ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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 छंद सप्तक १. *शुभगति कुछ तो कहो चुप मत रहो करवट बदल- दुःख मत सहो *छवि बन मनु महान कर नित्य दान तू हो न हीन- निज यश बखान*गंग मत भूल जाना वादा निभानासीकर बहाना गंगा नहाना *दोहा:उषा गाल पर मल रहा, सूर्य विहँस सिंदूर।कहे न तुझसे अधिक है, सुंदर कोई हूर।।*सोरठासलिल...
sanjiv verma salil
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हाइकु :ईंट रेत कामंदिर मनहरदेव लापता*जनक छंद नोबल आया हाथ जबउठा गर्व से माथ तबआँख खोलना शेष अब*क्षणिका :पुज परनारी संगश्री गणेश गोबर हुए। रूप - रूपए का खेलपुजें परपुरुष साथ परलांछित हुईं न लक्ष्मी। दोहा :तुलसी जब तुल सी गयी, नागफनी के साथ। वह अंदर; बाहर हुई, तुलसी...
sanjiv verma salil
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दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनितहर, कर दे बे-पीर।।*रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को।उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।।*सकें मछलियाँ...
sanjiv verma salil
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सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं,शेष र...
sanjiv verma salil
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छंद सोरठा अलंकार यमक *आ समान जयघोष, आसमान तक गुँजायाआस मान संतोष, आ समा न कह कराया ***छंद सोरठा अलंकार श्लेष सूरज-नेता रोज, ऊँचाई पा तपाते झुलस रहे हैं लोग, कर पूजा सर झुकाते ***संवस १.४.२०१९http://divyanarmada.blogspot.in/
Basudeo Agarwal
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मंजुल मुद आनंद, राम-चरित कलि अघ हरण।भव अधिताप निकंद, मोह निशा रवि सम दलन।।हरें जगत-संताप, नमो भक्त-वत्सल प्रभो।भव-वारिध के आप, मंदर सम नगराज हैं।।शिला और पाषाण, राम नाम से तैरते।जग से हो कल्याण, जपे नाम रघुनाथ का।।जग में है अनमोल, विमल कीर्ति प्रभु राम की।इसका कछु...
sanjiv verma salil
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सोरठामन बैठा था मौन, लिखवाती संगत रही।किसका साथी कौन?, संग खाती पंगत रही।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : सोरठा
Basudeo Agarwal
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नयन भरा है नीर, चखन श्याम के रूप को।मन में नहिं है धीर, नयन विकल प्रभु दरस को।।शरण तुम्हारी आज, आया हूँ घनश्याम मैं।सभी बनाओ काज, तुम दीनन के नाथ हो।।मन में नित ये आस, वृन्दावन में जा बसूँ।रहूँ सदा मैं पास, फागुन में घनश्याम के।।फूलों का श्रृंगार, माथे सजा गुलाल है...
Basudeo Agarwal
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दोहा की तरह सोरठा भी अर्ध सम मात्रिक छंद है। इसमें भी चार चरण होते हैं। प्रथम व तृतीय चरण विषम तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण सम कहे जाते हैं। सोरठा में दोहा की तरह दो पंक्तियाँ होती हैं और प्रत्येक पंक्ति में २४ मात्राएँ होती हैं। सोरठा और दोहा के विधान में कोई अंतर नही...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...