ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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कभी लगता है, एक दिन ऐसा भी होगा जब यहाँ लिखा हुआ एक-एक शब्द कभी किसी के समझ में नहीं आएगा। जैसे मुझे अभी से नहीं आ रहा। यहाँ की लगती गयी तस्वीरें इन सालों में जितनी ठोस, मूर्त, स्पष्ट हुई हैं, उसी अनुपात में सत्य उतना ही धुँधला, अधूरा, खुरदरा होकर मेरे भीतर घूम रहा...
Shachinder Arya
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पाँच सितंबर, हर साल, शासकीय परंपरा में इसे ‘शिक्षक दिवस’  के रूप में मनाने की कवायद राष्ट्रीय स्तर पर देखी जा सकती है। इस साल तो यह अति राष्ट्रव्यापी  है। बहरहाल। यह दिन क्यों निश्चित किया गया, अपने आप में पूछे जाने लायक सवाल है। कई प्रबुद्धजन अपनी भूमिका...
Shachinder Arya
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उसने नहीं पूछा था तुमसे तुम्हारा नामतुमने ख़ुद ही बताया-प्रतिमा गोखले !फ़िर अपने से ही कहाचित्तपावन ब्राह्मण,महाराष्ट्रीयन,हिन्दू,भारतीय।और यह भी कि इसमें छिपे हैंइतिहास, भुगोल, समाज, भाषा, राष्ट्रपता है तुम्हें, किससे बात कर रही थी?एक राशन कार्ड की अर्ज़ी देने आए युव...
Shachinder Arya
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हमारे घर में मिट्टी का घड़ा इसलिए नहीं है के हम अतीतजीवी हैं और हमने घर में जगह न होने को बहाने की तरह ओढ़ लिया है। यह विशुद्ध हमारे चयन और इच्छा का निजी मामला है। इसमे किसी भी तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे। फ़िर ऐसा भी नहीं है कि हम जहाँ भी जाते हैं घड़े का...