ब्लॉगसेतु

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--आपाधापी की दुनिया में,ऐसे मीत-स्वजन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे हैं।।--धीर-वीर-गम्भीर मौन है,कायर केवल शोर मचाता।ओछी गगरी ही बतियाती,भरा घड़ा कुछ बोल न पाता।गर्जन करते, बरस न पाते,हमने वो सावन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन...
Sandhya Sharma
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नव पल्लव झूम उठते हैं , डालियाँ बल खाने लगती हैं। दादुर , मोर , पपीहे सरगम छेड़ने लगते हैं तो लोकजीवन भला कैसे पीछे रह जाये।  क्यों न वह भी झूमे-नाचे और गाये। इसी मनभावन सावन के मौसम में मल्हार और झूलों के पींगों से रंग जाता है जन जीवन। निभाई जाती हैं परम्पराएँ...
मुकेश कुमार
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ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड तुम्हारी अनुपस्थिति मेंहै न,सावन-भादोबादलबारिशबूँदें !पर,हर जगहचमकती-खनकतीतस्वीरसिर्फ तुम्हारी !पारदर्शी हो गयी हो क्या?याअपवर्तन के बादपरावर्तित किरणों के समूह सीढ़ल जाती होतुम !!बूँद और तुमदोनों मेंशायद है नप्रिज्मीय गुण...
kumarendra singh sengar
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सावन का मौसम अपने आपमें अनेक तरह की रागात्मक क्रियाएं छिपाए रहता है. रक्षाबंधन का पावन पर्व, पेड़ों पर डाले गए झूले, उनमें पेंग भरते हर उम्र के लोग, गीत गाते हुए महिलाओं का झूलों के सहारे आसमान को धरती पर उतार लाने की कोशिश. सामान्य बातचीत में जब भी सावन का जिक्र हो...
Yashoda Agrawal
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रात सावन कीकोयल भी बोलीपपीहा भी बोलामैं ने नहीं सुनीतुम्हारी कोयल की पुकारतुम ने पहचानी क्यामेरे पपीहे की गुहार?रात सावन कीमन भावन कीपिय आवन कीकुहू-कुहूमैं कहाँ-तुम कहाँ-पी कहाँ!-अज्ञेय 
 पोस्ट लेवल : सावन
sanjiv verma salil
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सावनी घनाक्षरियाँ :सावन में झूम-झूमसंजीव वर्मा "सलिल"*सावन में झूम-झूम, डालों से लूम-लूम,झूला झूल दुःख भूल, हँसिए हँसाइये.एक दूसरे की बाँह, गहें बँधें रहे चाह,एक दूसरे को चाह, कजरी सुनाइये..दिल में रहे न दाह, तन्नक पले न डाह,मन में भरे उछाह, पेंग को बढ़ाइए.राखी की...
PRABHAT KUMAR
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इस तरह बारिश में भीगते हुए मैंने देखा था अपने आपको बस एक बार, बहुत छोटा बच्चा था, एक-एक बूँद भी पड़े तो समझो मेरे हाथों में सिहरन सी होने लगती। लगता कोई हवा चल रही हो और वो अंदर प्रवेश करके सीधे मस्तिष्क तक पहुंच गई हो। हम कागज की नाव बना कर आंगन में भरे लबालब पानी...
sanjiv verma salil
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चन्द माहिया सावन केआनंद पाठक *सावन की घटा कालीयाद दिलाती हैवो शाम जो मतवाली*सावन के वो झूलेझूले थे हम तुम कैसे कोई भूले*सावन की फुहारों सेजलता है तन-मनजैसे अंगारों से*आएगी कब गोरी?पूछ रही मुझ सेमन्दिर की बँधी डोरी*क्या जानू किस कारन?सावन भी बीता आए न...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:सावन*सावन भावन मन हरे, हरियाया संसार।अंकुराए पल्लव नए, बिखरे हरसिंगार।।*सावन सा वन हो नहीं, बाकी ग्यारह मास।चूनर हरी पहन धरा, लगे सुरूपा ख़ास।।*सावन में उफना नदी, तोड़े कूल-किनार।आधुनिकाएँ तोड़तीं, जैसे घर-परिवार।।*बादल-बिजली ने रखा, 'लिव-इन' का संबंध।वर्षा...
 पोस्ट लेवल : savan dohe सावन दोहा
mahendra verma
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दर रहे या ना रहे छाजन रहे,फूल हों ख़ुशबू रहे आँगन रहे ।फ़िक्र ग़म की क्यों, ख़ुशी से यूँ अगर,आँसुओं से भीगता दामन रहे ।झाँक लो भीतर कहीं ऐसा न हो,आप ही ख़ुद आप का दुश्मन रहे ।ज़िंदगी में लुत्फ़ आता है तभी,जब ज़रा-सी बेवजह उलझन रहे ।कल सुबह सूरज उगे तो ये दिखे,।बीज मिट्ट...