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sanjiv verma salil
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छंद सोरठा अलंकार यमक *आ समान जयघोष, आसमान तक गुँजायाआस मान संतोष, आ समा न कह कराया ***छंद सोरठा अलंकार श्लेष सूरज-नेता रोज, ऊँचाई पा तपाते झुलस रहे हैं लोग, कर पूजा सर झुकाते ***संवस १.४.२०१९http://divyanarmada.blogspot.in/
Basudeo Agarwal
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मंजुल मुद आनंद, राम-चरित कलि अघ हरण।भव अधिताप निकंद, मोह निशा रवि सम दलन।।हरें जगत-संताप, नमो भक्त-वत्सल प्रभो।भव-वारिध के आप, मंदर सम नगराज हैं।।शिला और पाषाण, राम नाम से तैरते।जग से हो कल्याण, जपे नाम रघुनाथ का।।जग में है अनमोल, विमल कीर्ति प्रभु राम की।इसका कछु...
sanjiv verma salil
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सोरठामन बैठा था मौन, लिखवाती संगत रही।किसका साथी कौन?, संग खाती पंगत रही।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : सोरठा
Basudeo Agarwal
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नयन भरा है नीर, चखन श्याम के रूप को।मन में नहिं है धीर, नयन विकल प्रभु दरस को।।शरण तुम्हारी आज, आया हूँ घनश्याम मैं।सभी बनाओ काज, तुम दीनन के नाथ हो।।मन में नित ये आस, वृन्दावन में जा बसूँ।रहूँ सदा मैं पास, फागुन में घनश्याम के।।फूलों का श्रृंगार, माथे सजा गुलाल है...
Basudeo Agarwal
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दोहा की तरह सोरठा भी अर्ध सम मात्रिक छंद है। इसमें भी चार चरण होते हैं। प्रथम व तृतीय चरण विषम तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण सम कहे जाते हैं। सोरठा में दोहा की तरह दो पंक्तियाँ होती हैं और प्रत्येक पंक्ति में २४ मात्राएँ होती हैं। सोरठा और दोहा के विधान में कोई अंतर नही...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठेस्वप्न हुए साकार, जब कर्म की राह चले।गंगा आईं द्वार, उनको भागीरथ मिले ।।1नारी का शृंगार, बिन्दी पायल चूड़ियाँ।पहन स्वप्न का हार, नभ मुठ्ठी में भर चलीं।।2नन्हें नन्हें ख़्वाब, नन्हों के मन में खिले।बोझिल हुए किताब, ज्यों ज्यों वे वजनी हुए।।3लिए हाथ में हाथ, पथिक...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठाहर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन।।1प्रातःकाल की वायु , ऊर्जा भर देती नई।बढ़ जाती है आयु, मिट जाती है व्याधियाँ।।2छाता जब जब मेह, श्यामवर्ण होता गगन।भरकर अनगिन नेह, पवन उसे लेकर चला।।3शीतल मंद समीर, तन को लगता है भला।बढ़ी कौन सी प...
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sanjiv verma salil
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दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनित हर, कर दे बे-पीर।। *रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को। उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राच...
sanjiv verma salil
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सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...