उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक ब...