ब्लॉगसेतु

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--अंग्रेजी से ओत-प्रोत,अपने भारत का तन्त्र,मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।।--आजादी के बाद हमारी,मौन हो गई भाषा,देवनागरी के सपनों की,गौण हो गई परिभाषा,सुप्त हो गये छंद-शास्त्र,अभिलुप्त हो गये मन्त्र।मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।।--कहाँ गया गौरव अतीत,अमृत गा...
Basudeo Agarwal
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जगमग जगमग करता आये,धूम धड़ाका कर वह जाये,छा जाती उससे खुशयाली,क्या सखि साजन? नहीं दिवाली।चाव चढ़े जब घर में आता,फट पड़ता तो गगन हिलाता,उत्सव इस बिन किसने चाखा,क्या सखि साजन? नहीं पटाखा।ये बुझता होता अँधियारा,खिलता ये छाता उजियारा,इस बिन करता धक-धक जीयाक्या सखि साजन, न...
Akhilesh Karn
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फिल्म : झूलनी के रंग सांचागायक : मनोज तिवारी मृदुल (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); अरे झूलनी के रंग सांचा हमार पियाझूलनी के रंग सांचा हमार पियाझूलनी के रंग सांचा हमार पियाझूलनी में गोरी लागा हमार  जियाओही झूलनी गोरी लागा हमार जियाझूलनी...
अनंत विजय
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पाकिस्तानी वामपंथी शायर फैज अहमद फैज एक बार फिर से चर्चा में हैं। ये चर्चा गैर साहित्यिक विवाद की वजह से शुरू हुई। इसमें साहित्य के कई विद्वान कूद गए और इसको एक अलग ही रंग देने की कोशिश शुरू कर दी। आईआईटी कानपुर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन में फैज क...
Khushdeep Sehgal
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‘हम देखेंगे’ नज़्म क्या वाकई हिन्दू विरोधी या इससे डर की वजह कुछ और?फ़ैज़ अहमद फ़ैज- फोटो आभार: विकीमीडिया फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘’व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक (हम देखेंगे)” में बुत हटाने के मायने क्या वाकई हिन्दू धर्म और उसे मानने वालों के ख़िलाफ़ थे? क्या इंडियन...
Basudeo Agarwal
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आता सीटी सा ये बजाता,फिर नभ के गोते लगवाता,मिटा दूरियाँ देता चैन,क्या सखि साजन?ना सखि प्लैन।सीटी बजा बढ़े ये आगे,पहले धीरे फिर ये भागे,इससे जीवन के सब खेल,क्या सखि साजन? ना सखि रेल।इसको ले बन ठन कर जाऊँ,मन में फूली नहीं समाऊँ,इस बिन मेरा सूना द्वार,क्या सखि साजन? ना...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Born: 24 December 1924, Kotla Sultan SinghDied: 31 July 1980, Mumbai  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
 पोस्ट लेवल : 24 December 1924 मोहम्मद रफी
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--पड़ने वाले नये साल के हैं कदम!स्वागतम्! स्वागतम्!! स्वागतम्!!!--कोई खुशहाल है. कोई बेहाल है,अब तो मेहमान कुछ दिन का ये साल है,ले के आयेगा नव-वर्ष चैनो-अमन!स्वागतम्! स्वागतम्!! स्वागतम्!!!--रौशनी देगा तब अंशुमाली धवल,ज़र्द चेहरों पे छायेगी लाली नवल,मुस्कुरायेंगे ग...
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--आपाधापी की दुनिया में,ऐसे मीत-स्वजन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे हैं।।--धीर-वीर-गम्भीर मौन है,कायर केवल शोर मचाता।ओछी गगरी ही बतियाती,भरा घड़ा कुछ बोल न पाता।गर्जन करते, बरस न पाते,हमने वो सावन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन...
अनीता सैनी
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दर्द ३९००शहीद जाँबाज़ जवानों कासीने में उभर आयासंजीदा साये सिहर उठे होंगे उनके भी मौजूदा हालात देख देश केशिथिल शब्दों में हुई होगी गहमागहमी उनके भीआपस में वे भी बोल उठे होंगेक्यों किया तकल्लुफ़ चीख़ते सन्नाटे नेक्यों सुनाया संदेश सर्द हवाओं नेयही एहसासात&nbs...