ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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आज बहुत दिन ऑफिस जाना हुआ आज मिली फिर तुमसेबैठी कुछ देर तुम संगकी दो चार बातें खूब चहक रही तुम लाल पीले फूलों संग बोटल-ब्रस भीझूम रहा था लाली से गुलाब और चमेलीमहक रहे थे शान सेनहीं था भय तुम्हें किसी संक्रमण काप्रकृति को खुद में समायेल...
mahendra verma
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क्या आपको किसी ने कभी कहा है कि ‘ज़रा खुले दिमाग़ से सोचो’ या क्या यही बात आपने किसी से कभी कही है ?  इस बात से ऐसा लगता है कि सोचने वाला अब तक ‘बंद दिमाग़’ से सोच रहा था । क्या बंद दिमाग़ से भी सोचा जा सकता है ? सोचते होंगे कुछ लोग ! तभी तो कहने की ज़़रूरत पड़ी कि...
अनीता सैनी
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विश्वास के हल्के झोंके से  पगी मानव मन की अंतरचेतना छद्म-विचार को खुले मन से धारणकर स्वीकारने लगी, हया की पतली परत  सूख चुकी धरा के सुन्दर धरातल पर जिजीविषा पर तीक्ष्ण धूप बरसने लगी | अंतरमन में उलीचती स्नेह सर...
Lokendra Singh
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चंद्रमा पर चंद्रयान-2 के उतरने से पहले ही लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने को इस अभियान की असफलता नहीं माना जाना चाहिए। चंद्रमा के जिस हिस्से (दक्षिणी ध्रुव) पर आज तक कोई नहीं पहुँचा, वहाँ सॉफ्ट लैंडिंग का हमारा बड़ा लक्ष्य अवश्य था, किंतु यह चंद्रयान-2 का एकमात्र लक्ष...
Kavita Rawat
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सरिता  भाटिया
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सबसे सुंदर देश हमारा,विश्व को यह बतलाना है।हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।सोच बदलने देश बदलने एक मसीहा आया हैछोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया हैमातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना हैहाथ मिलाकर ...खुद समझो सबको समझाओ महत्ता कूड़ा दान कीप्रबंधन से...
Ravindra Pandey
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मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं,हीरे-मोती, माहताब चुनूं...दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को,मन में अक्सर यही बात गुनूं...क्यों बरखा भाए मधुबन को,शीतल कर जाए तन-मन को,भीगेगीं अल्हड़ पंखुड़ियाँ,उस पल बूंदों का राग सुनूं...मैं सोचता हूँ...जब पनिहारिन पनघट जाए,गागर में सागर भ...
Akanksha Yadav
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विश्व पर्यावरण दिवस पर कोई बड़ा संकल्प भले न लें, पर एक पौधा ज़रूर लगाएं। ज़मीन में नहीं तो गमलों में ही सही..... और जो पहले लगाए थे, उनमें पानी भी दे आयें! यकीन मानिए, आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए कल ये ही छाँव देंगे। अधिकांश लोग सोशल मीडिया...
Akanksha Yadav
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सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के कक्षा 12 वीं के नतीज़ों में बेटियाँ फिर से अव्वल। यही साल क्यों, प्रायः हर साल इन रिजल्ट्स में बेटियाँ अव्वल रहती हैं। बेटियाँ लगातार छठवें साल अव्वल रहीं। लड़कियों ने इस बार भी लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। इनका उत्तीर्ण प्रतिशत 88.31...
Akanksha Yadav
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क्या वाकई श्रमिक दिवस को ये महिलाएँ सेलिब्रेट करती होंगी। सिर्फ महिलाएँ ही क्यों हमारे आस-पास काम करते बाल श्रमिक से लेकर पुरुष श्रमिक तक क्या इस खास दिवस का कोई लुत्फ़ उठा पाते होंगे। क्या जितनी कवायद इस दिन अख़बारों के पन्ने भरने से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया या...