ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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यह सड़ाँध मारतीआब-ओ-हवा भले हीदम घोंटने परउतारू है,पर अब करें भीतो क्या करेंयही तोहमसफ़र हैदुधारू है।मिट्टीपानीहवावनस्पति सेसदियों पुरानीतासीर चाहते हो,रात के लकदकउजालों मेंटिमटिमातेजुगनुओं कोपास बुलाकरकभी पूछा-"क्या चाहते हो?" तल्ख़ियों सेभागते-भागतेआख़िरहास...
अनीता सैनी
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जिंदगियाँ निगल रहा प्रदूषण  क्यों पवन पर प्रतंच्या चढ़ाया है कभी अंजान था मानव इस अंजाम से आज वक़्त ने फ़रमान सुनाया है चिंगारी सोला बन धधक रही मानव !किन ख्यालों में खोया हैवाराणसी सिसक-सिसक तड़पती रही आज...
अनीता सैनी
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आहत हुए अल्फ़ाज़ ज़माने की आब-ओ-हवा में,  लिपटते रहे  हाथों  में और  सीने में उतर गये, अल्फ़ाज़ में एक लफ़्ज़ था मुहब्बत, ज़ालिम ज़माना उसका साथ छोड़ गया,   मुक़द्दर से झगड़ता रहा ता-उम्र वह,  मक़ाम मानस अपना बदलता गया,&nbs...
Pratibha Kushwaha
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‘महिलाएं टैक्स फ्री सैनेटरी नैपकिन की मांग कर रही हैं, मगर मैं चाहता हूं कि यह पूरी तरह से मुफ्त हो, क्योंकि महिलाओं की सेहत से जुड़ा यह बहुत ही गंभीर मसला है। सिर्फ रक्षा बजट में 5 फीसदी की कमी करके सरकार महिलाओं को यह सौगात दे सकती है।’ ये बाते फिल्म अभिनेता अक्ष...
अमितेश कुमार
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प्रवीण शेखर वरिष्ठ नाट्य निर्देशक हैं, इलाहाबाद के रंगकर्म को उन्होंने एक पेशेवर तेवर और स्तर दिया है. देश के रंगकर्म में उनकी सार्थक उपस्थिति भी है. वो ऐसे रंगकर्मियों में हैं जो पढ़ने और लिखने में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं, रंग आलोचना उनकी ए...
Yashoda Agrawal
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कितना भी चाहे वह बचनाकितना भी चाहे मुँह फेरना  गाहे बगाहे रोज़ ही उसकी  मुलाक़ात हो जाती है,उस सबसे जिससे वह  पूरी शिद्दत से दूर बहुत दूररहना चाहती है  लेकिन लाख कोशिश करने पर भीबचने की कोई और सूरतनिकाल नहीं पाती है !बचना चाहती...
 पोस्ट लेवल : दूषित हवा साधना वैद
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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विजय राजबली माथुर
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  ~विजय राजबली माथुर ©
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )   संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
 पोस्ट लेवल : जानलेवा हवा EPCA NCR Lko॰
kumarendra singh sengar
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समाज आये दिन नए-नए आन्दोलनों से रूबरू होता है. आधुनिकता के वशीभूत आगे बढ़ता या कहें कि आगे बढ़ने का नाटक करता ये समाज ऐसे-ऐसे आन्दोलनों के सहारे चलने की कोशिश करने में लगा है जो भारतीय समाज में ही नहीं वरन किसी भी समाज में स्वीकार नहीं होंगे. सबरीमाला मंदिर विवाद के...