ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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भोजपुरी हाइकु:संजीव*आपन बोली आ ओकर सुभाव मैया क लोरी.*खूबी-खामी केकवनो लोकभासा पहचानल.*तिरिया जन्म दमन आ शोषण चक्की पिसात.*बामनवादकुक्कुरन के राज खोखलापन. *छटपटातअउरत-दलित सदियन से.*राग अलापे हरियल दूब पमन-माफिक.*गहरी जड़देहात के जीवनमोह-ममता.*३०-६-२०१४ http://divya...
जेन्नी  शबनम
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फ़ौजी-किसान  (19 हाइकु)  *******  1.  कर्म पे डटा  कभी नहीं थकता  फ़ौजी-किसान!  2.  किसान हारे  ख़ुदकुशी करते,  बेबस सारे!  3.  सत्ता बेशर्म  राजनीति करती,  मरे किसान!  4.  बिकता मोल &n...
 पोस्ट लेवल : हाइकु किसान
ऋता शेखर 'मधु'
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दोहे   1 दादी अम्मी टोकते, टोकें अब्बूजान लगा सोलवां साल अब, आफत में है जान2 महँगाई की मार से बिलख रहा इंसान जीवनयापन के लिए आफत में है जान 3इधर उधर क्या ढूँढता, सब कुछ तेरे पास नारियल के बीच बसी, मीठी मीठी प्यास 4यादें हरसिंगार हों, वादे गेंद...
sanjiv verma salil
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लेख हिंदी ने बनाया बोनसाई हाइकु को वटवृक्ष आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*हाइकु: असमाप्त काव्य का नैरन्तर्य:पारम्परिक जापानी हाइकु (Haiku 俳句 high-koo) ३ पदावलियों में विभक्त, ५-७-५ अर्थात १७ ध्वनिखण्डों (लघुतम उच्चरित ध्वनि, ...
sanjiv verma salil
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एक नवगीत: मिलती कबहुँ न बिन तिकड़म कें  कुरसी काहे गुइंया?*पल भर बिसरत नईं बिसारे हमखों जनता प्यारी। रैली, जुलुस, भीड़, भगदड़ सें हमें बढ़ावनवारी। बहु मत दे पहुँचाउत संसद तब बन पाउत नेता-जुमला बता भुला दए वादे&nbsp...
sanjiv verma salil
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जबलपुर भूकंप की बरसी पर भूकंप के कारणों और बचाव के उपायों पर प्रकाश डालती रचनाएं. इनका उपयोग जनसामान्य / विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन हेतु करें. नवगीत:संजीव.धरती की छाती फ़टीफैला हाहाकार.पर्वत, घाटी या मैदानसभी जगह मानव हैरानक्रंदन-रुदन न रुकता हैजागा क्या कोई...
जेन्नी  शबनम
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हमारी माटी  (गाँव पर 20 हाइकु)  *******  1.  किरणें आई  खेतों को यूँ जगाए  जैसे हो माई।  2.  सूरज जागा  पेड़ पौधे मुस्काए  खिलखिलाए।  3.  झुलसा खेत  उड़ गई चिरैया  दाना न पानी।  4.  दुआ...
 पोस्ट लेवल : गाँव हाइकु
sahitya shilpi
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 पोस्ट लेवल : हाइकु सुशील शर्मा
sanjiv verma salil
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हाइकु गीत*लोकतंत्र मेंमनमानी की छूटसभी ने पाई।*          सबको प्यारा          अपना दल-दल          कहते न्यारा।           बुरा शेष का        &nbsp...
sanjiv verma salil
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हाइकु गीत * आया वसंत इन्द्रधनुषी हुए दिशा-दिगंत.. शोभा अनंत हुए मोहित, सुर-मानव संत.. * प्रीत के गीत गुनगुनाती धूप बनालो मीत. जलाते दिए एक-दूजे के लिए कामिनी-कंत.. * पीताभी पर्ण संभावित जननी जैसे विवर्ण.. हो हरियाली मिलेगी खुशहाली होगे श्रीमंत.. * चूमता...