ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठेस्वप्न हुए साकार, जब कर्म की राह चले।गंगा आईं द्वार, उनको भागीरथ मिले ।।1नारी का शृंगार, बिन्दी पायल चूड़ियाँ।पहन स्वप्न का हार, नभ मुठ्ठी में भर चलीं।।2नन्हें नन्हें ख़्वाब, नन्हों के मन में खिले।बोझिल हुए किताब, ज्यों ज्यों वे वजनी हुए।।3लिए हाथ में हाथ, पथिक...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठाहर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन।।1प्रातःकाल की वायु , ऊर्जा भर देती नई।बढ़ जाती है आयु, मिट जाती है व्याधियाँ।।2छाता जब जब मेह, श्यामवर्ण होता गगन।भरकर अनगिन नेह, पवन उसे लेकर चला।।3शीतल मंद समीर, तन को लगता है भला।बढ़ी कौन सी प...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा सभी रचनाएँ
sanjiv verma salil
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दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनित हर, कर दे बे-पीर।। *रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को। उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राच...
sanjiv verma salil
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सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...
sanjiv verma salil
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 एक सोरठा: उद्यम से हो सिद्ध, कार्य मनोरथ से नहीं।'सलिल, लक्ष्य हो बिद्ध, सतत निशाना साधिए।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : soratha सोरठा
sanjiv verma salil
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दोहा-सोरठा सलिला:छंद सवैया सोरठा, लुप्त नहीं- हैं मौनह्रदय बसाये पीर को, देख रहे चुप कौन?*करे पीर से प्रेम जब, छंद तभी होता प्रगट  बसें कलम में तभी रब, जब आँसू हों आँख में *पीर-प्रेम का साथ ही, राधा-मीरावाद सूर-यशोदा पीर का, ममतामय अनुवाद*शब्द-शब्द आनंद,...
sanjiv verma salil
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सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...
sanjiv verma salil
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दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनितहर, कर दे बे-पीर।।*रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को।उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।।*सकें मछलियाँ...
sanjiv verma salil
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हाइकु:ईंट रेत का मंदिर मनहर देव लापताक्षणिका :*पुज परनारी संग श्री गणेश गोबर हुए. रूप - रूपए का खेल, पुजें परपुरुष साथ पर लांछित हुईं न लक्ष्मी***जनक छंद :नोबल आया हाथ जब उठा गर्व से माथ तब आँख खोलना शेष अबसोरठा :घटे रमा की चाह, चाह शारदा की बढ़े...