ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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बीत जाने परनहीं रहता दुख , दुख सामिटटी हो जाता हैउपजाऊपन से भराजिसमें रोपा जाता हैसुख का बीज |जानते हो !कैसे ?ज्यूँ डाली टूट जाने परनहीं रहता जब उसका वजूदपत्ते सूखकरबिखर जाते हैं राह परतब उस राह से गुजरते हुएसमेट लेता है उनको कोईजला लेता है अलावतो जानते होउन पत्तों...
 पोस्ट लेवल : दुख जिंदगी दर्द सुख
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीत"प्यार करते हैं हम पत्थरों से"बात करते हैं हम पत्थरों से सदा,हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में।प्यार करते हैं हम पत्थरों से सदा,ये तो शामिल हमारे हैं संसार में।।देवता हैं यही, ये ही भगवान हैं,सभ्यता से भरी एक पहचान हैं,हम...
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"कुछ प्यार की बातें करें"ज़िन्दगी के खेल में, कुछ प्यार की बातें करें।प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।।नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें।आस के अंकुर उगा...
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"जीत के माहौल में क्यों हार की बातें करें"सादगी के साथ में, शृंगार की बातें करेंजीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करेंसोचने को उम्र सारी ही पड़ी है सामने,प्यार का दिन है सुहाना, प्यार की बातें करेंरंग मौसम ने भरे तो, रोज...
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीतदिन आ गये हैं प्यार केखिल उठा सारा चमन, दिन आ गये हैं प्यार के।रीझने के खीझने के, प्रीत और मनुहार के।। चहुँओर धरती सज रही और डालियाँ हैं फूलती,पायल छमाछम बज रहीं और बालियाँ हैं झूलती,डोलियाँ सजने लगीं, दिन आ गये शृंगार क...
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"गद्दार मेरा वतन बेच देंगे"ये गद्दार मेरा वतन बेच देंगे।ये गुस्साल ऐसे कफन बेच देंगे।बसेरा है सदियों से शाखों पे जिसकी,ये वो शाख वाला चमन बेच देंगे।सदाकत से इनको बिठाया जहाँ पर,ये वो देश की अंजुमन बेच देंगे।लिबासों में मीनो...
शिवम् मिश्रा
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आज अमर शहीद सुखदेव जी की १०७ वीं जयंती है ! सुखदेव जी का जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में श्रीयुत् रामलाल थापर व श्रीमती रल्ली देवी के घर विक्रमी सम्वत १९६४ के फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष सप्तमी तदनुसार १५ मई १९०७ को अपरान्ह पौने ग्यारह बजे हुआ था । जन्म से तीन माह...
 पोस्ट लेवल : शहीद सुखदेव 23/03 15/05
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 अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"काँटों की पहरेदारी"आशा और निराशा के क्षण,पग-पग पर मिलते हैं।काँटों की पहरेदारी में,ही गुलाब खिलते हैं।पतझड़ और बसन्त कभी,हरियाली आती है।सर्दी-गर्मी सहने का,सन्देश सिखाती है।यश और अपयश साथ-साथ,दायें-बाये चलते हैं।काँटो की...
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"कविता के सुख का सूरज" (डॉ. सिद्धेश्वर सिंह)       डॉ. सिद्धेश्वर सिंह हिन्दी साहित्य और ब्लॉग की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम है। जब कभी विद्वता की बात चलती है तो डॉ. सिद्धेश्वर सिंह को कभी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कर्मनाशा ब्ल...
 पोस्ट लेवल : दो शब्द सुख का सूरज
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मेरी बातनहीं जानता कैसे बन जाते हैं, मुझसे गीत-गजल।ना जाने मन के नभ पर, कब छा जाते गहरे बादल।।ना कोई कापी ना कागज, ना ही कलम चलाता हूँ।खोल पेजमेकर को, हिन्दी-टंकण करता जाता हूँ।।देख छटा बारिश की, अंगुलियाँ चलने लगती हंै।कम्प्यूटर देखा तो...
 पोस्ट लेवल : सुख का सूरज मेरी बात