ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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Yashoda Agrawal
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एक समय वो भी रहाजब हर चीज़ कस कर पकड़ने की आदत थीचाहे अनुभूतियाँ होंपल होंरिश्ते होंया कोई मर्तबान हीमुट्ठियाँ भिंची रहतीजब स्थितियाँ बदलतींऔर चीज़े हाथ से फिसलतीतो नाखूनों में रह जाती किरचनेंस्मृतियों कीलांछनों कीछटपटाहटों कीकांच कीअजीब सा दंश थाकि मैं दिन भर नाखू...
Yashoda Agrawal
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ग़ैरों को अपना बनाने का हुनर है तुममेंकभी अपनो को अपना बना कर देखो ना..ग़ैरों का मन जो घड़ी में परख लेते होकभी अपनो का मन टटोल कर देखो ना..माना कि ग़ैरों संग हँसना मुस्कुराना आसां हैकभी मुश्किल काम भी करके देखो ना..कामकाजी बातचीत ज़रूरी है ज़माने सेकभी अपनो संग ग़ै...
Asha News
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करणी सेना ने जिले के सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग समाज से अधिक से अधिक संख्या में पधारने हेतु निकाली अपील रैलीझाबुआ। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना एवं समस्त सामान्य तथा पिछड़ा वर्ग संगठन ,द्वारा मिलकर आगामी 15 सितंबर को महालक्ष्मी नगर के सामने मैदान, इंदौर में महारैली ए...
Asha News
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झाबुआ। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने बताया है कि जिले के सभी भूतपूर्व सैनिकों/विधवाओं को सूचित किया गया है, कि भारतीय थल सेना में रिलेशन के आधार पर सैनिकों की भर्ती सेना मेडिकल कोर के सेंटर में 8 सितम्बर 2019 तक आयोजित की जा रही है। इसमें सभी ट्रेडो के लिये भर्...
 पोस्ट लेवल : jhabua भारतीय थल सेना
Yashoda Agrawal
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सोलह सिंगारों में प्रमुख मेंहदी के रूप अनूप हाथों की शोभा होती दुगुनी जब पूर्ण कुशलता से रचाई जाती कलात्मक हरी हरी मेंहदी सावन में मेंहदी से करतीं महिलायें अपना श्रृंगार हरियाली तीज मनातीं धूमधाम से रक्षाबंधन पर बहनों के हाथ&...
 पोस्ट लेवल : आशा सक्सेना
sanjiv verma salil
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समीक्षा :''है छिपा सूरज कहाँ पर'' : खोजिए नवगीत मेंआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल"*[कृति विवरण : है छिपा सूरज कहाँ पर, नवगीत संग्रह, गरिमा सक्सेना, प्रथम संस्करण २०१९, आई.एस.बी.एन. ९७८९३८८९४६१७९, आकार २२ से.मी. x १४.से.मी., आवरण बहुरंगी सजिल्द लेमिनेटेड जैकेट सहित,...
Yashoda Agrawal
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सुनो लड़कियोंअपने पैरों का खास ख्याल रक्खो..देखो एड़ियाँ कटी फटी न होंनाखून ठीक आकार लिए होंबढ़िया नेल पॉलिश लगी हो..इसलिये भी कि इन्ही से दौड़ना हैअपने सपनो के पीछेअपने अपनो के पीछेऔर सबको पीछे कर के सबके आगेतो इन्हें सर पर बैठा कर रखना होगा..और इसलिए भी किव्यस्तता कि...
 पोस्ट लेवल : फेसबुक निधि सक्सेना
sanjiv verma salil
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कार्यशालाआइये! कविता करें ६ :.मुक्तक आभा सक्सेनाकल दोपहर का खाना भी बहुत लाजबाब था, = २६अरहर की दाल साथ में भुना हुआ कबाब था। = २६मीठे में गाजर का हलुआ, मीठा रसगुल्ला था, = २८बनारसी पान था पर, गुलकन्द बेहिसाब था।। = २६लाजवाब = जिसका कोई जवाब न हो, अतुलनीय, अनु...