ब्लॉगसेतु

कुमार मुकुल
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चांदनी की रहस्यमयी परतों को दरकाती सुबह हो रही है जगो और पाँवों में पहन लो धूल मिट्टी ओस और दौड़ो देखो-स्मृतियों में कोई हरसिंगार अब भी हरा होगा पूरी रात जग कर थक गया होगा संभालो उसेउसकी गंध को संभालो जगो कि कुत्ते सो रहे हैं अभी और पक्षी खोल रहे हैं दिशाओं के द्वा...
 पोस्ट लेवल : सुबह
Roli Dixit
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तुम्हारा होनारोज़ रोज़ होनाकोई आदत नहींन ही...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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अच्छा लगता है वो तितलियों काउड़ना।अच्छा लगता हैवो फूलों कामहकना।।अच्छा लगता है वो चिड़ियों का चहकना।अच्छा लगता है वो हवा काबहकना।।अच्छा लगता है वो बारिश काबरसना।अच्छा लगता है वो इन्द्रधनुष काबनना।।अच्छा लगता है वो सुबह की सैर...
Ravindra Pandey
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ज़िन्दगी के सुहाने सफर में यहाँ,फिसलन भरे मोड़ हालात के।जल रहा है बदन, धूनी की तरह,धुएँ उठ रहे, भीगे जज़्बात के।कसक को पिरोए, वो फिरता रहा,जिया भी कभी, या कि मरता रहा।सुनेगा भी कौन, दुपहरी की व्यथा,सब तलबगार रंगीन दिन-रात के।कोई तो साथ हो, पल भर के लिए,निभा पाया कौन उ...
देवेन्द्र पाण्डेय
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सुबह उठा तो देखा-एक मच्छर मच्छरदानी के भीतर! मेरा खून पीकर मोटाया हुआ,करिया लाल। तुरत मारने के लिए हाथ उठाया तो ठहर गया। रात भर का साफ़ हाथ सुबह अपने ही खून से गन्दा हो, यह अच्छी बात नहीं। सोचा, उड़ा दूँ। मगर वो खून पीकर इतना भारी हो चूका था क़ि गिरकर बिस्तर पर बैठ गय...
PRABHAT KUMAR
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*एक सुबह*मैं दिवाली में घर गया और वापसी में जब ट्रेन पकड़ा तो माँ ने काफी गंभीरता से हर बार की तरह कुछ ऐसा ही कहाकहाँ पहुँचे हो, सीट मिल गई, खाना खा लिया...मेरी कम बात करने की आदत है हां सब ठीक है कहकर, फोन रख दिया।लेकिन.....शायद वह कुछ कहना चाहती थीं।सुबह ट्रेन दिल...
 पोस्ट लेवल : एक सुबह कविता
Ravindra Pandey
478
खूबनुमा सुबह के ओ सौदागर, बड़ा खूब ढाया है तूने कहर,लेकर उनींदे हमारी सभी,देते हो क्यों अलसाया सहर...कैसी है ख्वाबों की ये अनकही,बातें दिलों की दिल मे रही,सुहाना लगे है ख्वाबों का सफर,बड़ा खूब ढाया है तूने कहर...धड़कन क्यों बेताब हैं आजकल,सदियों सा लागे हमें एक प...
देवेन्द्र पाण्डेय
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साइकिल ले कर भोर में सैर को निकला तो मॉर्निंग हो ही रही थी और थोड़ा गुड-गुड लगना शुरू ही हुआ था।  पूरा गुड लगता कि सजे हुए मैरिज लॉन दिखने लगे। भीगी_पलकें का समय था। बिदाई की बेला थी। घर की अजोरिया परायों की होने वाली थी। अपना भी मन शोकाकुल हो इससे पहले तेज पै...
Yashoda Agrawal
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कहीं धूँध में लिपटकर, खोई हुई सी हैं सुबह,धुँधलाए कोहरों में कहीं, सर्द से सिमटी हुई सी है सुबह,सिमटकर चादरों में कहीं, अलसाई हुई सी है सुबह,फिर क्युँ न मूँद लूँ, कुछ देर मैं भी अपनी आँखें?आ न जाए आँखों में, कुछ ओस की बूंदें!ओस में भींगकर भी, सोई हुई सी है सुबह,कँप...
 पोस्ट लेवल : सर्द सुबह कोहरा
S.M. MAsoom
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महानगरों में तो लोग सुबह सुबह अपने घर में ही व्यायाम इत्यादि कर लेते हैं लेकिन जिन्हें जौनपुर जैसे छोटे शहरों में जीवन बिताने को मिला वो जानते हैं की जौनपुर में सुबह की सैर जैसी कोई सैर नहीं और सेहत बनाने का सबसे बेहतरीन मौक़ा है सुबह सुबह सैर को जाना |यहाँ अक्सर लो...
 पोस्ट लेवल : Morning walk society सुबह की सैर health