ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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सायद एही साल का बात है या लास्ट ईयर का. समय पुस्तक मेला का था, इसलिये साल चाहे जो भी हो, हम तब तक दिल्ली से निकाले नहीं गये थे. पुस्तक मेला का तमाम गहमा-गहमी के बीच मेला घूमना अऊर बहुत सा किताब खरीदना त होबे किया, एगो अलग अनुभब ई हुआ कि ब्लॉग के पुराना समय के दोस्त...
शिवम् मिश्रा
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जब आदमी साइंस पढ़ता है त अपने आप को एतना बुद्धिमान समझने लगता है कि उसको बुझाता है जइसे दुनिया का सब सवाल का जवाब उसके पास है. लेकिन ऊ भुला जाता है कि पेड़ के ऊपर चढ़ा हुआ आदमी को दूर से आता हुआ रेलगाड़ी देखाई देता है, मगर पेड़ के नीचे खड़ा आदमी नहीं देख पाता है. इस...
सलिल  वर्मा
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असली मजा सब के साथ आता है – ई बात भले सोनी-सब टीवी का टैगलाइन है, बाकी बात एकदम सच है. परब-त्यौहार, दुख तकलीफ, सादी-बिआह, छट्ठी-मुँड़ना ई सब सामाजिक अबसर होता है, जब सबलोग एक जगह एकट्ठा होता है. घर-परिबार, हित-नाता, भाई-भतीजा, नैहर-ससुराल... जब सब लोग मिलता है, मिलक...
शिवम् मिश्रा
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साल का सुरुआत अभी होबे किया है त आज हमको भी बहुत सा पुराना-नया बात याद आ रहा है. ऊ ब्लॉग का स्वर्न काल थाजब नया नया दाखिल हुये थे. बहुत सा लोग तबतक स्थापित हो चुका था अऊर जिनका लेखन हमको बहुत परभावित करता था. सच पूछिये त जेतना सिर्सस्थ लोग आज भी देखाई देता है उनमें...
शिवम् मिश्रा
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पाओलो कोएल्हो कह गये हैं कि अगर आप किसी को बहुत सिद्दत से चाहते हैं त सारा कायनात उसको आपको मिलाने का साजिस में जुट जाता है. एही बतवा साहरुख खान भी एगो सिनेमा में बोल गये. मगर ई सब एतना आसान भी नहीं होता है. आज से 18 साल पहले हम जिनके फैन हैं और जिनको हम अपना गुरु...
शिवम् मिश्रा
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कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है...  आप जो समझ रहे हैं ऊ बात नहीं आता है... असल में बात ओही है, लेकिन कोनो बात को सीधा-सीधी कह दिये त आपको कइसे लगेगा कि ई हम कह रहे हैं. काहे कि हमरा सुरुए से ई आदत रहा है कि कान कहियो सीधा तरफ से नहीं धरते हैं. बिना घुमाकर का...
शिवम् मिश्रा
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हमलोग के जिन्नगी में केतना तरह का लोग हमरे साथ होता है... कोनो बहुत अच्छा दोस्त अऊर कोनो के साथ एकदम नहीं मन मिलता है. लेकिन हमलोग के सोचने का तरीका हमेसा एक्के होता है – अपना आप को केंद्र मानकर. तनी बिस्तार से बताते हैं. अब कोई अदमी हमरा बहुत करीबी दोस्त है, त हम...
शिवम् मिश्रा
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एक बच्चा स्कूल की परीक्षा में केवल एक नम्बर से फ़ेल हो गया. उसके लिये फ़ेल होने का अर्थ केवल इतना नहीं था कि उसे पूरे साल उसी कक्षा में पढाई करनी होगी, बल्कि ये था कि निर्धन परिवार को उसके पूरे वर्ष की फ़ीस दुबारा भरनी होगी.  एक निर्धन परिवार के लिये यह किसी बोझ...
शिवम् मिश्रा
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बात बहुत पुराना है, लेकिन एतना पुराना भी नहीं कि दादी-नानी के कहानी जइसा है. ऊ ब्लॉगिंग के स्वर्न काल का बात है माने सन 2011 के आस-पास का. हम दुन्नो दोस्त माने हम अऊर चैतन्य आलोक जी का फेवरिट चैनेल होता था सब-टीवी. एही नहीं, एक बार मनोज कुमार जी के साथ भी बात बात क...
शिवम् मिश्रा
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बचपने से सोचते थे कि बिहार के पूरब में पश्चिम बंगाल है, त आखिर पूर्वी बंगाल कहाँ है? पता चला पूर्वी बंगाल कहीं नहीं है, जो था आजकल पूर्वी पाकिस्तान कहलाता है. त बेकारे न बंगाल को पश्चिम बंगाल कहते हैं अऊर 1971 में पूर्वी पाकिस्तान बन गया बांगला देस. तबो पश्चिम बंगा...