ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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दोस्तो दिल का सदर घर का सदर होने को है,बा-बहर जो थी ग़ज़ल वह बे-बहर होने को है,हम मुहब्बत के असर में खूब पागल थे रहे,जिंदगी की असलियत का अब असर होने को है।(2122×3  212)*********उल्टे सीधे शब्द जोड़ कर, कुछ का कुछ लिख लेता हूँ,अंधों में काना राजा हूँ, मन मर्जी का...
Basudeo Agarwal
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एक राजनैतिक व्यंग मुक्तकभारत के जब से वित्त मंत्री श्री जेटली।तुगलकी फरमानों की नित खुलती पोटली।मोदीजी इनसे बचके रहें आप तो जरा।पकड़ा न दें ये चाय की वो फिर से केटली।।*********(चीन पर व्यंग)सामान बेचते हो आँख भी दिखा रहे।फूटी किस्मत में चीन धूल क्यों लिखा रहे।ग्राहक...
राजीव सिन्हा
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आखिर को लैला की माँ ने मंजूर कर लिया, कहा – “अब लैला को मजनू के हाथ ही सौंप दूँगी!” सुननेवाले इस समाचार से खुश हो गए। लोगों ने लैला की माँ को बधाइयाँ दीं। मजनू बेचारा कितनी मुद्दत से लैला के पीछे तड़प रहा था। आशिकी के कारण इस दुनिया और उस दुनिया द...
राजीव सिन्हा
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कायँ! कायँ !! कायँ !!!        शाम का समय था। चचा छक्कन शेख साहब के साथ हमेशा की तरह शतरंज खेल रहे थे। मिर्जा साहब हुक्का पीते जाते थे और कभी-कभी किसी अच्छी चाल पर खुश होकर दोनों की तारीफ भी करते जाते थे, कि इतने में शेख साहब बोले-“देखिए, जरा सँभल कर चलिए, उठा लूँ व...
राजीव सिन्हा
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‘रोमांस’ के लिए हिन्दी में कोई उपयुक्त शब्द नहीं मिलता। हमारे अय्याजी यद्यपि संस्कृतज्ञ थे, किन्तु इस शब्द के साथ उनका संबंध ठीक उसी तरह जुड़ गया था, जैसे मलहम के साथ पट्टी। अंग्रेजी न जानने पर भी वे रोमांस का रहस्य समझते अवश्य थे। हमारी यह धारणा और भी बलवती हो गई,...
Basudeo Agarwal
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काम क्रोध के भरे पिटारे, कलियुग के ये बाबा,बेच गये खा मन्दिर मस्ज़िद, काशी हो या काबा,चकाचौंध इनकी झूठी है, बचके रहना इनसे,भोले भक्तों को ठगने का, सारा शोर शराबा।सार छंद आधारित*********लिप्त रहो जग के कर्मों में, ये कैसा सन्यास बता,भगवा धारण करने से नहिं, आत्म-शुद्ध...
समीर लाल
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पास के घर से रेडिओ पर फरमाईशी नगमों के कार्यक्रम में गाना बज रहा था.गाने की फरमाईश इतने लोगों ने की थी कि लगा जैसे लोगों के पास पोस्ट कार्ड लिखकर गाने की फरमाईश करने के सिवा कोई काम ही नहीं है. जितनी देर गाना न बजता, उससे ज्यादा देर फरमाईश करने वालों के नाम बजते. म...
दिनेश  प्रजापति
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पिक क्रेडिट - pixabayकुता बहुत स्वाभिमानी था, प्रात: कुता और कुतिया में अनबन हो गई थी। और तब से ही कुते ने जो रोना शुरू किया था,  तो अब तक चुप नहीं हुआ था। सारे नगर के कुते उसे चुप कराते-कराते थक कर स्वयं चुप हो गये थे, परन्तु वह रोए जा रहा था।अब नगर के एक वृद...
 पोस्ट लेवल : हास्य व्यंग्य
दिनेश  प्रजापति
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पिक क्रेडिट - pixabayओ मेरी महबूबा तुम्हारे नापाक इरादोंजमाखोर वायदों बेईमान निगाहोंऔर तस्करी अदाओं ने मेरा बजट बिगड़ दिया मेरा घर उजाड़ दिया।खूबसूरती का ठेका लेकरहजारों दिलों का कर लिया गबन प्यार का पुल कमजोर बुनियादों पर खड़ा करकेहँस रही हो जानेमन।दुक...
समीर लाल
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भजन की शुरुवात कहाँ से हुई यह तो पता नहीं मगर हुई प्रभु वंदना के लिए थी. यह किसी देवी या देवता की प्रशंसा में गाया जाने वाला गीत है. मीराबाई, सूरदास, तुलसीदास, रसखान आदि के भजन आदिकाल से प्रचलित रहे हैं. पहले गांव शहरों में लोग मंडली बनाकर रात रात भर भजन किया करते...