ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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मैं ही क्यों अर्से तकरह जाती हूँ पेशोपेश में !बिना किसी जवाब केबड़बड़ाती जाती हूँ,बिना किसी उचित प्रसंग केमुस्कुराती जाती हूँजबकि सामनेवाले के पासहोती है गजब की तटस्थता,स्याह कोहरे सी ख़ामोशी,और सिर्फ अपनी खींची हुई लकीरें ।...अगर चाहतीतो मैं भी अपने अासपासआत्मसम्मान...
sanjay krishna
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हैदराबाद से आए डॉ सुरेश जगन्नाथम झारखंड के आदिवासी असुर-बिरजिया की मौखिक परंपरा पर काम कर चुके हैं। वे घुमंतू शोधार्थी हैं। केरल-कर्नाटक आदि प्रदेशों के आदिवासियों पर भी काम कर चुके हैं। खुद भी आदिवासी हैं। वे आदिवासी दर्शन के बाबत कहते हैं, आदिवासी केवल मनुष्य की...
rashmi prabha
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लड़कियों की ज़िन्दगी क्या सच में दुरूह होती है ?क्या सच में उसका नसीब खराब होता है ?यदि यही सत्य है तो मत पढ़ाओ उसे !यदि उसे समय पर गरजना नहीं बता सकते तो सहनशीलता का सबक मत सिखाओ यह अधिकार रत्ती भर भी तुम्हारा नहीं  … माता-पिता हो जाने स...
rashmi prabha
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एक चवन्नी बोई थी मैंने,चुराई नहीं,पापा-अम्मा की थी,बस उठाई और उसे बो दियाइस उम्मीद मेंकि खूब बड़ा पेड़ होगाऔर ढेर सारी चवन्नियाँ लगेंगी उसमेंफिर मैं तोड़ तोड़कर सबको बांटूंगी ...सबको ज़रूरत थी पैसों कीऔर मेरे भीतर प्यार थातो जब तक मासूमियत रहीबोती गई -इकन्नी,दुअन्नी,चवन...
rashmi prabha
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मेसेज करते हुएगीत गाते हुएकुछ लिखते पढ़ते हुएदिनचर्या कोबखूबी निभाते हुएमुझे खुद यह भ्रम होता हैकि मैं ठीक हूँ !लेकिन ध्यान से देखो,मेरे गले में कुछ अटका है,दिमाग और मन केबहुत से हिस्सों मेंरक्त का थक्का जमा है ।. ..सोचने लगी हूँ अनवरतकि खामोशी की थोड़ी लम्बी चादर ले...
rashmi prabha
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धू धू जलती हुई जब मैं राख हुईतब उसकी छोटी छोटी चिंगारियों ने मुझे बताया,बाकी है मेरा अस्तित्व,और मैं चटकने लगी,संकल्प ले हम एक हो गए,बिल्कुल एक मशाल की तरह,फिर बढ़ चले उस अनिश्चित दिशा में,जो निश्चित पहचान बन जाए ।मैं  नारी,धरती पर गिरकर,धरती में समाहित होकर,बं...
kumarendra singh sengar
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पिछले साल इसी दिसंबर की बात है, हम लोग बिहार के सबसे छोटे जिले शिवहर में थे. न कोई घूमने का विचार, न यहाँ छुट्टियाँ मनाने का कोई कार्यक्रम. हमारे एक मित्र राकेश द्वारा अपने देशव्यापी साईकिल अभियान का समापन अपने गृह-जनपद में किया गया था. समय भी लगभग इसी तिथि के आसपा...
rashmi prabha
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बेटी,यदि तुम सूरज बनोगीतो तुम्हारे तेज को लोग बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे,वे ज़रूरत भर धूप लेकर,तुम्हारे अस्त होने की प्रतीक्षा करेंगे ।सुबह से शाम तकएक ज़रूरत हो तुम ।जागरण का गीत हो तुम,दिनचर्या का आरम्भ हो तुम,गोधूलि का सौंदर्य हो तुम,घर लौटने का संदेश हो तुम ...फिर भ...
rashmi prabha
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हादसे स्तब्ध हैं, ... हमने ऐसा तो नहीं चाहा था !घर-घर दहशत में है,एक एक सांस में रुकावट सी है,दबे स्वर,ऊंचे स्वर में दादी,नानी कह रही हैं,"अच्छा था जो ड्योढ़ी के अंदर ही हमारी दुनिया थी"नई पीढ़ी आवेश में पूछ रही,"क्या सुरक्षित थी?"बुदबुदा रही है पुरानी पीढ़ी,"ना,...
rashmi prabha
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मैं वृक्ष,वर्षों से खड़ा हूँजाने कितने मौसम देखे हैं मैंने,न जाने कितने अनकहे दृश्यों का,मौन साक्षी हूँ मैं !पंछियों का रुदन सुना है,बारिश में अपनी पत्तियों का नृत्य देखा है,आकाश से मेरी अच्छी दोस्ती रही है,क्योंकि धरती से जुड़ा रहा हूँ मैं ।आज मैंने अपने शरीर से वस्...