ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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यूँ न टूटकर, असमय था बिखरना मुझे...छोड़ कर यादें, वो तो तन्हा चला,तोड़ कर अपने वादे, यूँ कहाँ वो चला,तन्हाइयों का, ये है सिलसिला,यूँ इस सफर में, तन्हा न था चलना मुझे!यूँ न टूटकर, असमय था बिखरना मुझे...कली थी, अभी ही तो खिली थी!सजन के बाग की, मिश्री की डली थी!था अपन...
ऋता शेखर 'मधु'
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2122 1212 22काफ़िया-आरदीफ़-कोईसिलसिला आज तो जुड़ा कोईनफ़रतें छोड़ कर मिला कोईआसरो से बँधा रहा जीवनमोगरा डाल पर खिला कोईनज़्म धड़कन बनी रही हरदमख्वाब ऐसा जगा गया कोईदेश मेरा सदा रहे कायमफाँसियों में इसे लिखा कोईमुल्क में चैन हो अमन भी होलाठियाँ भाँज कर कहा कोई*ऋता शेखर '...
सरिता  भाटिया
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तुम पूछते थे हर पल,बताते थे हर पल उस पल में खुश थी पूछते नहीं तुम अब ,बताते नहीं तुम अब इस पल में भी खुश हूँ |सिलसिले थे बातों के प्यार के जज्बातों के उस पल में खुश थी ख़त्म हुए सिलसिले आ गये शिकवे गिले इस पल में भी खुश हूँ |म...
 पोस्ट लेवल : खुशी सिलसिला जज्बात पल
सरिता  भाटिया
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मुँह मुझसे मोड़ कर आज जिस मोड़ पर चल दिए हो छोड़कर जायें तो कहाँ जायें सिलसिला यह तोड़करदेखा जो सपनाहुआ नहीं अपनारास्ते यूँ मोड़कर जायें तो कहाँ जायें सिलसिला यह तोड़करप्यार सच्चा जानकरतुम्हे अपना मानकरयादों को जोड़कर जाएँ तो कहाँ जायेंस...
 पोस्ट लेवल : सिलसिला गीत प्यार
मधुलिका पटेल
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हालातों ने उसकी खुशी कोकही दफ़ना दियाउससे छीन कर उसकी मुस्कुराहट कोकहीं छिपा दियाचाहती थी वो सूरज की किरनों से पहलेदौड़ कर धरा को छू लूगुन-गुनी धूप सी गरमाइशहाथों में हुआ करती थीजाड़े में गुलमोहर के नीचेइंतज़ार खत्म होता थाऔर सर्द हवाओं मेंकाँपते उसके हाथ होते...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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खिड़की की बात करता हूँ दरवाज़ा याद आने लगता है दरवाज़े के पीछे पीछे मकान चला आता हैतेरी यादों की तरह सिलसिला टूटता ही नहींसाथ बिताया हर लम्हा ज़हन में गूंजता रहता है मुझे सुकून से महरूम रखता है© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर473-13-07--09-2014 याद,यादें,सिलसिला,शायरी,सुकून,s...