ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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पहला दिन : बंदी से पहले और बंदी वाले पहले दिन लोगों ने दुकानों पर                         मेला लगायादूसरा दिन : दूसरा दिन ,पुलिस ने उठक बैठक करवाते मुर्गा बनाते ,लाठी         ...
अजय  कुमार झा
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पिछले एक सप्ताह के एकांतवास में ,छत पर अपनी बगिया में सत्तर अस्सी पौधे लगा चुका हूँ | फूल पत्तों के अलावा फिलहाल तोरी ,भिंडी ,घीया ,पालक ,धनिया ,नीम्बू मिर्च सब उगाई लगाई जा रही है | दिन का  अधिक समय छत पर बनी इस बगिया नुमा आँगन में ही बीत रहा है | सुबह शाम झा...
अजय  कुमार झा
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मैं शुरू से ही ये मान रहा था और जहां भी मुझे लगा यही कह रहा था की नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के सामने हर हाल में सिर्फ और सिर्फ वर्दी वाले ही होने चाहिए ,सत्ता और प्रशासन ही रहने चाहिए | चाहे कुछ  भी हो ,इस कानून का और सरकार के इस रुख का सम...
शिवम् मिश्रा
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सरकार ने आखिरकार आरक्षण के भूत की एक बार फिर से चुटिया पकड़ ली है | हालांकि मेरे जैसे एक साधारण व्यक्ति जो सिर्फ अपने श्रम और संघर्ष पर अपना मुकाम हासिल कर पाया के लिए किसी भी तरह का आरक्षण , ठीक उस बैसाखी की तरह है जो दो पाँव से चलने दौड़ने वाले तक को जबरन थमाया जा...
अजय  कुमार झा
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कुछ दिनों पूर्वसमय करीब शाम के आठ बजेस्थान : पूर्व दिल्ली की कोई गलीपुत्र आयुष को जुडो कराटे की प्रशिक्षण कक्षा से वापस लेकर लौट रहा हूँ | तीन दिनों से लगातार हो रही बूंदाबांदी ने सड़क को घिचपिच सा कर दिया है | अचानक ही स्कूटी की तेज़ लाईट में सड़क के बीचों बीच कोई औं...
अजय  कुमार झा
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बहती नदी के संग तू बहता जा ,मन तू अपने मन की कहता जा ,न रोक किसी को ,न टोक किसी को,थोडा वो झेल रहे ,थोडा तू भी सहता जा ..वर्तमान में सोशल नेट्वर्किंग साईट्स पर ,उपस्थति बनाए रखने , किसी भी वाद विवाद में पड़ने , तर्क कुतर्क के फेर में समय खराब करने से बहुत बेहतर यही...
अजय  कुमार झा
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समय घूम फ़िर कर वहीं आ खडा होता है और ऐसे समय में तो मुझे लगता है मानो हम सब किसी पार्क में एक दूसरे के पीछे भाग भाग कर गोल गोल घूम घूम कर रेलगाडी छुक छुक छुक छुक खेलने में लगे हैं  । दिल्ली विधानसभा चुनाव एक बार फ़िर से लडे जाने वाले हैं , अपने यहां इस देश में...
अजय  कुमार झा
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इस बीच सोशल नेटवर्किंग साइट्स से लेकर ,समाचार माध्यमों की अति सक्रियता , या कहा जाए कि तत्परता के दोहरा प्रभाव पडता दिख रहा है । एक तरफ़ तो,टीवी, मोबाइल , इंटरनेट, व अन्य समाचार माध्यमों की सर्वसुलभता और खबरों की सतत उपलब्धता ने लोगों को इन सबका आदी बना दिया है , या...
अजय  कुमार झा
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पिछले वर्ष जून में जब अचानक ही केदारनाथ की आपदा सब पर कयामत बनकर टूटी तो उस त्रासदी के प्रभाव से देश भर के लोगों ने झेला । कुदरत के इस कहर से जाने कितने ही परिवार हमेशा के लिए गुम हो गए , कितने बिखर कर आधे अधूरे बच गए , जाने कितने ही परिवार में बचे खुचे लोग मानसिक...
अजय  कुमार झा
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वर्ष २०१४ केआम चुनावों से पहले ही संभावित जीत के प्रति आश्वस्त से लगते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लिए अगले साठ महीनों की प्रशासनिक सेवा देने का अवसर जिस आत्मविश्वास से मांगा था उसी समय कयास लगाए जाने लगे थे कि आगामी सरकार बहुत सारे नए विकल्पों , विच...