ब्लॉगसेतु

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--जिस बालक का ईश पर, था अनुराग अनन्य।उस नानक के जन्म से, देश हो गया धन्य।।--जाते हैं करतारपुर, जत्थों में सिख लोग।आया सत्तर साल में, आज सुखद संयोग।।--सरिताओं में बह रहा, अब तो पावन नीर।गंगा में डुबकी लगा, निर्मल करो शरीर।।--नदी-झील मिट गया, अब तो सारा पं...
 पोस्ट लेवल : आज सुखद संयोग दोहे
sanjiv verma salil
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ॐछंद सलिला:सुखदा छंद*छंद-लक्षण: जाति महारौद्र, प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १२-१०, चरणांत गुरु (यगण, मगण, रगण, सगण)लक्षण छंद:सुखदा बारह-दस यति, मन की बात कहेगुरु से करें पद-अंत, मंज़िल निकट रहेउदाहरण:१. नेता भ्रष्ट हुए जो / उनको धुनना हैजनसेवक जो सच्चे / उनको सुन...
 पोस्ट लेवल : sukhda chhand सुखदा छंद
शिवम् मिश्रा
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सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार।सुखदेव (अंग्रेज़ी:Sukhdev, जन्म- 15 मई, 1907, पंजाब; शहादत- 23 मार्च, 1931, सेंट्रल जेल, लाहौर) को भारत के उन प्रसिद्ध क्रांतिकारियों और शहीदों में गिना जाता है, जिन्होंने अल्पायु में ही देश के लिए शहादत दी। सुखदेव का पूरा नाम 'सुखदेव...
शिवम् मिश्रा
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आज अमर शहीद सुखदेव जी की ११२ वीं जयंती है ! सुखदेव जी का जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में श्रीयुत् रामलाल थापर व श्रीमती रल्ली देवी के घर विक्रमी सम्वत १९६४ के फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष सप्तमी तदनुसार १५ मई १९०७ को अपरान्ह पौने ग्यारह बजे हुआ था । जन्म से त...
 पोस्ट लेवल : 23/03 15/05 शहीद सुखदेव
kumarendra singh sengar
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कहते हैं कि दुःख-दर्द को बहुत दिनों तक याद नहीं रखना चाहिए. जीवन में घटित होने वाली कष्टकारी घटनाओं को भी भुला कर आगे बढ़ना चाहिए. जीवन का फलसफा यही होना चाहिए, इसी में ज़िन्दगी का सार भी है. सभी के जीवन में अच्छे-बुरे पलों का आना होता है, सुखद-दुखद घटनाओं का आना होत...
 पोस्ट लेवल : दुर्घटना सुख-दुःख
kumarendra singh sengar
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समस्याएं सबसे साथ होती हैं पर हमें सिर्फ अपनी समस्या ही सबसे बड़ी क्यों लगती है? कष्ट किसी न किसी रूप में सबके साथ जुड़ा है पर हमें सिर्फ अपना ही कष्ट क्यों सबसे बड़ा दिखाई देता है? क्यों हमें किसी और के कष्ट, समस्या बड़ा समझ नहीं आता? क्यों अपने ही कष्ट को, अपनी समस्य...
shashi purwar
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कुर्सी की पूजा करें, घूमे चारों धामराजनीति के खेल में , हुए खूब बदनामदीवारों को देखते, करते खुद से बातएकाकी परिवार के , बिगड़े से हालातएकाकी मन की उपज, बिसरा दिल का चैनसुख का पैमाना भरो , बदलेंगे दिन रैनमोती झरे न आँख से, पथ में बिखरे फूलसुख पैमाना तोष का , सूख...
संजीव तिवारी
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व्य.प्र.सं. के आदेश 7 नियम 3 के अनुसार, वाद की विषय वस्तु अर्थात वादग्रस्त भूमि के स्थावर संपत्ति होने के बावजूद वादपत्र के साथ वादग्रस्त भूमि का सामान्य नक्शा व चर्तुसीमा संलग्न नहीं होने की स्थिति में एवं कथित आधिपत्य की भूमि से वादग्रस्त भूमि से दूरी और स्थिति क...
kumarendra singh sengar
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सन 2014 के बाद जैसे ही केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ वैसे ही बहुत सारे लोगों ने राष्ट्र, राष्ट्रवाद देशभक्ति के बारे में अपने-अपने मानक तय करने आरम्भ कर दिए. ऐसा नहीं कि इसमें विपक्ष ही शामिल रहा बल्कि सत्ता पक्ष की तरफ से भी इस तरह के मानक बनाये जाते दिखे. बावजूद...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय  ब्लॉगर मित्रों,प्रणाम |ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि कुछ स्वार्थी, बेग़ैरत, सत्ता लोलुप तथाकथित "देशभक्तों और राष्ट्र नायकों" द्वारा, केवल अपने राजनीतिक विचारों और मतभेदों के कारण, "हिंसावादी और आतंकी" घोषित किए गए अमर क्रांतिकारियों को उनकी शहादत क...