ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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जब आम बजट की तैयारी हो रही थी तो उस वक्त एक महत्वपूर्ण घटना घटी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यालय में देश के बड़े उद्योगपतियों के साथ बैठक की थी और उनके विचार जाने थे। जिस दिन प्रधानमंत्री इन बड़े उद्योगपतियों के साथ बैठक कर रहे थे उसी दिन वित्त मंत्र...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैंकद्दू यानी सीताफल का प्रयोग हमारे यहां सब्जी की तरह किया जाता है, हालांकि ये एक फल है। कद्दू से स्वादिष्ट सब्जी, रायता, खीर, हलवा आदि बनाया जाता है। कद्दू...
Kavita Rawat
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sanjiv verma salil
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हास्य रचना:सीता-राम*लालू सेकालू मिला,खुश हो किया सलाम। बोला-"जोड़ी जँच रहीजैसे सीता-राम। लालू बोला-सच?न क्यों, रावण हरता बोल?समा न लेती भू कहो,क्यों लाकर भूडोल??***http://divyanarmada.blogspot.in/
Ravindra Pandey
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को प्रणम्य निवेदित पंक्तियाँ....**********************************सृजन को करती सदा जीवंत हैं ये नारियाँ,हर विधा हर काल में ये शक्ति का पर्याय हैं...गोद में खेले ये जब, भर दे हमें वात्सल्य से,रूप लें सीता का तो ये त्याग का अभिप...
Ravindra Prabhat
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कहा गया है कि साहित्य की अमृतधारा हास्य और व्यंग्य से होकर ही गुजरती है। जहां हित की भावनाएं हिलकोरें मारती है, वहीं से प्रस्फुटित होती  है हास्य और व्यंग्य की एक अलग धारा जो पत्र-पत्रिकाओं के रास्तों से गुजरते हुये मंच पर श्रोताओं के बीच जाकर पूर्णता को...
sanjiv verma salil
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दोहा-दोहा राम  *लक्ष्य रखे जो एक ही,वह जन परम सुजान.लख न लक्ष मन चुप करेसाध तीर संधान..लखन लक्ष्मण या कहें,लछ्मन उसको आप.राम-काम सौमित्र का,हर लेता संताप..सिया-सिंधु की उर्मि ला,अँजुरी रखें अँजोर.लछ्मन-मन नभ, उर्मिलामनहर उज्ज्वल भोर..लखन-उर्मिला देह-मन,इस...
विजय राजबली माथुर
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आजकल विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं, फेसबुक, ब्लाग वगैरह पर कुछ महिला और कुछ पुरुष लेखकों द्वारा भी समाज के पितृ  सत्तात्मक होने व महिलाओं के दोयम दर्जे की बातें बहुतायत से देखने - पढ़ने को मिल जाती हैं। लेकिन ऐसा हुआ क्यों ? और कैसे ? इस पर कोई चर्चा नहीं मिलती है। अ...
sanjiv verma salil
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एक रचना -कौन?*कौन रचेगा राम-कहानी?कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??खुशियों की खेती अनसिंचित, सिंचित खरपतवार व्यथाएँ। *खेत कारखाने-कॉलोनी बनकर, बिना मौत मरते हैं।असुर हुए इंसान,न दाना-पानी खा,दौलत चरते हैं। वन भेजी जाती सीताएँ, मन्दिर पुजतीं शूर्पणखाएँ। कौन रचेगा राम-कहानी?कौ...
sanjiv verma salil
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गीत: मंजिल मिलने तक चल अविचल..... संजीव 'सलिल'*लिखें गीत हम नित्य न भूलें, है कोई लिखवानेवाला.कौन मौन रह मुखर हो रहा?, वह मन्वन्तर और वही पल.....*दुविधाओं से दूर रही है, प्रणय कथा कलियों-गंधों की.भँवरों की गुन-गुन पर हँसतीं, प्रतिबंधों की व्यथा-कथाएँ.सत्य-तथ्य से न...