***राजीव तनेजा***   “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “ओ….कुण्डी ना खड़का …सोणया सिद्धा अन्दर आ"… “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “अरे!…कौन है भाई?….ज़रा रुको तो सही…अभी खोलता हूँ…..पहले ज़रा नाड़ा तो ठीक से बाँध लूँ”… “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “तनेजा जी!…दरवाज़ा खोलिए……खोलिए ना...