किसको सुनाऊँ, अज़ब दास्तां,सूना है तुम बिन, ये सारा जहां।रुँधा गला है, और आँखें हैं नम,मुस्कुराने की मैंने, ली है कसम,समय चल रहा है, हवा बह रही,ठहर सा गया हूँ, एक मैं ही माँ।सुना है तुम बिन...कसक हैं कई पर सुनाऊँ किसे,ये पाँवों के छाले दिखाऊँ किसे,बिखर जो गया, समेटे...