--जिन्दगी के गीत गाता जा रहा हूँसाँस की सरगम सुनाता जा रहा हूँ--पाँव बोझिल हैं थकी है पीठ भीबोझ जीवन का उठाता जा रहा हूँ--मिल गया जो भी नजराना मुझे शान से उसको लुटाता जा रहा हूँ--उम्र अब कितनी बची है क्या पताघोंसला फिर भी बनाता जा रहा हूँ--कुछ पुराने साज दामन...