मुखपृष्ठसाहित्यकारों की वेबपत्रिकावर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020देख तमाशा होली काडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"मस्त फुहारें लेकर आया,मौसम हँसी-ठिठोली का।देख तमाशा होली का।।उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,हुआ है धरती-अम्बर लाल,भरे गुझिया-मठरी के थाल,चमकते रंग-बिरंगे गाल...