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sanjiv verma salil
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ॐपुरोवाकलवाही : नवगीत की नई फसल की उगाही आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' * नवगीत मानवीय अनुभूतियों की जमीन से जुड़ी शब्दावली में काव्यात्मक अभिव्यक्ति है। अनुभूति किसी युग विशेष में सीमित नहीं होती। यह अनादि और अनंत है। मानवेतर जीव इसकी अभिव्यक्ति...
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पुरोवाकओस की बूँद - भावनाओं का सागरआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*सर्वमान्य सत्य है कि सृष्टि का निर्माण दो परस्पर विपरीत आवेगों के सम्मिलन का परिणाम है। धर्म दर्शन का ब्रह्म निर्मित कण हो या विज्ञान का महाविस्फोट (बिग बैंग) से उत्पन्न आदि कण (गॉड पार्टिकल) दो...
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पुस्तक चर्चा : ''कालचक्र को चलने दो'' भाव प्रधान कवितायें '' [पुस्तक विवरण: काल चक्र को चलने दो, कविता संग्रह, सुनीता सिंह, प्रथम संस्करण २०१८, पृष्ठ १२५, आकार २० से.मी. x १४.५ से. मी., आवरण बहुरंगी पेपर बाइक लेमिनेटेड, २००/- प्रतिष्ठा पब्लिशिंग हाउस, लखनऊ] *सा...
Tejas Poonia
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प्यारी लड़कियों,कहा जाता है कि जैसे-जैसे लड़की बड़ी होती है, उसकी मां उसकी सहेली बन जाती है और ज़िंदगी में आने वाली हर चीज़ की सीख देती है। आज मैं तुम सभी से जो कहने जा रही हूं वो तुम्हारी माँएं भी तुमसे नहीं कहतीं। जब बेटी बड़ी होने लगती है तो माँएं या तो गूंगी-बह...
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आइए छंद खोजें:होली गीत-- "ब्रज की होली" सुनीता सिंह * फाग राग में डूब के मनवा राधे-राधे बोल रहा है। ३३ बाँसुरिया की तान पे मौसम शरबत मीठा घोल रहा है।। ३३ ब्रज की गली में घूम रही ग्वाल-बाल की टोलियाँ। २८ रंग-बिरंगे जल से भरी लहराती पिचका...
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कार्यशाला: कुण्डलिया एक : कवि दो राधा मोहन को जपे, मोहन राधा नाम।अनहोनी फिर भी हुई, पीड़ा उम्र तमाम।। -सुनीता सिंह पीड़ा उम्र तमाम, सहें दोनों मुस्काते। हरें अन्य की पीर, ज़िंदगी सफल बनाते।। श्वास सुनीता आस, हुई संजीव अबाधा। मोहन राधा नाम, जपे मोहन को राधा।। -संजीव...
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लाघुकथान्कुर: १सुनीता सिंह*लघुकथा - हिसाब रीमा दफ्तर से घर पहुँची, शाम के छः बज चुके थे। दरवाज़े का ताला खोल ही रही थी कि पड़ोस की दो महिलाएँ वहाँ से गुजरीं। उनमें से एक महिला बुजुर्ग तथा दूसरी मध्यम उम्र की थी। रीमा ने एक माह पूर्व ही अपने पति विहान के साथ वहाँ र...
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नवगीत के नए हस्ताक्षर - सुनीता सिंह संक्षिप्त परिचय- नाम: सुनीता सिंह। पदनाम: सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश।  कार्य/ सेवा: सरकारी सेवा। जन्म तिथि: १-७-१९७७। शिक्षा: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परा स्...
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नव लेखन कार्य शाला:दोहा सलिलासुनीता सिंह * पीड़ा मे क्यो डूबता, बैठ करे संताप।ले बीड़ा उपचार का, अपना रहबर आप।।.क्यों पीड़ा से हारकर, करे मनुज संताप?ले बीड़ा उपचार का, बन निज रहबर आप।। *देती कुदरत राह भी , निर्भय देख प्रयास।कातर नयना क्यो खड़ा, ढूँढ तमस मे आस।।.कुदरत...
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कार्यशालानवगीतसुनीता सिंह "ताजा हो ले" बोझ गिराकर हल्का हो ले। ऐ दिल थोड़ा ताजा हो ले। रफ्ता रफ्ता धीरे-धीरे। तू कितनी दूर चला आया।। कैसी-कैसी पगडंडी से। चलकर नीम अकेला आया।। तू ही अपना राजा हो ले।। ऐ दिल थोड़ा ताजा हो ले ।। आकर-जाते जाकर-आते । पल कैसे इतने बी...