भाव हाइकु।*शब्द अनंतपढ़ो-सुनो, बटोरोमित्र बनाओ।*शब्द संपदाअनमोल मोती हैंसदा सहेजो।*श्वास नदियाआस नद-प्रवाहप्रयास नौका।**...
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sanjiv verma salil
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दोहा सलिलादोहा मन की बात*बात-बात में कर रहा, दोहा मन की बात।पर न बात बेबात कर, करे कभी आघात।।*बात निकलती बात से, बात-बात में जोड़।दोहा गप्प न मारता, लेकर नाहक होड़।।*बिना बात की बात कर, संसद में हुड़दंग।भत्ते लेकर मचाते, सांसद जनता तंग।।*बात काटते बात से, नेता पंडि...
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sanjiv verma salil
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दोहा सलिला*पाठक मैं आनंद का, गले मिले आनंद बाहों में आनंद हो, श्वास-श्वास मकरंद*आनंदित आनंद हो, बाँटे नित आनंदहाथ पसारे है 'सलिल', सुख दो आनंदकंद!*जब गुड्डो दादी बने, अनुशासन भरपूरजब दादी गुड्डो बने, हो मस्ती में चूर*जिया लगा जीवन जिया, रजिया है हर श्वासभजिया-...
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sanjiv verma salil
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दोहा:तुलसी सदा समीप हो, नागफनी हो दूर इससे मंगल कष्ट दे, वह सबको भरपूर ***दोहा सलिला:* गुरु न किसी को मानिये, अगर नहीं स्वीकार आधे मन से गुरु बना, पछताएँ मत यार *गुरु पर श्रद्धा-भक्ति बिन, नहीं मिलेगा ज्ञाननिष्ठा रखे अखंड जो, वही शिष्य मतिम...
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