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Sandhya Sharma
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जानती हूँ मैं जो भी घटापहली बार नहीं सदियाँ हो गई घटतेज़ुल्म सहते-सहतेफिर भी आशान्वित हूँविपरीत परिस्थितियों मेंयातनाओं से डरी नहीं हूँ बहुत खुश हूँ आजचिंगारी एक सुलगती दिखी है हजारो युवा आँखों में मुझे यही चिंगारी...एक किरण बनेगी हर साल की तरह इस साल की सुबह ...
अविनाश वाचस्पति
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सुबह सुबह का सूर्य
 पोस्ट लेवल : चित्र सुबह सूर्योदय