ब्लॉगसेतु

Saransh Sagar
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आज तमाम नेता और समाज सेवा के नाम पर प्रचार करने वाले कुछ लोग शौक और लोकप्रियता के लिए झाड़ू उठाते फिर रहे है ! जो अपने घर में झाड़ू,पोछा नही कर सकते वो अब स्वच्छता का ज्ञान पेल रहे है ! इस अभियान को फ़ैलाने का उद्देश्य तो सकारात्मक था पर इस अभियान के नाम पर वोट बैंक ब...
Saransh Sagar
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पढ़ ले भाई, अब वक़्त हो गयारोयेगा फिर नही तो कहेगा ये क्यों,क्या और कब हो गया ?बन्द कर दे ये आलसपना,नही तो हो जायेगा मजबूरनिकल जायेगी सारी तेरी हेकड़ी और रोयेगा भरपूरकितने सपने संजो के तुझ को तेरे अभिभावक पढ़ातेउन सपनो को तुम अपने अय्याशियों से यूँ ही कुचलते जातेयाद आए...
Saransh Sagar
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माँ है वो मेरी।मुझको जग में लाने वाली ममतामयी है माँ मेरी।कैसे करू मै उसकी सेवा ये समझ आता नहीं।अपने ममता के स्पर्श से जिसने किया मुझे बहुत लाड।याद आती है उसकी जब नहीं रहती वो मेरे साथ॥किया बचपन में हम दोनों ने खूब सारी मस्ती।घूमती थी मुझे लेकर कभी शहर तो कभी बस्ती...
Saransh Sagar
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ये कविता उन सभी लोगों को समर्पित है जिन्होंने मेरे जीवन में एक शिक्षक,गुरु की भांति मेरा मार्ग दर्शन किया है !! उनमे मेरे माता-पिता,मेरे अध्यापक व् अध्यापिका ,मेरे सगे-सम्बंधी व मेरे मित्र शामिल है !!आकर जीवन में आपने मुझेजीने का अर्थ बतलाया है,धन्य हुई जो आपके मैं...
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दो माँ पर आधारित एक अनुपम रचना अवश्य पढ़े ! इसे पढ़कर आपको भी दो माँ के प्यार का अहसास अवश्य होगा !कैसे अदा करूँ ईश्वर शुक्रिया तुम्हारा !!कैसे अदा करूँ ईश्वरशुक्रिया तुम्हारा,है मेरी किस्मत में तुमनेजो सौभाग्य लिखा,कहाँ मिलता है प्यारएक माँ का भी बहुतों को,तुमने मेर...
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युवा शक्ति बढ़ युवा तू नेंक रास्ते पर, अभी कुछ करना काम है !भर युवा शक्ति तू मन में क्योंकि करना अब नया संग्राम है !!विश्वास की नगरी में सच्चे कर्म की, ये युवा की पहचान है !रचना नया इतिहास है हम सबको फिर कर्मों का ही गुणगान है !!अविराम निश्चय बढ़ने पर हमको मिलनी...
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बेटी की पुकार ( पर जन्म से पहले न देना मार )जो देते हो औरों को प्यारछीन ना लेना, मुझसे मेरा अधिकारचाहे ना देना, मुझको ऐसा दुलारपर जन्म से पहले न देना मारबस मांग रही हूँ ये उपहार जग में आने का दे दो अधिकारइतनी सी है मेरी पुकार मांग रही हूँ बस जग का प्...
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आओ स्वच्छ करें निर्मल भारतनदी-नालों में अविरल जल की फिर से धार बहे सुरमय,गली-बगीचे मुग्ध दिखें और पुष्प खिलें सुंदर तनमय,हर नारी विदुषी हो और कर्मठ हो हर घर बालक,आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... हो आचरण हमारे ऐसे विश्व को कुछ सि...
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  प्रस्तुत कविता रौशनी कुमारी द्वारा रचित है जो ( खोड़ा ) गाजियाबाद क्षेत्र की निवासी है व् राजकीय डिग्री कॉलेज की छात्रा व् सामाजिक कार्यकर्ता एवं चैलेंजर्स ग्रुप ( पंजीकृत ) की सदस्य है  !________________________________________________________प्यार...
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जिंदगी से यूँ मायूस न हो ख़ुशी का कोई किनारा तो होगा !!इस दुःख से भरी कश्ती मेंउस रब ने तुझे यूँ ही न उतारा होगा !!                       इस मतलब की दुनिया में  कोई तो तेरा सहारा होगा !!उठ और लड़ अ...