ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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गुजरात के मशहूर स्वामीनारायण संप्रदाय के एक मंदिर के स्वामी कृष्णनस्वरुप दास ने पिछले दिनों एक प्रवचन के दौरान कहा कि, यदि महिलाएं मासिक धर्म के दौरान खाना बनाएंगी तो अगले जन्म में वह श्वान पैदा होगी। सोच और समझ का दुर्भाग्य यहीं खत्म नहीं होता तो इसी संस्थान द्वार...
अनीता सैनी
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 विपदा में बैठी उस माँ की फ़िक्र हूँ, महक ममता की लहू में बहूँ  मैं, बेचैन बाबुल के दिल की दुआ हूँ, यादों में झलके नयन-नीर  हूँ मैं, दिलों में बहती शीतल हवा मैं...हवा हूँ...भाई से बिछड़ी बहन की हँसी मैं, स्नेह-बंधन मे...
सुशील बाकलीवाल
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 पुराणों में वर्णित धरती के बैकुंठ के रुप में प्रचलित इस मंदिर में दिखेंगे ये 8 अजूबे...1. मन्दिर के ऊपर झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराते हुए दिखता है ।2. पुरी में किसी भी जगह से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखें, तो वह आपको सामने ही लगा दिखेग...
अनीता सैनी
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सर्द हवाएँ चली कुबेला में,   ओस से आँचल सजाने को,   ललिता-सी लहरायी निशा संग, शीतल चाँदनी छिटकाने को |समेटे थी यौवन चिरकाल से,  खिला कुँज शेफालिका-सा,   झूल रही झूला नील गगन में, ख़ुशनुमा फुहार बरसाने को |प...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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यह सड़ाँध मारतीआब-ओ-हवा भले हीदम घोंटने परउतारू है,पर अब करें भीतो क्या करेंयही तोहमसफ़र हैदुधारू है।मिट्टीपानीहवावनस्पति सेसदियों पुरानीतासीर चाहते हो,रात के लकदकउजालों मेंटिमटिमातेजुगनुओं कोपास बुलाकरकभी पूछा-"क्या चाहते हो?" तल्ख़ियों सेभागते-भागतेआख़िरहास...
अनीता सैनी
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जिंदगियाँ निगल रहा प्रदूषण  क्यों पवन पर प्रतंच्या चढ़ाया है कभी अंजान था मानव इस अंजाम से आज वक़्त ने फ़रमान सुनाया है चिंगारी सोला बन धधक रही मानव !किन ख्यालों में खोया हैवाराणसी सिसक-सिसक तड़पती रही आज...
अनीता सैनी
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आहत हुए अल्फ़ाज़ ज़माने की आब-ओ-हवा में,  लिपटते रहे  हाथों  में और  सीने में उतर गये, अल्फ़ाज़ में एक लफ़्ज़ था मुहब्बत, ज़ालिम ज़माना उसका साथ छोड़ गया,   मुक़द्दर से झगड़ता रहा ता-उम्र वह,  मक़ाम मानस अपना बदलता गया,&nbs...
Pratibha Kushwaha
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‘महिलाएं टैक्स फ्री सैनेटरी नैपकिन की मांग कर रही हैं, मगर मैं चाहता हूं कि यह पूरी तरह से मुफ्त हो, क्योंकि महिलाओं की सेहत से जुड़ा यह बहुत ही गंभीर मसला है। सिर्फ रक्षा बजट में 5 फीसदी की कमी करके सरकार महिलाओं को यह सौगात दे सकती है।’ ये बाते फिल्म अभिनेता अक्ष...
अमितेश कुमार
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प्रवीण शेखर वरिष्ठ नाट्य निर्देशक हैं, इलाहाबाद के रंगकर्म को उन्होंने एक पेशेवर तेवर और स्तर दिया है. देश के रंगकर्म में उनकी सार्थक उपस्थिति भी है. वो ऐसे रंगकर्मियों में हैं जो पढ़ने और लिखने में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं, रंग आलोचना उनकी ए...
Yashoda Agrawal
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कितना भी चाहे वह बचनाकितना भी चाहे मुँह फेरना  गाहे बगाहे रोज़ ही उसकी  मुलाक़ात हो जाती है,उस सबसे जिससे वह  पूरी शिद्दत से दूर बहुत दूररहना चाहती है  लेकिन लाख कोशिश करने पर भीबचने की कोई और सूरतनिकाल नहीं पाती है !बचना चाहती...
 पोस्ट लेवल : दूषित हवा साधना वैद