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sanjiv verma salil
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-----विश्ववाणी हिंदी संस्थान - समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर --------------------------------- 'सार्थक लघुकथाएँ' २०१८ ------------------------------ चयनित लघुकथाकारों की २-२ प्रतिनिधि लघु कथाएँ २ पृष्ठों पर चित्र, पते सहित सहयोगाधार पर प्रकाशित की जा रही हैं। संकल...
sanjiv verma salil
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विश्ववाणी हिंदी संस्थान समन्वयम २०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१, चलभाष: ९४२५१ ८३२४४ ऍफ़ २, वी ५ विनायक होम्स, मयूर विहार, अशोक गार्डन,भोपाल ४६२०२३ चलभाष: ९५७५४६५१४७ =======================================प्रतिनिधि भारतीय लघुकथाकार और ल...
रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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prabhat ranjan
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'आज़ादी मेरा ब्रांड' एक हरियाणवी लड़की अनुराधा बेनीवाल की घुमक्कड़ी का ऐसा आख्यान है, जिसमें वह सब तो मिलेगा ही जो पहले से हम किसी भी यात्रा-डायरी या यात्रा-आख्यान से पाते रहे हैं, साथ में इसमें एक लड़की की अपनी उस आंतरिक यात्रा की डायरी भी मिलेगी, जिससे गुजरते हुए वह...
प्रतिभा सक्सेना
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*वसु की बिदा के बाद पापा ने मुझसे कहा था ,'मैं  जा रहा हूँ ,अपनी माँ को भेजने की  तैयारी कर रखना.'   उनकी बात सुन कर चौंक गया ,मैं ,माँ को अपने पास रखने का सोचे था.'उनकी तैयारी ? आपने बात कर ली ?''उसमें बात क्या करना ,जायेंगी क्यों नहीं ?वहाँ घर...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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सुंदर चेहरा दिखाओ प्रतियोगिता की मालिकन फेसबुक (चेहरे की किताब) पर दोस्तों मैं अपने विचारों का लेखन (कुछ हीरे-मोती समान कीमती शब्दों का खजाना लुटाना) करके बस कुछ यह ही मंथन (कुछ सार्थक विचार देने का दृढ निश्चय, क्योंकि शरीर मर जाता है मगर विचार हमेशा जिन्दा रहते...
केवल राम
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गतांक से आगे......!!! सृजन की धारणा, सृजन के मन्तव्य, सृजन की कला और तकनीक आदि में समय-समय पर परिवर्तन होता आया है. सृजन की प्राथमिकताओं के विषय में जब हम पूर्ववर्ती विचारकों के विचारों का अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि सभी विद्वान इस विषय में एकमत नहीं हैं कि आखि...
केवल राम
317
गतांक से आगे  आत्मानुशासन जीवन की अनिवार्यता है. जो व्यक्ति इसे अपना लेता है वह अपने लिए और दूसरों के लिए प्रेरणा और ख़ुशी का कारण बनता है. जीवन का यह अनुभूत सत्य है जब हम आत्मानुशासन को साथ लेकर चलते हैं तो बहुत सी बुराइयों से बचे रह सकते हैं और अपने परिवार और...
Sandhya Sharma
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सुप्रसिद्ध ब्लॉगर ललित शर्मा की पुस्तक "सिरपुर : सैलानी की नजर से" हाथ में आई तो पढते ही चली गई। सरल, सहज एवं प्रवाहमय शब्द शैली इसकी विशिष्टता है जो पाठक को अंत तक बांधे रहती है। पुरातत्व एवं इतिहास जैसे नीरस विषय को इन्होंने अपनी लेखनी से रोचक बना दिया। प्राचीन...