ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
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मेरी पुस्तक 'लम्हों का सफ़र' जो मेरा प्रथम एकल कविता-संग्रह है, का लोकार्पण 7. 1. 2020 को विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में संपन्न हुआ। आदरणीय रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' जी, केन्द्रीय विद्यालय से अवकाशप्राप्त प्राचार्य और साहित्यकार हैं, पुस्तक के लोकार्पण में शामिल न ह...
अनीता सैनी
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ये जो घर हैं न फिर मिलते हैं सफ़र मेंयों भ्रम में बुने सपने भी पथिककभी-कभी सूखे में हरे होते हैं।परिग्रह के पात-सा झरता पुण्य पत्ते बन फिर पल्ल्वित होता है। अनजाने पथ परअनजाने साथी भी  सच्चे होते हैं।राहगीर राह  की दूरी भाँपनायात्रा सांसों की अति...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सफ़ेद कबूतर उड़ा साहिल से समुद्र में डूबते सूरज को देखने उड़ता गया... उड़ता ही गया!अब समंदर के ऊपर था बस अँधेरा...घना अँधेरा!रेत न पीछे नज़र आया न बहुत आगे तक...  सफ़ेद कबूतर ने लौटने का निश्चय कियाजहाँ से उड़ा था उस ओर मुड़ा था...
अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
अनीता सैनी
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 सदानीरा नदी कावेरी,  कर्नाटक, उतरी तमिलनाडु में बहती, पश्चिमी घाट के पावन पर्वत ब्रह्मगिरी से उपजी,  दक्षिण पूर्व में प्रबल प्रवाह प्रेम का प्रवाहित कर,  बंगाल की खाड़ी में जा मिली |कुछ दर्द वक़्त का यूँ निखरा, साँसो...
Roli Dixit
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"कहां था बेटा...फोन तक नहीं उठाया..." मां की आवाज डू&#2...
Roli Dixit
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Roli Dixit
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मेरे भीतर की स्त्री ने दम तोड़ दिया था,जब माँ सा &...
Roli Dixit
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तुम्हारे अंदर होती जरा सी हरकतबढ़ा देती है मेरी आहट,तुम्हारी मासूम सी हथेलियों की छुअनकई बार मेरी आँखें नम कर जाती है,जरा सा करवट बदलतेतुम्हारा कसकर पकड़नाजैसे छूट ही जाओगी मुझसे;तुम दूर होती ही कब होजब जगती हो तो सवालों मेंऔर सोते ही खयालों मेंकाबिज़ हो चुकी हो पूरी...
मुकेश कुमार
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सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलती तेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज&nb...