उन्नीस सौ नब्बे के आसपास की बात होगी, उन दिनों हिंदी साहित्य जगत में लघु पत्रिकाएं बहुतायत में निकला करती थीं। इनमें से ज्यादातर पत्रिकाएं एक विशेष विचारधारा का पोषण और सवंर्धन करनेवाली होती थीं। कम संख्या में छपनेवाली इन पत्रिकाओं की मांग उस विशेष विचारधारा के अनु...