ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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 भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खुला विद्रोह भी हुआ। इसे ही जलसेना विद्रोह या मुम्बई विद्रोह(बॉम्बे म्युटिनी) के नाम से जाना जाता है। यह विद्रोह १८ फ़रवरी सन् १९...
शिवम् मिश्रा
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ठाकुर रोशन सिंह (अंग्रेजी:Roshan Singh), (जन्म:२२ जनवरी १८९२ - मृत्यु:१९ दिसम्बर १९२७) असहयोग आन्दोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुए गोली-काण्ड में सजा काटकर जैसे ही शान्तिपूर्ण जीवन बिताने घर वापस आये कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन&...
शिवम् मिश्रा
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बटुकेश्वर दत्त का जन्म 18 नवम्बर, 1910 को बंगाली कायस्थ परिवार में ग्राम-औरी, जिला-नानी बेदवान (बंगाल) में हुआ था। इनका बचपन अपने जन्म स्थान के अतिरिक्त बंगाल प्रांत के वर्धमान जिला अंतर्गत खण्डा और मौसु में बीता। इनकी स्नातक स्तरीय शिक्षा पी.पी.एन. कॉलेज कान...
शिवम् मिश्रा
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 अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, (अंग्रेजी:Ashfaq Ulla Khan, जन्म:22 अक्तूबर १९००, मृत्यु:19 दिसम्बर १९२७) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। उन्होंने काकोरी काण्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। ब्रिटिश शासन ने उनके ऊपर अभियोग चलाया और १९ दिसम्बर सन्...
PRAVEEN GUPTA
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स्वतंत्रता आंदोलन और मारवाड़ी वैश्य समाजस्वतंत्रता की भावना संस्कृति से ही प्रसारित होती है ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं’- इस भावना के मूल में देश प्रेम की भावना कार्य करती है जिसका आधार मज़बूत सांस्कृतिक धरोहर होती है वैश्य भी देशप्रेम की इस पवित्र भावना से अछूते नहीं...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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चिड़िया को जब देखता हूँ तब स्वतंत्रता का अनायास स्मरण हो आता हैजब चाहे उड़ सकती है जहाँ चाहे जा सकती है जब चाहे धूल में नृत्य कर सकती है अथवा पानी में नहा सकती है मनचाहा गीत गा सकती मुक्ताकाश में व...
Lokendra Singh
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आज भारत अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। कोरोना महामारी ने हम सबको बांध कर रखा हुआ है। इस महामारी के कारण अनेक चिंताएं और चुनौतियां हमारे सामने हैं। लेकिन, अच्छी बात यह है कि हम हारे नहीं हैं। हमने इस महामारी के सामने घुटने नहीं टेके हैं। हम पहले दिन से संघर्...
sanjiv verma salil
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गीत:कब होंगे आजादइं. संजीव वर्मा 'सलिल'*कब होंगे आजाद?कहो हमकब होंगे आजाद?....*गए विदेशी पर देशी अंग्रेज कर रहे शासन.भाषण देतीं सरकारें पर दे न सकीं हैं राशन..मंत्री से संतरी तक कुटिल कुतंत्री बनकर गिद्ध-नोच-खा रहेभारत माँ कोले चटखारे स्वाद.कब होंगे आजाद?कहो हमकब ह...
kumarendra singh sengar
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कई बार लगता है कि सोशल मीडिया की ऐसी स्वतंत्रता अब बंद की जानी चाहिए. एडिट फ्री व्यवस्था ने जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है वहीं विचारों की गंदगी भी फैला रखी है. किसी समय अपने आलेख, साहित्यिक रचनाओं के सम्पादक के धन्यवाद पत्र के साथ वापस आने पर बुरी तरह गुस्सा...
PRAVEEN GUPTA
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ज्योति प्रसाद अग्रवाल ज्योति प्रसाद अग्रवाल की संपूर्ण रचनाएं असम की सरकारी प्रकाशन संस्था ने चार खंडों में प्रकाशित की थीं। उनमें 10 नाटक और लगभग अतनी ही कहानियां, एक उ पन्यास, 20 से ऊपर निबंध, तथा 359 गीतों का संकल्न है, जिनमें प्रायः सभी असमिया भाषा में लिखे गये...