ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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टीआरपी के बिसातियोंन प्राइम टाइम में हंगामा मचा और न कोई कवर स्टोरी सामने आयी अनब्याही माता होने की पीढ़ीगत परम्परा के अनगिनत महीन और भद्दी वजहों को तलाशता कोई नौकरशाह नहीं मिला, कोई समाजसेवी भी नहीं और कोई पत्रकारनुमा सोशल एक्टिविस्ट भी नहीं दिखा। तब ऐसी खबरें...
Bharat Tiwari
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हिंदी में पीएचडी यशस्विनी पांडेय, बुद्ध के महापरिनिर्वाण भूमि कुशीनगर की जन्मी हैं. आजकल वडोदरा में रहती हैं. कविता, आलोचना, यात्रा-वृतांत के ज़रिये...
kumarendra singh sengar
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शिक्षित व्यक्ति विमर्श करने की क्षमता का विकास कर लेता है. तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर तर्कशील बन जाता है. इधर कुछ समय से लगने लगा है कि आधुनिकता के नाम पर साक्षरता जैसे देह के आसपास सिमटती जा रही है. इस देह में भी उस विमर्श के लिए स्त्री-देह सबसे सहज विषय-वस्तु...
 पोस्ट लेवल : स्त्री विमर्श आलेख
Bharat Tiwari
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); किसे होना चाहिये आपका आदर्श?— प्रज्ञा कहानी को कहानी रहने दीजिये, स्त्री का आत्मसम्मान, उसका आदर्श इससे कहीं ज्यादा ऊंचा है। यदि काल्पनिक या दन्त कथाओं पर ही इतनी मारकाट मचानी है तब आप किसके पक्ष में खड़े ह...
Bharat Tiwari
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स्त्रियों द्वारा अपनी अस्मिता का रेखांकन पुरुषों को “स्वभावतः!” बुरा लगता है। — सुमन केशरीAmazon described the product as "a tabletop ashtray for decoration" and added "gold", "women" tags to it. It added that the ashtray can be used as Home decor, bar decor a...
Bharat Tiwari
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बड़े प्रतिरोध की आलोचनात्मक भाषा तो और शिष्ट और तर्कसम्मत होनी चाहिए— अनामिकाघृणा और आवेग से काँपती हुई भाषा यही बताती है कि आपके बचपन में आप पर ध्यान नहीं दिया गया और अब आपने अपने लिए ग़लत प्रतिमान चुने।स्त्री लेखकों को जो लानतें-मलानतें पिछले दिनों भेजी गईं, उसका...
sanjiv verma salil
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लघुकथादुहरा चेहरा*- 'क्या कहूँ बहनजी, सच बोला नहीं जाता और झूठ कहना अच्छा नहीं लगता इसीलिये कहीं आना-जाना छोड़ दिया. आपके साथ तो हर २-४ दिन में गपशप होती रही है, और कुछ हो न हो मन का गुबार तो निकल जाता था. अब उस पर भी आपत्ति है.'= 'आपत्ति? किसे?, आपको गलतफहमी हुई है...
Bharat Tiwari
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असली सच तो वह है जो शराब की कंपनी के सूडो-विज्ञापन में दिखता है 'मैन विल बी मैन' यानि 'आदमी अपनी जात से नहीं जायेगा'!... जायेगा ?वंदना राग के चिंतन, लेखन  और व्यवहार  में जो 'एकरूपता'  है, दरअसल वही कुंजी है, उस बंधन को खोलने की जिससे भारत...
Bharat Tiwari
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’शाल्मली’ के बहाने स्त्री विमर्श पर चर्चा उर्फ  (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ’’नियम और धर्म केवल कागज पर लिखने के लिए होते हैं या फिर तुम औरतों के लिए बनाए जाते हैं। इनसे हट कर एक और कानून होता है जो हम मर्दों के बीच प्रचलि...
अनंत विजय
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मुंबई के हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश को कट्टरपंथियों पर महिलाओं की जीत के तौर पर पेश किया जा रहा है । उत्साही टिप्पणीकार इसको महिला सशक्तीकरण से जोड़कर पेश कर रहे हैं । इसके पहले इस तरह का माहौल महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत के...