ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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किसी से पहचान होना, किसी से कोई रिश्ता बन जाना, किसी से सम्बन्ध हो जाना, किसी से दोस्ती होना, किसी से सामान्य सा व्यवहार रखना आदि ऐसा लगता है जैसे अपने हाथ में नहीं वरन पूर्व निर्धारित होता है. कोई अकारण ही मन को, दिल को पसंद आने लगता है. कभी ऐसा होता है कि किसी व्...
kumarendra singh sengar
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कहा जाता है कि इन्सान ऊपर वाले के हाथ की कठपुतली है. इसे एक फिल्म के डायलोग के बाद और भी जोर-शोर से अपनाया जाने लगा है. इस सत्य के साथ-साथ एक सत्य और भी है कि इन इंसानों में जो इंसान सोशल मीडिया पर सक्रिय है वह ऊपर वाले के साथ-साथ नीचे वाले के हाथ की भी कठपुतली है....
kumarendra singh sengar
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हिन्दी साहित्य का अध्ययन करते समय पढ़ा था शब्द-संकुचन और शब्द-विस्तार के बारे में. बहुत से लोगों के लिए ये दो शब्द संयोजन भी आश्चर्य का विषय हो सकते हैं. शब्द-संकुचन और शब्द-विस्तार आजकल संभवतः किसी रूप में पढ़ाया नहीं जा रहा. आज यहाँ फेसबुक पर चलाए जा रहे एक कपल चै...
kumarendra singh sengar
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जैसे-जैसे हमें अपनी वैचारिकी के प्रसार-प्रचार के माध्यम मिलते जा रहे हैं, वैसे-वैसे हमारे आसपास संकुचन की स्थिति बनती जा रही है. विचारों का प्रसार करने के साथ-साथ हम सभी लोगों के मन में भावना बनी रहती है कि हमारे उन विचारों को स्वीकारने वाले अधिक से अधिक लोग हों. इ...
kumarendra singh sengar
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31 जुलाई को पत्र दिवस मनाया गया. इस अवसर पर हमने कई मित्रों को पत्र लिखे. सोशल मीडिया के दौर में, संचार तकनीकी विकास के दौर में बहुत से लोगों के लिए पत्र लेखन एक अजूबे से कम नहीं है. सोशल मीडिया के बहुत से मित्रों ने अपने-अपने पते भेजे, उन सभी मित्रों को तत्काल पत्...
kumarendra singh sengar
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सोशल मीडिया ने नियंत्रण के सारे बिन्दुओं को किनारे लगा रखा है. इस मंच पर न रिश्तों की कोई कद्र है, न संबंधों की, न उम्र की. इसकी उन्मुक्तता ने सभी को आज़ादी दे रखी है और वह भी पूरी तरह से निरंकुशता वाली. इस निरंकुश आज़ादी की कीमत लोगों के अपमान से, लोगों की बेइज्जती...
 पोस्ट लेवल : सोशल मीडिया अराजकता
यूसुफ  किरमानी
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बड़ी कंपनियों के विज्ञापन बहिष्कार के फैसले ने फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग (#MarkZukerberg) को घुटनों पर खड़ा कर दिया है। सोमवार को अपने वीडियो संदेश में जुकरबर्ग ने कहा कि अब से फेसबुक उन राजनीतिक दलों के नेताओं के पोस्ट या कंटेंट पर फ्लैग लगाकर चेतावनी देगा, ज...
 पोस्ट लेवल : सोशल मीडिया राजनीति
S.M. MAsoom
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न्यूज़ पोर्टल का आया स्वर्णिम दौर लेकिन ख़बरों की प्रमाणिकता आवश्यक | | सोशल मीडिया की अहमियत से आज के दौर में इंकार नहीं किया जा सकता क्यों की आज यह सबसे  तेज़ लोगों तक अपनी बातें खबरें इत्यादि पहुँचाने का जरिया बन चूका है | आज से दस वर्ष पहले मैंने इस...
 पोस्ट लेवल : सोशल मीडिया
kumarendra singh sengar
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कई बार लगता है कि सोशल मीडिया की ऐसी स्वतंत्रता अब बंद की जानी चाहिए. एडिट फ्री व्यवस्था ने जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है वहीं विचारों की गंदगी भी फैला रखी है. किसी समय अपने आलेख, साहित्यिक रचनाओं के सम्पादक के धन्यवाद पत्र के साथ वापस आने पर बुरी तरह गुस्सा...
kumarendra singh sengar
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व्यक्ति कितनी जल्दबाजी में रहता है इसको सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है. एक-दो पंक्तियों की पोस्ट को तो व्यक्ति पढ़ लेता है मगर कुछ लम्बी पोस्ट दिखाई देने की स्थिति में लोग बस लाइक का बटन खटका कर आगे बढ़ जाते हैं. कुछ तो पोस्ट पर बस लाइक का खटका दबाने ही आते हैं. एक म...