ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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​​नवगीत *हैं स्वतंत्र परतंत्र न अपनादाल दले छाती पर*गए विदेशी दूर स्वदेशी अफसर हुए पराए.  सत्ता-सुविधा लीन हुए जन प्रतिनिधि खेले-खाए.कृषक, श्रमिक, अभियंता शोषित शिक्षक है अस्थाई.न्याय व्यवस्था अंधी-बहरी, है दयालु ना...
शिवम् मिश्रा
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सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।विश्व हास्य दिवस (अंग्रेज़ी: World Laughter Day) प्रत्येक वर्ष 'मई' माह के प्रथम रविवार को मनाया जाता है। मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिक हँसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। हँसना सभी के शारीरिक व मानस...
शिवम् मिश्रा
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७० वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेरे पुत्र कार्तिक ने इस चित्र द्वारा अपने भाव दर्शाये |
 पोस्ट लेवल : 15/08 स्वतंत्रता दिवस 15/08
kumarendra singh sengar
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          जब पहली आधी रात को तिरंगा फहराया गया था, तब हवा हमारी थी, पानी हमारा था, जमीं हमारी थी, आसमान हमारा था तब भी जन-जन की आँखों में नमी थी। पहली बार स्वतन्त्र आबो-हवा में अपने प्यारे तिरंगे को सलामी देने के लिए उठे हाथों में एक क...
sahitya shilpi
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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sahitya shilpi
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kumarendra singh sengar
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ये संभवतः अपने आपमें हास्यास्पद प्रतीत हो कि इक्कीसवीं सदी में विचरण करता मानव आज भी कबीलाई संस्कृति में निवास कर रहा है. आवश्यक नहीं कि कबीलाई संस्कृति में निवास करने के लिए जंगलों, गुफाओं, कन्दारों, पेड़ों आदि पर रहा जाए. ये भी आवश्यक नहीं कि इस संस्कृति का होने क...
रविशंकर श्रीवास्तव
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