ब्लॉगसेतु

Tejas Poonia
379
प्रश्न - अब तक की अपनी फ़िल्मी यात्रा के बारे में कुछ बताएँ ?उत्तर – देखिए घर में तो ऐसा कोई था नहीं जो सिनेमा से जुड़ा हुआ हो । मैं एक ऐसे परिवार से हूँ जहाँ सब लोग इस्लामिक हैं । नमाज, रोज़ा आदि में विश्वास रखने वाले हैं । लेकिन निश्चित रूप से तो नहीं कह सकता किन्तु...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
316
खोखला बौद्धिक अहंकार हमें कहाँ ले आया है? बेसुरा छलिया राग सुरीले सपनों का बसंती गाँव कब दे पाया है ?सृजनशील विनिमय से तिरोहित हमारा मानस संकीर्णता की अभेद्य परिधि का व्यास विस्तृत कर गया हैईमानदारी के संवर्धन...
Nitu  Thakur
532
अंत ही आरंभ है,प्रारंभ करता नवसृजन उद्देश्य की पूर्ति करे, उम्मीद का पुनः जन्म शाश्वत ये सत्य विराठ है, उम्मीद मन सम्राट है आरंभ से पहले है वो , वो अंत के भी बाद है सृष्टि का सृजन हुआ जिस पल जीवन का कोई अर्थ न था क़ुदरत की अद्भुत ...
Ravindra Pandey
481
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को प्रणम्य निवेदित पंक्तियाँ....**********************************सृजन को करती सदा जीवंत हैं ये नारियाँ,हर विधा हर काल में ये शक्ति का पर्याय हैं...गोद में खेले ये जब, भर दे हमें वात्सल्य से,रूप लें सीता का तो ये त्याग का अभिप...
Ravindra Pandey
481
हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि अजित कुमार जी के निधन से मन आहत हुआ है...अश्रुपूरित शब्दांजलि.....मौसम एक प्यारा बीत गया,वो सबके मन को जीत गया,अब शेष स्मृतियां जीवन भर,हमें उनकी याद दिलाएंगी...कुछ कर देंगी आँखें नम,कुछ मंद मंद मुस्कायेंगी...ये रीत जगत की न्यारी है,निर्धारि...
केवल राम
314
हिन्दी ब्लॉगिंग को लेकर मेरे मन में ही नहीं बल्कि हर ब्लॉगर और ब्लॉग पाठक के मन में एक अजीब सा आकर्षण है. जब भी कोई ब्लॉगिंग की दुनिया में पदार्पण करता है, या ब्लॉगिंग से किसी का परिचय होता है तो वह इस अनोखी दुनिया में  रम सा जाता है. ब्लॉगिंग का आकर्षण ही कुछ...
girish billore
268
विजेता चेहरे         बालभवन में आयोजित राष्ट्रीय बालश्री 2016 चयन हेतु प्रक्रिया के तहत वादन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मास्टर अंकित बेन, द्वितीय स्थान मास्टर विश्वेश व्यास  तृतीय स्थान सिद्धांत कोठिया ने अर्जित किया . &nbsp...
मुकेश कुमार
425
Madhu Saxena: आज कविताएँ पढ़ते है मुकेश कुमार सिन्हा की ।उन्होंने गणित और विज्ञान विषय को ज़िन्दगी से किस तरह जोड़ा ।[08:50, 2/3/2016] Madhu Saxena: 1. रूट कैनाल ट्रीटमेंट !!तुम्हारा आनाजैसे, एनेस्थेसिया के बादरूट कैनाल ट्रीटमेंट !!जैसे ही तुम आईनजरें मिलीक्षण भर...
विजय राजबली माथुर
72
वीरेन्द्र जैन            यह, वह कठिन समय है जब लेखक बढ़ रहे हैं और पाठक कम हो रहे हैं। पुस्तकें समुचित संख्या में छप रही है किंतु उनके खरीददार कम होते जाते हैं। पुस्तक मेलों में काफी भीड़ उमड़ती है पुस्तकों की प्...
kuldeep thakur
93
सूरज आग का गोला ही सही  गैसों का बवंडर ही सही मगर, पीता है अभी भी अर्ध्य का जल धरती में है कितने कितने चट्टानी रहस्य फिर भी बचा है ,माँ जैसा गुनगुनापन जो ,अंकुरों में भरतादानों में झरता हैं दूध सा अतल में है कहीं तलछोर में अछोर&nb...