ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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नाव डगमग डोली तो माँझी पर टिक गयीं आशंकित आशान्वित आँखें, कोहरा खा गया दिन का भी उजाला अनुरक्त हो भँवरे की प्रतीक्षा कर रहीं सुमन पाँखें। सड़क-पुल के टेंडर अभी बाक़ी हैं कुछ अनजाने इलाक़ों में बहती नदियों और...
Bhavana Lalwani
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मुझे यात्राओं का कोई बहुत ज्यादा मौका नहीं मिला है; पुराने ज़माने के लोगों की तरह मेरी यात्रा भी छुट्टियों में ननिहाल जाने या बहुत हुआ तो किसी और रिश्तेदार के यहां जाने तक का एक सीमित अनुभव है ।  पर इस सीमित यात्रा में भी जो कभी रो...
PRABHAT KUMAR
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दिल्ली की सड़कों पर 1 बजे रातघर से बाहर कदम रखते हीदिखता है गलियों में सन्नाटा औरइस सन्नाटे में प्रेमी और प्रेमकाओं की चीखेंकई अमानवीय मानव और कई मानवीय कुत्तेगाड़ियों की बोनट पर बैठे हुएझूमते हुए नशे में गिरते हुए आदमीऔर खोखले, कमजोर, शरीरविहीन।ट्रकों का सड़कों पर रौ...
अजय  कुमार झा
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सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अब नियमित  रूप से समाचारों में देखने पढ़ने व सुनने को मिल जाती हैं | अफ़सोस और उससे अधिक चिंता की बात ये है की इन घटनाओं में लगातार इज़ाफ़ा ही हो रहा है | दो पहिआ वाहन से लेकर चार पहिया वाहन और भारी वाहन तक कोई भी इससे अछूता नहीं है |...
अजय  कुमार झा
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इस यात्रा के किस्से आप यहां और यहां पढ़ सकते हैं  जीपीएस होने के बावजूद भी हम थोड़ी देर के लिए अजमेर से आगे जाने के रास्ते में अपना अनियमित मार्ग भूलकर दूसरे रास्ते की ओर बढ़ गए मगर जल्दी ही हमें एहसास हो गया कि शायद हम एक गलत टर्न ले चुके हैं ऐसे में बेहतर यह...
अजय  कुमार झा
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इस यात्रा के पहले भाग को आप यहाँ पढ़ सकते हैं इस यात्रा को सड़क मार्ग से ही तय करने का कार्यक्रम जब बनाया था तब मुझे ठीक ठीक अंदाजा नहीं था कि, जयपुर से उदयपुर का मार्ग ,बीच में पड़ने वाले शहर आदि की जानकारी ठीक ठीक नहीं थी | न ही अब तक मैं कभी जयपुर से आगे कभी ब...
sanjiv verma salil
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समीक्षा- आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ के गीत- नवगीत संग्रह ‘काल है संक्रांति का’तथा‘सड़क पर’ -ं डाॅ. रमेश चंद्र खरे, दमोह*व्यक्ति की दबी प्रकृति और रुचि प्राप्त आजीविका में भी अंततःअपना मार्ग खोज ही लेती है। सिविल इंजीनियर संजीव वर्मा भी ‘लोकनिर्माण’ के व्यस्त जीवन मे...
विजय राजबली माथुर
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 * मोदी ने झूठ से भरे और निचले स्तर के भाषण किए और पैसे तथा नौकरशाही के इस्तेमाल में कोई कसर नहीं छोड़ा। लेकिन वही मोदी लोकप्रिय साबित हुए क्योंकि कारपोरेट पूंजीवाद उनके पीछे खड़ा था। मीडिया, सोशल मीडिया और प्रचार में उन्होंने हजारों करोड़ खर्च किया और झूठ क...
विजय राजबली माथुर
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* नतीजों में अंधेरगर्दी साफ़ नज़र आयेगी और तब, जनता बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतर सकती है ! इससे सामाजिक अराजकता फ़ैल जायेगी जो अभी भारत का शासक पूँजीपति वर्ग कत्तई नहीं चाहता है I**हाल के दिनों में गोदरेज, बजाज, महिन्द्रा आदि कई बड़े पूँजीपतियों के रुख में अहम बदलाव...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा- 'सड़क पर'- आशा और कर्मठता का संदेशअमरेंद्र नारायण भूतपूर्व महासचिव एशिया पैसिफिक कम्युनिटी बैंकाक* [कृति विवरण: सड़क पर, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा सलिल, प्रथम संस्करण २०१८, आकार १३.५ से.मी. x २१.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक, पृष्ठ...