ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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राजीव सिन्हा
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चाहे धूल-भरा अन्धड़ हो, चाहे ताज़ा-ताज़ा, साफ़ आसमान, गांव की तरफ़ नज़र उठती, तो वह ज़रूर उस बूढ़े पीपल से टकराती, जो दक्खिन को जानेवाले छोर पर खड़ा जाने कब से आसमान को निहार रहा है। हां, जब आसमान घिरा होता, ऊदे-ऊदे बादल झुककर गांव की बंसवारियों को दुलराने लगते, तो...
राजीव सिन्हा
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भुवाली की एक छोटी सी कॉटेज में लेटा-लेटा मैं सामने के पहाड़ देखता हूँ। पानी भरे, सूखे-सूखे बादलों के घेरे देखता हूँ। बिना आँखों के भटक-भटक जाती धुन्ध के निष्फल प्रयास देखता हूँ। और फिर लेटे-लेटे अपने तन का पतझार देखता हूँ। सामने पहाड़ के रूखे हरियाले में रामगढ़ जात...
राजीव सिन्हा
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आखिर को लैला की माँ ने मंजूर कर लिया, कहा – “अब लैला को मजनू के हाथ ही सौंप दूँगी!” सुननेवाले इस समाचार से खुश हो गए। लोगों ने लैला की माँ को बधाइयाँ दीं। मजनू बेचारा कितनी मुद्दत से लैला के पीछे तड़प रहा था। आशिकी के कारण इस दुनिया और उस दुनिया द...
राजीव सिन्हा
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भारतवर्ष में जितने व्यवसाय हैं, उन सबमें लेन-देन का व्यवसाय सबसे लाभदायक है। आम तौर पर सूद की दर 25 रु. सैकड़ा सालाना है। प्रचुर स्थावर या जंगम सम्पत्ति पर 12 रु. सैकड़े सालाना सूद लिया जाता है, इससे कम ब्याज पर रुपया मिलना प्रायः असंभव है। बहुत कम ऐसे व्यवसाय हैं, ज...
ज्योति  देहलीवाल
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रोज की तरह दोपहर के लंच टाइम में सभी सहकर्मी लंच करते-करते बातें भी कर रहे थे। रितेश बोला, 'आज तो घर जल्दी जाना हैं।' अनिल ने पूछा, 'क्यों, आज कुछ खास हैं क्या?'  'लो, इन महाशय को आज का इतना खास दिन भी नहीं मालूम! अनिल, वैसे तो तुझे हर बात की पूरी जा...
राजीव सिन्हा
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लोग मुझे उन्मादिनी कहते हैं। क्यों कहते हैं, यह तो कहने वाले ही जानें, किन्तु मैंने आज तक कोई भी ऐसा काम नहीं किया है जिसमें उन्माद के लक्षण हों। मैं अपने सभी काम नियम-पूर्वक करती हूँ। क्या एक भी दिन मैं उस समाधि पर फूल चढ़ाना भूली हूँ? क्या ऐसी कोई भी संध्या गयी ह...
 पोस्ट लेवल : कथा साहित्य
vedprakash srivastav
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 पोस्ट लेवल : धर्मसाहित्य
राजीव सिन्हा
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जिला बनारस में बीरा नाम का एक गाँव है। वहाँ एक विधवा वृद्धा, संतानहीन, गोंड़िन रहती थी, जिसका भुनगी नाम था। उसके पास एक धुर भी जमीन न थी और न रहने का घर ही था। उसके जीवन का सहारा केवल एक भाड़ था। गाँव के लोग प्रायः एक बेला चबैना या सत्तू पर निर्वाह करते ही हैं, इसलिए...
Asha News
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झाबुआ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मालवा प्रांत द्वारा 31 अगस्त एवं 1 सितंबर को दो दिवसीय अभा मालवांचल आनलाईन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के ख्याति प्राप्त साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी सहभागिता कर श्रेष्ठ एवं अनुपम काव्य रचनाओं की प्रस्तुतियां देकर...