ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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मोहब्बत हो गई जिस को उसे अब देखना क्या हैभला क्या है बुरा क्या है सज़ा क्या है जज़ा क्या हैज़रा तुम सामने आओ नज़र हम से तो टकरावकिसे फिर होश हो तुम ने कहा क्या है सुना क्या हैमोहब्बत जुर्म ऐसा है कि मुजरिम है खड़ा बे-सुधकिया क्या है गुनह क्या है सज़ा क्या है ख़ता क...
 पोस्ट लेवल : अमर उजाला माहम शाह
Vikram Pratap Singh Sachan
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गोविन्दपुर की जातीय हिंसा पर मुख्यमन्त्री ने चुप्पी बनाये रखी। रहस्यमई चुप्पी!!! सत्ता पोषित लोग उत्पात करते रहे, और कानून को क्वारंटीन कर दिया गया। जिस समाजवाद के लिये राममनोहर लोहिया ने लड़ाई लड़ी, जिसे चौधरी चरण सिंह ने आत्मसात किया, जिसे राजा माण्डा ने खड़ा किया।...
sanjay krishna
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    -गोपालराम गहमरी                        जे सूरजते बढ़ि गये            &nb...
Akhilesh Karn
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); गायक :  अल्का याज्ञनिकफिल्म/एल्बम:  घर द्वारगीतकार: लक्ष्मण शाहाबादीसंगीतकार: चित्रगुप्तलेबल:  टी सीरीज (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हम ना जइबै बलम घर हो भाभीहम ना...
Akhilesh Karn
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); गायक : कविता कृष्णमूर्ति व साथीफिल्म/एल्बम:  सजनवा बैरी भइले हमारगीतकार:  समीरसंगीतकार:  चित्रगुप्तलेबल:  वीनस (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हो हो हो...
parasmani agrawal konch
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सियासत का ऊॅट वक्त और परिस्थितियों की चाल के अनुसार खुद की करवटों को बदलता है और जिस व्यक्ति ने सियाशी हवाओं के रूख को भांपते हुए विपक्ष की कमजोरी को आधार बना अपने पांसे समय पर फेंक दिया राजनीति में वही मुकद्दर का सिंकदर बन जाता है। कोरोना संकट से गुजर रहे देश में...
 पोस्ट लेवल : आलेख #हमतोलिखेंगे
ज्योति  देहलीवाल
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''ये दोस्ती, हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोड़ेंगे...'' शोले फिल्म के इस गाने को चरितार्थ किया हैं याकूब मोहम्मद ने। कोरोना के कारण जब सभी ओर से सिर्फ़ नकारात्मक ख़बरे देखने और सुनने मिल रही हैं, तब दिल को सुकून देती एक सकारात्मक ख़बर पढ़ी। याकूब ने बता द...
jaikrishnarai tushar
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एक गीत -श्रमिकों के लिएहम आये थे राजव्यवस्था को सोने में मढ़ने बाबू अभी शहर से गाँव जा रहे हर मुश्किल से लड़ने बाबू !ख़त लिखना फिर आ जाएंगे देश की मूरत गढ़ने बाबू !पुल ,चौराहे ,सड़क बनाये हीरा काटे और तराशे ,ईंटा ,गारा ,मिट्ट...
Rajeev Upadhyay
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हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लोह-ए-अज़ल में लिखा हैजब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां रुई की तरह उड़ जाएँगे हम महकूमों के पाँव तले ये धरती धड़-धड़ धड़केगी और अहल-ए-हकम के सर ऊपर जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से सब...
jaikrishnarai tushar
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भारतीय पुलिस ,प्रशासनिक अधिकारियों एवं उनके परिवारों को समर्पित एक कविता /गीत समय के साथ भारतीय पुलिस का चेहरा काफी कुछ बदल रहा है लेकिन वर्दी के रुतबे के भीतर भी एक दर्द छिपा रहता है जो किसी से कहा नहीं जाता किसी से सुना नहीं जाता | वर्तमान वैश्विक महामारी मे...