ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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एक बार सभी देवी देवता अपने बच्चों के साथ महादेव के घर पहुँचे । विविध पकवानों की खुशबू से पूरा कैलाश सुवासित हो उठा था । अन्नपूर्णा अपने हाथों सारे व्यंजन बना रही थी ! मिष्टान्न में खीर,रसगुल्ला,गुलाबजामुन,लड्डू... इत्यादि के साथ अति स्वादिष्ट मोदक बन रहा था ।भोजन श...
विजय राजबली माथुर
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http://epaper.navbharattimes.com/details/57310-77040-2.html   संकटकालीन बचत का एक हिस्सा सरकार को देकर सरकार के बैंकर ने अपने हाथ बांध लिए हैंव्यापारी अपने प्रॉफिट का एक हिस्सा ‘रिजर्व’ में डालता है, जैसे बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट में अथवा सोना खरीदने में।...
Bharat Tiwari
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हम नहीं चंगे बुरा न कोय“पल्प फिक्शन”, 2004 के इकॉनोमिक टाइम्स में यह आर्टिकल छपा था, शायद वह पहली दफा था जब मैंने अपने लड़कपन के प्रिय जासूसी उपन्यासकारों वेद प्रकाश शर्मा और सुरेन्द्र मोहन पाठक के विषय में अखबार में पढ़ा था, साथ में राजहंस, गुलशन नंदा, नरेंद्र कोहली...
अजय  कुमार झा
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सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अब नियमित  रूप से समाचारों में देखने पढ़ने व सुनने को मिल जाती हैं | अफ़सोस और उससे अधिक चिंता की बात ये है की इन घटनाओं में लगातार इज़ाफ़ा ही हो रहा है | दो पहिआ वाहन से लेकर चार पहिया वाहन और भारी वाहन तक कोई भी इससे अछूता नहीं है |...
rashmi prabha
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(लिखती तो मैं ही गई हूँ, पर लिखवाया सम्भवतः श्री कृष्ण ने है )भूख लगी थी,रोऊँ...उससे पहले बाबा ने टोकरी उठा ली !घनघोर अंधेरा,मूसलाधार बारिश,तूफान,और उफनती यमुना ...मैं नारायण बन गया,अपने लिए,बाबा वासुदेव और माँ देवकी के लिए ।घूंट घूंट पीता गया बारिश की बूंदों को,शा...
rashmi prabha
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सोई आँखों से कहीं ज्यादा,मैंने देखे हैं,देखती हूँ,जागी आंखों से सपने ।सकारात्मक,आशाओं से भरपूर ...बहुत से सच हुए,और ढेर सारे टूट गए !पर हौसले का सूर्योदयबरक़रार है,क्योंकि विश्वास मेरे सिरहाने है,बगल की मेज,खाने की मेज,रसोई,बालकनी,खुली खिड़की,बन्द खिड़की,... और मेरे प...
डा. सुशील कुमार जोशी
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लिखना जरूरी है तरन्नुम में मगर ठगे जाने का सारा बही खाता हिसाब कौन जानता है सुर मिले और बन पड़े गीत एक धुप्पल में कभी यही बकवास आज ही के दिन हर साल ठुमुकता चला आता है पुराने कुछ सूखे हुऐ घाव कुरेदने फिर एक बार ये अहसासभूला जाता है ताजिंदगी ठगना खुदा तक को&...
rashmi prabha
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रात में,जब कह देते हैं लोग शुभरात्रिवक़्त के कई टुकड़े पास आ बैठते हैं,सन्नाटा कहता है,सब सो गए !लेकिन जाने कितनी जोड़ी आँखेंजागती रहती हैं,लम्बी साँसों के बीचज़िन्दगी को रिवाइंड करती हैं,फिर एक प्रश्नआँखों के सूखे रेगिस्तान में तैरता है"जिन देवदारों ने तूफानों में दम...
rashmi prabha
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गणपति सुखकर्ता,वक्रतुंड विघ्नहर्ता,गौरीनन्दन,शिव के प्यारे,कार्तिकेय की आंखों के तारे,खाओ मोदक,झूम के नाचो,झूम के नाचोमहाकाय ... गणपति सुखकर्ता ...लक्ष्मी संग विराजो तुमसरस्वती संग विराजो तुमज्ञान की वर्षा,धन की वर्षाकरके हमें उबारो तुमगणपति सुखकर्ता ...आरती तेरी म...
rashmi prabha
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खूबसूरत,सुविधाजनक घरों की भरमार है,इतनी ऊंचाईकि सारा शहर दिख जाए !लेकिन,वह लाल पक्की ईंटों से बना घर,बेहद खूबसूरत था ।कमरे के अंदर,घर्र घर्र चलता पंखा,सप्तसुरों सा मोहक लगता था ।घड़े का पानी,प्यास बुझाता था,कोई कोना-विशेष रूप से,फ्रिज के लिए नहीं बना था ।डंक मारती ब...